जब मैनेजर की ज़िद ने हज़ारों का नुक़सान करवा दिया: स्मूदी वाली कहानी
बचपन में आपने वो कहावत तो सुनी ही होगी – “अति का भला न बोलना, अति की भली न चुप। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।” लेकिन लगता है, हमारे आज की कहानी वाले मैनेजर साहब ने ये कहावत कभी सुनी ही नहीं थी। जनाब ने अपनी जिद के चक्कर में कंपनी को लाखों का चूना लगवा दिया और खुद पिचकारी बनकर बाहर हो गए!
बुफे में स्मूदी का झमेला: मैनेजर की कड़क पॉलिसी
अब ज़रा सोचिए, आप किसी अच्छे बुफे में काम कर रहे हैं, जहाँ दो टीम होती हैं – एक तैयारी करने वाली (preparation group) और दूसरी मिलाने वाली (mixing group)। तैयारी वाली टीम फल-सब्ज़ी काटती-तौलती है, मिलाने वाली टीम स्मूदी बनाती, ग्राहकों को परोसती है। जब मिक्सर में थोड़ा सा एक्स्ट्रा स्मूदी बच जाता, तो वो हमें पीने को मिल जाता – मज़ा आ जाता भाई! लेकिन ये सुख ज़्यादा दिन नहीं चला।
एक दिन मैनेजर साहब को पता चला कि कर्मचारी काम के बीच स्मूदी पी रहे हैं। बस फिर क्या था, उनकी भौंहें तन गईं, तमतमाकर बोले – “कोई एक्स्ट्रा बचा तो सब सिंक (बर्तन धोने वाला नल) में बहा दो, चाहे जितना भी हो!” अब ज़रा सोचिए, पानी पीना चलता है लेकिन स्मूदी पीना गुनाह? वाह मैनेजर जी, क्या तर्क है!
कर्मचारियों की ‘मालिशियस कंप्लायंस’: जब आज्ञा उल्टी पड़ गई
अब यहाँ आया असली ट्विस्ट! मिलाने वाली टीम ने चुपचाप कॉन्ट्रैक्ट पढ़ा और देखा कि मिक्सिंग की पॉलिसी बहुत सख्त है – अगर अनुपात ठीक न हो, तो प्रोडक्ट बेचना मना है। बस, टीम ने चालाकी से मिक्सर में ऊपर-ऊपर फल डालने शुरू कर दिए ताकि आधा मिक्सर अनुपात बिगड़ जाए। अब हर बार दो-तीन गिलास बनते, बाकी सारा महंगा फल – एवोकाडो, खजूर, अंजीर – सीधा सिंक में!
यहाँ एक Reddit यूज़र ने लिखा – “ऐसा तो तभी मुमकिन है जब जानबूझकर अनुपात बिगाड़ा जाए।” सही पकड़े हैं! कर्मचारियों ने आदेश का ऐसा पालन किया कि कंपनी की जेब हल्की हो गई।
ऊपर से आया तूफ़ान: कंपनी का लाखों का नुकसान
ये तमाशा महीनों चलता रहा। जब कंपनी ने अकाउंट मिलाया तो देखा – जितना फल खरीदा, उतनी बिक्री आधी भी नहीं! ऊपरी मैनेजमेंट गुस्से में दुकान पर टूट पड़ा। पूछताछ हुई तो तैयारी टीम ने सीधा बोल दिया – “मैनेजर ने कहा था, सब बहा दो!” अब मैनेजर साहब की बोलती बंद। Reddit पर एक कमेंट था – “ऐसे बॉस का अता-पता भी बदल गया होगा!” सही कहा, क्योंकि अब वो मैनेजर वहाँ नहीं दिखता।
यहाँ एक और कमेंटर ने तंज कसा – “इतना नुकसान तो अपने यहाँ शादी-ब्याह में भी नहीं होता!” और सच्ची बात है, भारत में शादी के बचे खाने को कम से कम गरीबों में बाँट देते हैं, यहाँ तो सीधा नाली में!
भाषा की गड़बड़ और भारतीय संदर्भ
मज़ेदार बात ये रही कि इस पूरी पोस्ट में ‘cocktail’ शब्द का इस्तेमाल हुआ, जिससे सबको लगा शराब पी जा रही है! खुद OP (जिसने कहानी लिखी) भी कन्फ्यूज था – उसने अंग्रेज़ी में लिखा, “मैं तो समझता था cocktail और smoothie एक ही चीज़ है!” कई लोगों ने पूछा – “भाई, शराब पी रहे थे या फल का रस?” तो उसने जवाब दिया – “हमारे देश में तो ‘cocktail’ यानि कोई भी मिक्स ड्रिंक।”
भारत में भी कई बार भाषा की ऐसी गड़बड़ियाँ हो जाती हैं – जैसे कई लोग ‘मॉकटेल’ और ‘कॉकटेल’ में फर्क नहीं कर पाते। यहाँ तक कि कई रेस्तराँ में वेटर खुद पूछ बैठते हैं – “सर, कॉकटेल में शराब वाला चाहिए या बिना शराब का?”
कहानी से सीख: कर्मचारियों को तंग मत करो!
आखिर में, इस कहानी से यही सबक मिलता है – अगर आप अपने कर्मचारियों पर जरूरत से ज़्यादा सख्ती करेंगे, तो वो भी अपने तरीके निकाल लेंगे। Reddit पर किसी ने बड़ा अच्छा कमेंट किया – “मतलब, कर्मचारियों से पंगा मत लो, वरना तुम्हारी कंपनी ही बह जाएगी सिंक में!”
भारतीय संदर्भ में भी यही कहा जाता है – “रिश्ते में मिठास रखो, काम में ईमानदारी खुद आ जाएगी।” बुफे की इस कहानी में एक छोटी सी जिद ने लाखों का नुकसान करवा दिया, और मैनेजर साहब को नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा।
निष्कर्ष: क्या आपके यहाँ भी ऐसा कुछ हुआ है?
इस पूरी दास्तान को पढ़कर हँसी भी आती है और थोड़ी हैरानी भी होती है। क्या आपके ऑफिस में कभी किसी बॉस ने ऐसी अजीब पॉलिसी लागू की है? या आपने कभी किसी मज़ेदार तरीके से बॉस को सबक सिखाया हो? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए। और हाँ, अगली बार जब बुफे में जाओ, तो स्मूदी पीते वक़्त ज़रा मैनेजर की शक्ल ज़रूर याद कर लेना!
मूल रेडिट पोस्ट: 'Dump all the leftovers'? Fine. Here are 10,000$ in losses.