विषय पर बढ़ें

जब 'मनोबल बढ़ाओ' के आदेश ने दफ्तर को खेल का मैदान बना दिया

एक प्रिंटिंग कंपनी में टीम के सदस्यों ने रचनात्मक कागज़ के हवाई जहाज़ प्रतियोगिता के जरिए मनोबल बढ़ाया।
इस जीवंत एनीमे दृश्य में, कर्मचारी अपनी व्यस्त दिनचर्या से ब्रेक लेकर एक उत्साही कागज़ के हवाई जहाज़ प्रतियोगिता में अपनी रचनात्मकता को उजागर कर रहे हैं, जो कार्यस्थल में मनोबल के महत्व को दर्शाता है।

दफ्तर में काम का बोझ और ऊपर से बॉस का 'मनोबल बढ़ाओ' जैसा आदेश – सोचिए, क्या हाल होता होगा? भारत के दफ्तरों में तो अक्सर ऐसा होता है कि जब काम बढ़ जाता है, तो बॉस कहते हैं, "कुछ भी करो, बस टीम खुश रहनी चाहिए!" लेकिन कभी-कभी ये आदेश खुद आफत बन जाता है। आज हम आपको एक ऐसी ही मजेदार कहानी सुना रहे हैं, जिसमें एक मैनेजर ने बॉस के आदेश का ऐसा जवाब दिया कि दफ्तर ही मिनी-पार्टी बन गया।

आदेश था – जो करना है करो, बस मनोबल बढ़ना चाहिए!

कहानी एक बड़े कमर्शियल प्रिंटिंग कंपनी की है, जहाँ महीनों से लगातार 12 घंटे, सातों दिन ओवरटाइम चल रहा था। ऐसे में, काम का माहौल तो समझिए कैसा होगा—हर कोई थका-मांदा, उकताया हुआ। एक दिन कंपनी के COO (मुख्य परिचालन अधिकारी) ने मैनेजर को आदेश दिया, "मुझे फर्क नहीं पड़ता तुम क्या करते हो, बस टीम का मनोबल बढ़ाओ।" ये आदेश किसी बॉलीवुड फिल्म के क्लाइमेक्स जैसा था—सीधा, लेकिन अस्पष्ट!

भारत के दफ्तरों में भी अक्सर ऐसा होता है कि बॉस कहते हैं, “कुछ कर लो, बस टीम खुश रहे।” लेकिन ये नहीं बताते कि कैसे! अब, जिस मैनेजर ने ये सुना, उसने दिमाग लगाया—अगर बॉस को तरीका नहीं पता, तो क्यों न अपना तरीका आज़माया जाए?

जब दफ्तर बना उड़ानों का अड्डा

एक दिन जब प्रिंटिंग का काम थोड़ा ठंडा पड़ा, मैनेजर ने पूरी प्रोडक्शन बिल्डिंग की मशीनें बंद करवा दीं। सब कर्मचारी हैरान कि अब क्या होने वाला है! लेकिन हुक्म आया—"दफ्तर में जो भी कागज मिले, उससे सबसे अच्छा कागज़ी हवाई जहाज बनाओ।" फिर मैनेजर दुकान के किनारे खड़े होकर जज बने और सबके जहाज उड़वाए। जिसका जहाज सबसे दूर गया, उसे उसी दिन की छुट्टी भी मिल गई—पूरी तनख्वाह के साथ!

सोचिए, भारतीय दफ्तर में कोई बॉस ऐसा करे, तो लोग कहेंगे – “अरे वाह, मजा ही आ गया!” कमेंट्स में भी एक यूज़र ने लिखा, “ये तो जैसे अचानक क्रिसमस पार्टी हो गई हो।” और ये सच है—छोटे-छोटे मज़े कभी-कभी बड़ी खुशियाँ दे देते हैं। एक और पाठक ने अपनी कंपनी का किस्सा सुनाया, “हमारे यहाँ भी कभी-कभी कागज़ी जहाज उड़ाने की प्रतियोगिता होती थी, पूरे गलियारे में धूम मच जाती थी।”

जब कोल्ड ड्रिंक और मिंटो ने किया धमाका

कुछ महीने बाद, उसी मैनेजर को इंटरनेट से पता चला कि डाइट पेप्सी और मिंटो (Mentos) मिलाकर जबरदस्त फव्वारा बनता है। अब क्या था, आधे घंटे के लिए सबको पार्किंग में बुलाया गया—और शुरू हो गया पेप्सी-मिंटो का धमाका! सबने मिलकर मस्ती की, और ये सब दफ्तर के समय में हुआ, यानी पैसे काटे भी नहीं गए।

एक यूज़र ने कमेंट किया, “भैया, दो लीटर पेप्सी और एक पैकेट मिंटो में कंपनी का कितना नुकसान हो गया होगा?” वहीं एक दूसरे ने कहा, “अगर कर्मचारी खुश नहीं रहेंगे, तो कंपनी को असली घाटा होगा—लोग छोड़-छाड़ के चले जाएंगे।” ये बात हमारे यहाँ भी कितनी सच है—खुश कर्मचारी ही असली प्रगति की चाबी हैं।

बॉस की नाराज़गी और कर्मचारियों की जीत

कुछ समय बाद, मैनेजर ने COO से अपनी इन ‘मनोबल बढ़ाने वाली’ तरकीबों का जिक्र किया। COO बोले, “तुमने क्या किया? अब से कोई भी ऐसी स्कीम जिसमें पैसे खर्च हों, पहले मुझसे पूछनी होगी।” अब मैनेजर ने सोचा, “ठीक है भाई, अब आपकी मर्जी!” यानी अब कोई भी छोटा-मोटा खर्च वाला आइडिया बिना मंजूरी के लागू नहीं होगा।

कई पाठकों ने इस पर मजेदार टिप्पणियाँ कीं। एक ने लिखा, “मालिकों को लगता है कि बिना पैसे लगाए मनोबल बढ़ सकता है। शायद उन्हें लगता है कि एक ईमेल भेज दो, या 100 रुपये का गिफ्ट कार्ड दे दो, बस काम हो गया।” एक और ने चुटकी ली, “मेजर साहब, हवाई जहाज उड़ाने के लिए A0 साइज का पेपर ले आओ!” भारतीय संदर्भ में सोचें तो, जैसे कोई कहे – "चाय की पार्टी करो, लेकिन दूध-चीनी का खर्चा मत करना!"

हमारी अपनी दफ्तर संस्कृति और मनोबल

भारत में भी अक्सर देखा जाता है कि बॉस या मैनेजमेंट कर्मचारियों को ‘मनोबल’ बढ़ाने के नाम पर सिर्फ भाषण या मेल भेज देते हैं। लेकिन असल खुशी छोटे-छोटे पलों में, टीम-बिल्डिंग में, और कभी-कभी हल्की-फुल्की मस्ती में छुपी होती है। कई भारतीय कंपनियों में आज भी कभी-कभी ऑफिस पार्टी, सामूहिक भोज (पोटलक), या खेल-कूद जैसी चीज़ें मनोबल को बढ़ा देती हैं।

एक पाठक ने सही कहा, “मनोबल में निवेश करो, फायदा खुद-ब-खुद दिखेगा।” और यही सच्चाई है—खुश कर्मचारी ही कंपनी को ऊँचाइयों तक ले जा सकते हैं।

निष्कर्ष: मनोबल का असली फॉर्मूला

तो अगली बार जब आपके ऑफिस में बॉस कहें, “मनोबल बढ़ाओ!” तो याद रखिए—मज़ा, टीम भावना, और थोड़ी मस्ती से बड़ा कोई मंत्र नहीं। और हाँ, अगर कभी मौका मिले, तो कागज़ी हवाई जहाज उड़ाने से मत चूकिए—शायद आपकी उड़ान सबसे दूर जाए!

आपके ऑफिस में मनोबल बढ़ाने के लिए क्या मज़ेदार तरीके अपनाए जाते हैं? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए!


मूल रेडिट पोस्ट: 'I don't care what you have to do to improve morale, just do it.'