जब मैक्डोनाल्ड्स में मोबाइल की तेज़ आवाज़ से भिड़ा एक बुज़ुर्ग, Petty Revenge का देसी तड़का!
कभी-कभी लगता है कि आजकल की दुनिया में शांति जैसी कोई चीज़ बची ही नहीं। आप सोचिए, सुबह-सुबह मैक्डोनाल्ड्स में अपना एग मैकमफिन और Diet Coke लेकर बैठिए और मन में हो कि ज़रा चैन से नाश्ता करेंगे, मनपसंद किताब पढ़ेंगे या मोबाइल पर Reddit ब्राउज़ करेंगे। लेकिन तभी कोई आता है, बगल वाली सीट पर बैठता है, और पूरे जोश के साथ मोबाइल पर टीवी शो चला देता है – वो भी फुल वॉल्यूम पर! मन करता है कि पूछें – भाईसाहब, ईयरफोन के पैसे नहीं हैं क्या?
शांति के दुश्मनों के साथ शांति से बदला
ऐसा ही कुछ हुआ Reddit यूज़र u/ExternalNote1354 के साथ। जनाब मैक्डोनाल्ड्स में बैठकर अपने सेब के टुकड़े खा रहे थे कि सामने वाली बूथ में एक महिला आकर मोबाइल पर सीरियल देखने लगी – पूरे रेस्टोरेंट में आवाज़ गूंजने लगी। अब जनाब की सहनशीलता जवाब दे गई। उन्होंने अपने फोन पर Pandora Radio खोला और Brian Setzer Orchestra का ‘49 Mercury Blues’ गाना फुल वॉल्यूम पर बजा दिया। नतीजा? महिला तुरंत अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर वहाँ से निकल ली!
बुज़ुर्ग जनाब का कहना है, "अब हर बार जब कोई ऐसी हरकत करेगा, मैं भी यही करूंगा। बुज़ुर्ग होने के अपने फायदे होते हैं – अब मुझे किसी की परवाह नहीं है।"
"शर्म तो जैसे रह ही नहीं गई" – कमेंट्स की दुनिया से
इस पोस्ट पर Reddit की दुनिया में कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक यूज़र ने लिखा, "अगर कोई गाना बजाता है जो मुझे पता है तो मैं ज़ोर-ज़ोर से गाने लगता हूँ। अगर बोल नहीं आते तो बना लेता हूँ।" सोचिए, अगर हमारे देश में ऐसे लोगों से भिड़ना पड़े तो कितनी मस्त जुगलबंदी हो सकती है – कोई ‘लैला मैं लैला’ बजाए, तो अगला ‘लैला’ बनकर नाचने लगे!
एक और मज़ेदार कमेंट था – "अगर कोई स्पीकर पर फोन पर बात करता है, तो मैं ज़ोर से बीच में बोल पड़ता हूँ – ‘क्या कहा, उसको क्रैम्प्स हैं? भाई, मिडॉल ले लो!’ फिर देखना, खुद ही स्पीकर बंद कर देता है।” ये तो हमारी देसी ट्रेन-बस की याद दिला देता है, जब कोई ज़ोर-ज़ोर से बात करता है और आस-पास वाले मुँह छुपाकर हँसते हैं।
कुछ लोगों ने बताया कि वो ऐसे लोगों के पास जाकर अपने फोन से 'death metal' या 'polka' जैसी अजीब-अजीब धुनें बजा देते हैं। किसी ने तो 'Cotton Eye Joe' और 'Baby Shark' जैसे बच्चों के गाने बजाकर सामने वाले को भगाया! एक यूज़र ने लिखा, "अगर सब लोग फोन की आवाज़ तेज़ करेंगे तो सबका दिमाग खराब हो जाएगा।" सही बात है – सोचिए, अगर हर कोई अपनी पसंद का गाना या वीडियो फुल वॉल्यूम पर बजाए, तो रेस्टोरेंट रेस्टोरेंट कम, शादी का बैंड ज़्यादा लगेगा!
"बुज़ुर्ग होना मतलब – अब किसी की परवाह नहीं"
खास बात यह है कि इस तरह की छोटी-छोटी बदला लेने की हरकतें अक्सर वो लोग करते हैं जिन्हें अब समाज के झंझटों की कोई परवाह नहीं। एक बुज़ुर्ग महिला ने कमेंट किया – "मैं 73 साल की हूँ, लाइन में खड़ी थी और जब मेरा पसंदीदा गाना बजा तो धीरे-धीरे गाने लगी। सबने मुझे देखा, लेकिन अब मुझे फर्क ही नहीं पड़ता।"
हमारे यहाँ भी कई बार दादी-नानी लोग बच्चों के सामने पुराने गाने गाकर सबको हँसा देती हैं, और बच्चों को खुद ही शर्म आ जाती है कि ‘ये मम्मी-पापा कितने क्रिंज हैं!’ लेकिन असली जीत तो वही है – जब आप जैसे हैं वैसे रहकर दूसरों को आईना दिखा दें।
क्या करें जब पब्लिक प्लेस में कोई तेज़ आवाज़ में मोबाइल चलाए?
अब सवाल उठता है कि ऐसे हालात में क्या किया जाए? Reddit के कई यूज़र्स ने सुझाव दिए –
- "शांत और विनम्रता से कहिए – भैया, क्या आप आवाज़ कम कर सकते हैं?"
- "अगर सामने वाला न माने, तो अपना खुद का अजीबो-गरीब संगीत चला दीजिए।"
- "कभी-कभी तो बस ‘शर्मो-हया’ का तीर चलाना पड़ता है – ज़ोर से पूछ लीजिए, ‘भाईसाहब, ईयरफोन चाहिए क्या?’"
हमारे देश में भी आजकल मेट्रो, बस, ट्रेन या कैफे में ऐसे लोग आम मिल जाते हैं। कई बार तो लोग अपने रिश्तेदारों की बातें भी सारे compartment को सुनाते हैं! ऐसे में कभी-कभी हल्के-फुल्के मज़ाक या सोशल प्रेशर से भी काम बन जाता है – विनम्रता से टोके, तो सामने वाला खुद ही शर्मिंदा हो जाता है।
निष्कर्ष: शांति पसंद है, तो आवाज़ उठाइए!
आखिर में यही कहूँगा – अगर आपको भी ऐसे शोरगुल करने वाले ‘शोरवीरों’ से दो-चार होना पड़े, तो घबराइए मत। चाहे हल्के मज़ाक से, चाहे अपने अंदाज़ में – कभी-कभी छोटा सा Petty Revenge भी बड़े काम का होता है। और हाँ, अगर आप खुद भी कभी गलती से पब्लिक प्लेस में फुल वॉल्यूम पर कुछ बजा बैठें, तो अगली बार ईयरफोन साथ रखना मत भूलिएगा!
क्या आपके साथ भी ऐसा कोई किस्सा हुआ है? आप ऐसे हालात में क्या करते हैं? अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें – हो सकता है आपकी कहानी भी किसी के चेहरे पर मुस्कान ला दे!
मूल रेडिट पोस्ट: Stop With The Noise