जब मेहमान को मुफ्त में सेवा मिली, मगर गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया!
होटल में काम करने वालों के पास रोज़ नए-नए किस्से होते हैं, लेकिन कभी-कभी ऐसा वाकया हो जाता है कि दिमाग चकरा जाए! अब सोचिए, अगर आपको कुछ फ्री में मिल जाए तो आप क्या करेंगे? खुश होंगे, है ना? लेकिन हमारे आज के नायक को जब फ्री में सेवा मिली, तो साहब का पारा ही चढ़ गया!
एक दशक पुरानी मेहमाननवाज़ी, और फिर भी नया बवाल
कहानी शुरू होती है एक आलीशान होटल से, जहाँ एक परिवार पिछले 10 सालों से लगातार आता रहा है। अब इतने सालों बाद तो होटल वाले भी उन्हें ‘अपने’ जैसा मानने लगे होंगे। होटल में एक वेलनेस कॉम्प्लेक्स है—मतलब स्विमिंग पूल, वॉटरपार्क, और सॉना। लेकिन ध्यान रहे, ये सब मुफ्त में नहीं मिलता, खासकर जब कोई थर्ड पार्टी वेबसाइट से बुकिंग करे।
अब हुआ यूँ कि हमारे प्यारे अप्रेंटिस ने—भगवान उसे थोड़ी समझ दे—मेहमान के लिए वॉटरपार्क का पास बना दिया, वो भी मुफ्त में! सोचिए, गलती से ही सही, किस्मत खुल गई। लेकिन किस्मत खुलने पर भी ये मेहमान नाराज़ हो गया!
फ्री की चीज़ और ‘इज्ज़त’ का सवाल
शाम को साहब जब वापस रिसेप्शन पर आए, तो पता चला कि उनके रिस्टबैंड काम नहीं कर रहे। रिसेप्शनिस्ट ने चेक किया तो समझ आया कि गलती से वॉटरपार्क का पास फ्री में बना है। रिसेप्शनिस्ट ने विनम्रता से समझाया—“भैया, ये हमारी गलती है, जो टाइम आपने यूज़ किया, वो बिल्कुल फ्री है, कोई चार्ज नहीं लगेगा!”
बस, यहीं से हंगामा शुरू! मेहमान बोले—“नहीं! हम फ्री में कुछ नहीं लेते! हम हमेशा पेमेंट करते हैं! इसे सही करो, अभी के अभी!”
अब ज़रा सोचिए, हमारे यहाँ भी कई बार लोग ‘इज्ज़त’ के नाम पर मुफ्त की चीज़ लेने से कतराते हैं। जैसे शादी-ब्याह में कोई मिठाई या गिफ्ट लौटाने लगे—“नहीं-नहीं, हम खुद्दार लोग हैं!” शायद साहब को भी यही लगा कि होटल वाले उन्हें गरीब समझ रहे हैं। एक कमेंट में किसी ने लिखा भी, “गुस्साए लोग फ्री में चीज़ मिलने को अपनी बेइज्ज़ती समझ लेते हैं, मानो कोई ताना मार रहा हो।”
होटल वाला बोले— ‘किंग’ बनने के लिए ‘राजा’ जैसा बर्ताव चाहिए
रिसेप्शनिस्ट ने बार-बार समझाने की कोशिश की—“ये हमारी तरफ से है, आपको कोई चार्ज नहीं लगेगा, चिंता मत कीजिए।” मगर साहब का गुस्सा कम होने की बजाय बढ़ता ही गया। इतने में तो उन्होंने पुलिस बुलाने तक की धमकी दे डाली! कमेंट में किसी ने बड़ी मज़ेदार बात कही—“भारत में भी अगर कोई पुलिस की धमकी दे दे तो रिसेप्शनिस्ट बोलेगा, ‘कोई बात नहीं साहब, आप बुला लीजिए, हम भी इंतज़ार कर लेंगे!’”
साहब का बस नहीं चला तो कोर्ट में घसीटने की धमकी देने लगे। रिसेप्शनिस्ट ने भी जवाब में कह दिया—“ग्राहक अगर राजा है, तो उसे राजा जैसा बर्ताव भी करना चाहिए। आप तो अभी बिलकुल राजा नहीं लग रहे!”
वाह! क्या जवाब है! यहीं एक और कमेंट याद आ गया—“ऐसे लोग बस बहस जीतना चाहते हैं, चाहे बात कुछ भी हो।”
गुस्से का कोई इलाज नहीं!
किसी ने बड़ी गहरी बात लिखी: “कभी भी बेवकूफ को समझाने की कोशिश मत करो, क्योंकि वो बस बहस करने के लिए ही आया है!” सच कहें तो हमारे समाज में भी कई बार ऐसे लोग मिल जाते हैं जो हर बात में अपनी ‘जीत’ चाहते हैं, चाहे सामने वाला मुफ्त में भी दे दे।
कई पाठकों ने ये भी कहा कि रिसेप्शनिस्ट को डरना नहीं चाहिए था, ऐसे गुस्सैल मेहमान को होटल से निकाल देना चाहिए था। एक ने तो ये तक सुझा दिया—“कह दो, 500 रुपये दे दो और मामला खत्म!” वैसे, भारत में भी कई बार लोग कहते हैं—“बाबू, जो देना है, ले लो, बस अब और सिर मत खाओ।”
आखिर में: हँसी, डर और सबक
कहानी का क्लाइमेक्स तो तब आया जब रिसेप्शनिस्ट के सामने नए मेहमान आए, और उन्होंने हँसते हुए ‘हाय’ बोल दिया। बस, हमारे नाराज़ साहब को लगा कि उनकी हँसी का मज़ाक उड़ाया जा रहा है!
“क्या! तुम मुझ पर हँस रहे हो?”
अरे भाई, होटल वाले भी इंसान हैं, उनकी भी नर्वस हँसी होती है! आखिर में रिसेप्शनिस्ट ने हिम्मत दिखाई और साफ कह दिया, “अब ये बातचीत यहीं खत्म।”
कहानी का सबक? कभी-कभी, चाहे आप सामने वाले के लिए कितनी भी अच्छी मंशा रखो, लोग अपनी ही दुनिया में उलझे रहते हैं। और सबसे मज़ेदार बात, होटल मैनेजर को ईमेल में लिखना पड़ा—“मेहमान गुस्सा इसलिए हो गया, क्योंकि उसे कुछ फ्री में मिल गया था!”
आपकी राय क्या है?
क्या आपने भी कभी किसी को फ्री की चीज़ पर गुस्सा होते देखा है? या खुद कभी ऐसी अजीब स्थिति में फँसे हैं? कमेंट में अपनी कहानी ज़रूर साझा करें—शायद आपकी कहानी भी किसी का दिन बना दे!
मूल रेडिट पोस्ट: guest got mad because he got something for free