जब मैनेजर की सख्ती ने बनवाया दुकान का ‘झकास’ फर्श – और सबक भी मिला!
हम भारतीयों के लिए दुकान बंद होने का समय बस एक सलाह है—जब तक सामान मिलता है, हम खरीदते रहते हैं! अब सोचिए, अगर कोई कर्मचारी समय से पहले सफाई शुरू कर दे और मैनेजर को यह नागवार गुज़रे, तो क्या हो? आज की कहानी है एक छोटे किराना स्टोर के कर्मचारी की, जिसने मैनेजर की ‘ठीक 10 बजे’ वाली सख्ती को ऐसा सबक सिखाया कि दुकान के नियम ही बदल गए!
‘ठीक समय’ की सख्ती और कर्मचारी की ‘साफ सफाई’ चाल
इस कहानी का नायक है एक किराना स्टोर में रात की शिफ्ट में काम करने वाला लड़का। रोज़ाना की तरह वह 9:50 बजे से फर्श साफ करना शुरू कर देता, ताकि 10 बजे दुकान बंद होते ही सब जल्दी घर जा सकें। लेकिन एक दिन नई मैनेजर ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया—“जब तक 10 नहीं बजते, कोई सफाई नहीं! ग्राहक को पूरा सम्मान मिलना चाहिए।”
अब भारतीय दफ्तरों में तो अकसर ऐसे बॉस मिल ही जाते हैं, जो नियमों को इतना सीरियस ले लेते हैं, जैसे कि वो संविधान में दर्ज हों! कर्मचारी बेचारा भी सोचता है, ‘जो हुक्म साहब!’
ग्राहक आए, गड़बड़ हुई – और मस्ती भी!
उस दिन किस्मत ने भी खूब साथ दिया। ठीक 10 बजे से पहले, दुकान में ग्राहकों की भीड़ आ गई। अब नायक ने भी सोचा, ‘जो हुक्म हुआ है, वो ही करूँगा!’ उसने 10 बजते ही झाड़ू-पोंछा शुरू कर दिया, चाहे लोग फल ले रहे हों, दाल-चावल उठा रहे हों या आइसक्रीम देख रहे हों। हर बार कोई ग्राहक घूरता, तो वह हँसकर कह देता, “माफ़ कीजिए, अब मुझे शुरू करना ही पड़ेगा!”
भैया, जैसे भारत में शादी के बाद बारातियों को बिना खाना खिलाए कोई नहीं भगाता, वैसे ही वहाँ ग्राहक बिना पोंछा खाए नहीं निकले!
फर्श पर फिसली ग्राहक, मच गया बवाल!
जैसे ही पोंछा लगा, एक आंटी जी फिसल गईं और सीधा मैनेजर पर बरस पड़ीं—“ये क्या बेवकूफी है? गीले फर्श पर सफाई? जान जोखिम में डाल दी!” अब मैनेजर बेचारा भी हक्का-बक्का। आखिरकार, कर्मचारी पर इल्ज़ाम डाल दिया, “इन्हीं ने समय से पहले शुरू कर दिया!”
लेकिन असली ट्विस्ट तो अभी बाकी था। कर्मचारी ने सीसीटीवी कैमरे की रिकॉर्डिंग निकाल ली, जिसमें मैनेजर साफ कह रही थी—“साफ-सफाई 10 बजे के बाद ही!” अब ऑफिस की राजनीति हो या मोहल्ले की पंचायत, सबूत के बिना कोई काम नहीं चलता!
कम्युनिटी की राय: तड़ी, ठहाके और शक की बौछार
रेडिट पर लोगों ने इस कहानी पर खूब मज़ा लिया। एक कमेंट में (u/WonderWheeler) किसी ने बिलकुल देसी अंदाज़ में कहा, “समय से पहले सफाई करने का फायदा ये है कि जब ग्राहक कम होते हैं, तब खाली जगह में आसानी से काम हो जाता है, सब सुरक्षित रहते हैं—और ओवरटाइम भी नहीं बढ़ता!”
वहीं कुछ लोग (u/SenorTron, u/No-Friendship-1498) को इस बात पर हँसी आई कि कर्मचारी को सीसीटीवी तक पहुंच कैसे मिल गई। हमारे यहाँ भी चायवाले से लेकर चौकीदार तक सबको सबकी खबर रहती है, पर कैमरा देखने को तो मैनेजर ही मिलता है!
कुछ व्यंग्यपूर्ण टिप्पणियाँ भी आईं—एक भाई साहब (u/SoonerRed) ने कह दिया, “ऐसा तो कभी होता ही नहीं!” और एक और (u/barnabyjones1990) बोले, “जो नहीं हुआ, उसमें ये सबसे सुंदर कहानी है!”
आखिरकार, कौन जीता – मैनेजर या कर्मचारी?
जब मामला बड़े साहब (कॉरपोरेट) तक पहुँचा, तो उन्होंने रिकॉर्डिंग देखी और कर्मचारी का पक्ष लिया। मैनेजर को अपनी गलती माननी पड़ी और दुकान के नियम फिर से बदल गए—अब सफाई 9:45 से शुरू होती है, जैसे पहले होती थी।
कहते हैं ना, ‘ऊँट पहाड़ के नीचे’—जब नियम ही उल्टा हो, तो कभी-कभी उसका उल्टा असर भी पड़ता है!
आपके ऑफिस में भी ऐसे मस्त किस्से होते हैं?
दोस्तों, आपके ऑफिस या दुकान में भी कभी किसी बॉस ने नियमों को लेकर जिद की है? या आपने कभी ऐसा ‘जलेबी जैसा’ जवाब दिया हो? नीचे कमेंट करके जरूर बताइए!
क्या आपको लगता है कि नियमों में लचीलापन होना चाहिए, या फिर सबको अक्षरश: पालन करना चाहिए? और हाँ, अगली बार जब कोई मैनेजर कुछ अजीब निर्देश दे, तो सीसीटीवी का ख्याल जरूर रखना—क्योंकि कभी भी कहानी पलट सकती है!
खास टिप: ऑफिस की राजनीति में कभी-कभी सीधा सच बोलना भी बड़ी जीत दिला सकता है—बस सही समय और सबूत चाहिए!
मूल रेडिट पोस्ट: Manager said to mop exactly at 10PM. So I did.