जब मेहमान के चिट्ठियों की बाढ़ ने होटल स्टाफ को परेशान कर दिया
होटल में काम करने वाले लोगों की ज़िंदगी बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतनी ही दिलचस्प और कभी-कभी सिर पकड़ने वाली भी होती है। आप सोचिए, एक मेहमान हर बार होटल आते ही हर उस चीज़ के लिए फ़रमाइश करने लगे, जो पहले से ही उसके कमरे में मौजूद है! जी हाँ, ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया पर सबकी हंसी का कारण बन गई है।
हर चीज़ पर अलग-अलग चिट्ठी – मेहमान की अनोखी आदत
इस कहानी की नायिका, एक महिला मेहमान हैं, जो लगभग हर दो हफ्ते में होटल आती हैं और इस बार दो कमरे बुक किए हैं। मगर इनका स्टाइल ऐसा कि हर छोटी-बड़ी चीज़ के लिए अलग-अलग चैट में अनुरोध भेजती हैं — तौलिया, साबुन, बॉडी लोशन, शावर कैप, तकिया (वो भी अलग-अलग: फोम और फेदर), और तो और कंबल भी! होटल स्टाफ माथा पकड़ कर सोच रहा है – "बहनजी, ये तो हर कमरे में पहले से ही रखा होता है!"
ऐसा लगता है जैसे किसी भारतीय शादी में मेहमान बार-बार पूछें, "खाना मिलेगा न? मिठाई तो है न?" और आप हर बार हँसकर जवाब दें कि "अरे भई, ये तो बिना पूछे प्लेट में आ जाएँगी!"
हर बार वही कहानी, वही फ़रमाइश
स्टाफ के मुताबिक़, ये मेहमान पिछले एक साल से लगातार हर दो हफ्ते पर आती हैं। हर बार जल्दी चेक-इन, देर से चेक-आउट – और, मज़े की बात ये कि इन्हें हमेशा एक ख़ास कमरा चाहिए, लेकिन बुकिंग कभी उस कमरे के लिए नहीं होती। जब मनचाहा कमरा नहीं मिलता, तो बुकिंग ही कैंसल कर देती हैं!
स्टाफ ने कई बार समझाया कि जो सामान आप मांग रही हैं, वो तो हर कमरे में रहता है। फिर भी, हर बार "माफ़ कीजिए" कह कर अगली बार फिर वही चिट्ठियों की बरसात।
सोशल मीडिया पर कमेंट्स की पटाखा-बर्षा
इस कहानी पर Reddit पर खूब मज़ेदार कमेंट्स आए। एक यूज़र ने लिखा, "कुछ लोगों को समझाने की कोशिश करना वैसा ही है जैसे रंग की खुशबू सूँघने की कोशिश करना!" (यानि कोई मतलब ही नहीं बनता)। इस पर और भी लोगों ने चुटकी ली – "शायद, ये हॉटलाइन की तारें जलने जैसी महक दे रही है!"
एक और यूज़र ने अपने अनुभव शेयर किए – "हमारे पिज़्ज़ा शॉप में लोग पनीर वाले पिज़्ज़ा पर बार-बार पूछते थे कि इसमें पनीर तो है न?" सोचिए, जैसे किसी ढाबे पर दाल मखनी ऑर्डर करके बार-बार कन्फर्म करें – "दाल तो है न इसमें?"
कुछ लोगों ने तो यह तक अंदाजा लगाया कि शायद इन मेहमान को कोई मानसिक या याददाश्त से जुड़ी समस्या हो सकती है, तो कुछ ने इसे OCD जैसी आदतों से जोड़ दिया। वहीं, कुछ ने व्यावहारिक सुझाव भी दिए – "जब इतना समय बर्बाद हो, मैनेजर से कहिए कि इन्हें अब बुकिंग न दें!"
होटल स्टाफ की मुश्किलें और भारतीय अनुभव
होटल वालों की दिक्कतें भी कुछ कम नहीं होतीं। एक कमेंट में सलाह दी गई, "हर बार स्पेशल रिक्वेस्ट को सिर्फ़ रिक्वेस्ट ही मानिए, ज़रूरी नहीं कि हर बार पूरी हो।" हमारे यहाँ भी तो यही होता है – ट्रेन में कोई बार-बार पूछे, "बेडशीट है न?" या बस में सीट रिज़र्वेशन के बाद भी सीट पर बैठने से पहले दस बार पूछें – "ये सीट मेरी ही है न?"
बहुत बार ग्राहक सिर्फ़ इसलिए अलग-अलग मांगें करते हैं ताकि उन्हें कोई स्पेशल ट्रीटमेंट मिल जाए या शायद उन्हें 'अपग्रेड' मुफ्त में मिल जाए। एक कमेंट में तो यहाँ तक कहा गया – "ये मेहमान असल में समझती सब कुछ हैं, बस आपको फ्री में बेहतर कमरा दिलवाने की कोशिश कर रही हैं!"
निष्कर्ष: क्या आप भी ऐसे मेहमान बनना चाहेंगे?
आखिर में यही कहना चाहेंगे – ज़रा सोचिए, अगर हर मेहमान ऐसी फ़रमाइशें करने लगे, तो होटल स्टाफ का क्या होगा! अतिथि देवो भवः हमारी संस्कृति का हिस्सा है, पर अतिथि अगर हद से बढ़ जाए, तो देवता भी परेशान हो जाएँ!
अब आप बताइए, आपके साथ कभी ऐसी कोई मज़ेदार या अजीब घटना घटी है? क्या आपने कभी किसी होटल या रेस्टोरेंट में ऐसी फरमाइशें की हैं या देखी हैं? नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें — और अगली बार होटल जाएँ, तो स्टाफ को मुस्कुराकर धन्यवाद कहना न भूलिए!
मूल रेडिट पोस्ट: Chat Overkill!