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जब मेहमान ने रिसोर्ट मैनेजर से हवा बंद करने की फरमाइश कर डाली!

एक रिसॉर्ट में भव्य पानी पर बने बंगलों का दृश्य, शानदार उष्णकटिबंधीय मौसम और शांत महासागरीय नज़ारों के साथ।
एक अद्भुत फोटो-यथार्थवादी चित्रण, जहां भव्य पानी पर बने बंगलों के अद्भुत दृश्य अप्रत्याशित मौसम की वास्तविकता से मिलते हैं। यह छवि एक लक्ज़री ठहराव के दौरान अप्रत्याशित अतिथि इंटरैक्शन की यादगार कहानी के लिए मंच तैयार करती है।

हमारे देश में शादी-ब्याह या छुट्टियों के मौसम में होटल-रिसोर्ट्स की खूब पूछ होती है। अमीर लोग जब लाखों खर्च कर “दुनिया से दूर” किसी सुनहरे द्वीप के लग्ज़री रिसोर्ट में छुट्टियां मनाने जाते हैं, तो उम्मीदें भी आसमान छूती हैं। लेकिन कभी-कभी ये उम्मीदें इतनी ऊँची हो जाती हैं कि भगवान भी सोच में पड़ जाएं! आज की कहानी एक ऐसे ही मेहमान की है, जिसकी फरमाइश सुनकर रिसोर्ट मैनेजर के भी होश उड़ गए।

हवा का बिल, रिसोर्ट के नाम!

ये किस्सा एक सुंदर द्वीप के पांच सितारा रिसोर्ट का है, जहाँ एक रात ठहरने का किराया कम से कम दो लाख रुपये से शुरू होता था। वहाँ के अधिकांश कमरे पानी के ऊपर बने लकड़ी के झोपड़े (bungalow) थे—यानि सागर की लहरें, ठंडी हवा, और प्राकृतिक खूबसूरती सब कुछ कुदरत की मेहरबानी!

एक दिन, एक महिला मेहमान ने अपने प्रवास के अंत में रिसोर्ट मैनेजर को ढूँढ निकाला और शिकायत ठोक दी—“मेरे झोपड़े में बहुत तेज़ हवा चलती रही। आप लोग इतने बड़े ब्रांड हैं, रिसोर्ट बनाते वक़्त मौसम के बारे में थोड़ी सोच लेते!”

अब भला बताइए, कोई भी भारतीय होटलियर हो या रिसोर्ट वाला, ऐसी शिकायत सुनकर पहले तो माथा ठनक जाएगा। ये तो वही बात हो गई जैसे दादीजी गर्मी में कहें—“बिजली तो चली गई, अब पंखा चला दो!” भाई, प्रकृति से कौन जीत पाया है?

मेहमान-भगवान, लेकिन भगवान भी हैरान!

हमारे यहाँ कहा जाता है—“अतिथि देवो भवः,” पर कभी-कभी अतिथि ऐसे सवाल पूछते हैं कि देवता भी माथा पकड़ लें! Reddit पर एक यूज़र ने मज़ाक में लिखा, “मैडम, यहाँ की ठंडी समुंद्री हवा तो बाहर से बुलाए गए सलाहकार (consultant) के जिम्मे है। वो जल्द ही आएंगे, आपकी शिकायत भगवान तक पहुँचा देंगे, उम्मीद है अगली बार वो खुद सुन लेंगे!”

सोचिए, अगर वाकई भगवान एक रिसोर्ट में VIP गेस्ट बनकर आएं, तो हर मौसम की शिकायत उन्हीं से दर्ज़ करवा दी जाए! एक और कमेंट में किसी ने मज़े से कहा—“अगर मौसम पर काबू चाहिए तो हर रात के ऊपर 2,500 डॉलर और जोड़ दीजिए, वो भी कैश में!”

यानी हमारे यहाँ की कहावत—“अंधा क्या चाहे, दो आँखें”—इन अमीर मेहमानों पर खूब फिट बैठती है। कभी किसी को समुंदर का पानी ज्यादा नमकीन लगता है, तो कोई चाहता है कि मुर्गा सुबह-सुबह ना बोले!

प्रकृति से लड़ाई—कभी जीत नहीं सकते

ऐसी अजीबोगरीब शिकायतें केवल पश्चिमी देशों की ही नहीं, हमारे भारत में भी खूब सुनने को मिलती हैं। पहाड़ों में पर्यटक बर्फबारी का आनंद लेने आते हैं, फिर होटल वालों से कहते हैं—“सड़क पर बर्फ क्यों है, किसी से साफ करवाओ!” किसी को बारिश की आवाज़ सोने नहीं देती, तो कोई गाँव में खेत के पास रहने जाता है और कहता है—“मच्छर और मेंढक की आवाज़ कम करवा दो!”

एक और यूज़र ने बताया कि उनके होटल में मेहमान ने नदी के बहाव की आवाज़ ‘कम’ करने को कहा। सोचिए, अगर ऐसा वाकई मुमकिन हो जाता, तो गंगा-यमुना भी शांत हो जातीं! एक और मजेदार किस्सा—किसी ने रिसोर्ट मैनेजर से सूरज की रौशनी कम करने का तरीका पूछ लिया। अब भाई, परदे तो हैं, पर सूरज को कोई पर्दा लगा पाया है?

डिजाइन और दिमाग—कब चलेंगे साथ-साथ?

कई बार होटल-रिसोर्ट्स का डिज़ाइन ही मौसम के हिसाब से नहीं होता। एक यूज़र ने लिखा—टेक्सास के नक्शे पर बर्फीले इलाके में बिल्डिंग बना दी गई, छत सपाट रखी, नतीजा—पहली बर्फ में ही छत बैठ गई! हमारे यहाँ भी कई बार दिल्ली-मुंबई के आर्किटेक्ट्स हिमाचल या उत्तराखंड में बिना सोचे-समझे डिज़ाइन बना देते हैं, फिर लोकल लोग सिर पकड़ लेते हैं।

असल में, प्रकृति के साथ तालमेल बैठाना ही समझदारी है। हवाएं, बारिश, धूप, समुंदर की लहरें—इन सबका अपना वक्त और मिजाज़ है। अमीरों की फरमाइशें और रिसोर्ट्स की मार्केटिंग हमेशा इनके काबू में नहीं रह सकतीं।

निष्कर्ष: प्रकृति का मज़ा लीजिए, शिकायतें नहीं!

कहानी का सार यही है—प्राकृतिक सुंदरता का सच्चा आनंद लेना है तो मन बड़ा रखिए, और छोटी-छोटी तकलीफों को हँसी में उड़ा दीजिए। रिसोर्ट वाले भी इंसान हैं, जादूगर नहीं। अगर कभी हवा तेज़ चले, बारिश हो जाए, या समुंदर हलचल कर दे, तो समझ लीजिए प्रकृति आपको अपने असली रंग दिखा रही है। और अगर फिर भी शिकायत करनी हो—तो भगवान से ही करिए, शायद अगली बार मौसम आपके हिसाब से चले!

क्या आपके साथ भी ट्रैवल के दौरान कोई ऐसा अजीब अनुभव हुआ है? कमेंट में जरूर बताइए, और इस मजेदार किस्से को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!


मूल रेडिट पोस्ट: Should have considered weather when building the resort