जब मम्मी ने कहा 'जन्मदिन तुम्हारा नहीं मेरा है' – तो बेटे ने भी पलटकर ऐसा जवाब दिया!
हम सबकी ज़िंदगी में एक ऐसा सदस्य ज़रूर होता है जो हर खुशी के मौके पर अपना ही रंग जमा देता है, और कई बार तो वो खुशी, दुख में बदल जाए! अब सोचिए, अगर खुद का जन्मदिन ही आपके लिए न रहे, तो कैसा लगेगा? आज की कहानी Reddit पर वायरल हुई एक ऐसे बेटे की है, जिसकी मम्मी ने उसके जन्मदिन पर ऐसा तमाशा किया कि बेटे ने भी अपनी ‘छोटी सी बदला’ वाली स्किल्स दिखा दीं।
मम्मी की ‘टाइम’ से भी तेज़ एंट्री!
पहले तो हमारे यहां अक्सर कहा जाता है – "समय से पहले और किस्मत से ज़्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता!" लेकिन कुछ लोगों के लिए समय ही सबकुछ होता है, जैसे इस कहानी की मम्मी। बेटे ने 1 बजे लंच रखा, और खुद 12:45 पर पहुंचा – लेकिन मम्मी तो घंटों पहले से ही तैयार बैठी थीं। जैसे ही बेटा पहुंचा, मम्मी ने गुस्से में बरसात कर दी – "मुझे दो घंटे बिठा दिया, इतनी देर कर दी, शर्म नहीं आती!"
भई, हमारे इंडिया में भी घर में कोई फंक्शन हो, तो मम्मियां सुबह से ही तैयार हो जाती हैं – लेकिन इतना भी क्या जल्दी कि बच्चे के आने से पहले ही गुस्सा तैयार! Reddit पर लोगों ने इसका खूब मजाक उड़ाया – एक यूज़र ने लिखा, "मम्मी को तो घड़ी गिफ्ट कर दो, वो भी बच्चों वाली, और साथ में घड़ी देखने का तरीका भी समझा दो!"
जन्मदिन – किसका? बेटा या मम्मी?
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब बेटे ने मम्मी से कह दिया, "अगर ऐसे ही रहना है तो आप चली जाओ, मेरा जन्मदिन है – मुझे शांति से मनाना है।" मम्मी ने जवाब दिया – "ये तुम्हारे बारे में नहीं है, मुझे अपने पोते-पोतियों के साथ समय बिताना है।"
अब सोचिए, अपने बच्चे का ही जन्मदिन हो और मम्मी कहें – "ये तो मेरे लिए है!" भारत में भी कई बार हम देखते हैं, बड़े-बुज़ुर्ग शादी या जन्मदिन को अपनी इच्छाओं का मैदान बना लेते हैं – "मेरी पसंद का खाना, मेरी पसंद का गाना, और मेरी पसंद की भीड़!"
एक Reddit यूज़र ने चुटकी ली – "मेरे घर भी मम्मी ऐसे ही करती हैं, मेरी शादी पर बोलीं – 'ये दिन तुम्हारा नहीं, मेरा है!'"
बेटे की ‘छोटी सी बदला’ – बच्चों की पूरी मोनोपॉली!
अब बेटा भी कम नहीं निकला। उसने सोचा, "मम्मी को अगर बच्चों के साथ वक्त चाहिए, तो मैं खुद ही बच्चों के साथ खेलूंगा!" उसने पूरे लंच में बच्चों को मम्मी के पास नहीं जाने दिया – खुद ही उनके साथ खेलता, हँसता, बातें करता रहा। मम्मी को कोने में बिठा दिया, वो भी मुंह फुलाए हुए!
यहीं तो असली ‘पेटी रिवेंज’ (छोटी सी बदला) आया – बेटे ने मम्मी को दिखा दिया कि जन्मदिन पर असली खुशी क्या है। Reddit के एक कमेंट में किसी ने लिखा, "नार्सिसिस्ट लोग तब तक मजा लेते हैं जब तक सब उनकी धुन पर नाचें, लेकिन जब कोई उनकी चालाकी पर लगाम लगाता है, तो असली मजा तो वहीं है!"
रिश्तों में सीमाएं – कब ‘ना’ कहना भी ज़रूरी
इस कहानी में एक और बड़ी सीख छुपी है। बेटे ने बाद में माना कि उसे समझ आ गया है – अब से वो मम्मी के हिसाब से कोई भी प्लान नहीं बनाएगा। Reddit पर कई लोगों ने सलाह दी – "ऐसे लोगों को अपने समारोहों से दूर ही रखो, वरना हर खुशी का रंग फीका हो जाएगा।"
भारत में भी आजकल यह समझ बढ़ रही है कि परिवार में भी सीमाएं ज़रूरी हैं। अगर कोई बार-बार आपकी खुशी में खलल डालता है, तो ‘ना’ कहना, और अपनी खुशी को प्राथमिकता देना, किसी अपराध से कम नहीं।
एक कमेंट में किसी ने लिखा, "अब अगली बार लंच हो तो मम्मी को गलत रेस्तरां का पता बता दो!" और किसी ने कहा, "मम्मी को ‘टाइम-आउट’ दो, ताकि वो खुद ही समझ जाएं कि हर बात में सेंटर ऑफ अट्रैक्शन होना ज़रूरी नहीं।"
निष्कर्ष – अपनी खुशी को खुद चुनिए!
हर रिश्ता ज़रूरी है, लेकिन अपनी खुशी को दूसरों के हाथ में देना – ये ठीक नहीं। इस कहानी से ये सीख मिलती है कि अगर कोई बार-बार आपकी खुशियों पर ग्रहण लगा रहा है, तो थोड़ा ‘पेटी रिवेंज’ भी गलत नहीं!
आपका क्या अनुभव रहा है? क्या आपके परिवार में भी कोई ऐसा है जो हर मौके पर अपनी चलाता है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए, और ये मजेदार कहानी अपने दोस्तों के साथ शेयर कीजिए!
आखिर में – मम्मी हों या पापा, दादी हों या बुआ – हर किसी को बस यही समझना है कि जन्मदिन, शादी, या कोई भी खुशी – असली मजा तो तभी है, जब सबकी खुशी, सबकी हो!
मूल रेडिट पोस्ट: Mum said my birthday wasn't about me - so I made sure it wasnt about her either