विषय पर बढ़ें

जब भीड़भाड़ वाली लोकल ट्रेन में एक वेपर को मिली खांसी की 'मिठास'!

भीड़भाड़ वाले ट्रैन में एक व्यक्ति वेप कर रहा है, यात्रियों की असुविधा को दर्शाता है।
इस जीवंत एनीमे-शैली के दृश्य में, भरे हुए यात्री ट्रैन की तनावपूर्ण स्थिति स्पष्ट है, जब एक साथी यात्री वेप निकालता है, साझा स्थानों की चुनौतियों को उजागर करता है।

वर्किंग लोगों के लिए शाम की लोकल ट्रेन किसी युद्धभूमि से कम नहीं होती। ऑफिस का थकान, भीड़ का दबाव, और ऊपर से अगर पास में कोई बिना पूछे 'फ्रूटी' खुशबू वाली वेप फूंक दे... तो सोचिए क्या हाल होगा! आज की कहानी है ऐसे ही एक यात्री की, जिसने नियम तोड़ने वाले वेपर को ऐसा सबक सिखाया कि इंटरनेट पर लोग हंस-हंसकर लोटपोट हो गए।

ट्रेन की भीड़, वेप की खुशबू और... खांसी का वार!

तो जनाब, किस्सा कुछ यूं है—लंदन के एक सज्जन ऑफिस से थके-हारे घर लौट रहे थे। ट्रेन खचाखच भरी थी, जैसे भारत की लोकल में 'पैर रखने की भी जगह नहीं' वाली हालत। इतने में उनके सामने खड़ा एक नौजवान बड़ी चालाकी से जेब से वेप निकाले, एक कश लिया और झट से छुपा भी लिया। सोचा होगा कोई देखेगा नहीं। लेकिन हमारे नायक तो बिलकुल सामने खड़े थे, बस छह इंच की दूरी पर!

जैसे ही वेपर ने सांस छोड़ी, हवा में 'स्ट्रॉबेरी' जैसी तेज गंध फैल गई—वैसी ही जैसे हमारे यहां शादी-ब्याह में 'रूम फ्रेशनर' छिड़क देते हैं, बस उससे भी ज्यादा केमिकल वाली। और बस, यही गंध हमारे नायक के गले में फंस गई और उन्हें जोर की खांसी आ गई। अब आमतौर पर तो वे मुँह ढक लेते, लेकिन इस बार उन्होंने दोनों हाथों से खुद को 'संतुलित' रखा और सीधे वेपर के चेहरे पर खांस दिए—वो भी बार-बार।

इंटरनेट पर मचा बवाल: 'ये तो असली बदला है!'

इस घटना ने Reddit के r/PettyRevenge पर धमाल मचा दिया। जैसे हमारे यहां चाय की दुकान पर लोग बहस करते हैं, वैसे ही वहां भी लोगों ने मजेदार कमेंट्स की झड़ी लगा दी।

एक ने लिखा, "भाई, ये तो 'पैसिव एग्रेसिव' का शिखर है!" एक और बोले, "भई, इसमें तो कोई पैसिव-वैसिव नहीं, ये तो डाइरेक्ट अटैक था।" कोई बोला, "इसका असर तो हुआ, अब वो दोबारा वेप नहीं करेगा।" खुद कहानी के लेखक ने बताया, "उसने दोबारा वेप नहीं किया, और मैं अगले स्टेशन पर उतर गया।"

एक वेपिंग करने वाली युवती ने तो यहां तक कह दिया, "अगर मैं कभी ऐसी जगह वेप करूं, तो कोई मुझे थप्पड़ ही मार दे!" एक और ने लिखा, "मैं जब भी पब्लिक में वेप करता हूं, कम से कम 10 फीट दूर रहता हूं, क्योंकि ये मेरी च्वाइस है, दूसरों की नहीं।"

क्या सबक मिला वेपर को? और बाकी यात्रियों का क्या?

कुछ लोगों ने चिंता जताई कि भाई, खांसने से बाकी यात्रियों पर भी असर पड़ा होगा! एक साहब बोले, "तुम्हारी खांसी सिर्फ वेपर तक सीमित नहीं रही होगी, बाकी लोग भी इसकी चपेट में आए होंगे।" किसी ने मजाक में कहा, "अगर मिर्ची का पाउडर होता तो और मजा आता!"

लेकिन ज्यादा लोगों ने वेपर की ही क्लास ली—"भाई, अगर तुम बीस मिनट बिना वेप के नहीं रह सकते, तो तुम्हें सही में मदद की जरूरत है!" एक अनुभवी बोले, "मैं खुद सिगरेट से वेप पर आया हूं, लेकिन पब्लिक प्लेस में करना सही नहीं।"

किसी ने भारतीय नजरिए से लिखा होता तो शायद कहता, "भाई, जैसे बस में कोई पान थूक दे, वैसे ही ये वेपिंग भी दूसरों की नाक में दम कर देती है!"

नियम तोड़ने वालों को जवाब मिलना जरूरी है

हमारे यहां तो ऐसे मामलों में लोग आमतौर पर 'चलो जाने दो' सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं, या फिर सीटी बजाने वाले टिकट चेकर से शिकायत कर लेते हैं। लेकिन जब कोई खुद ही 'सीधा जवाब' देता है, तो वो सच में काबिल-ए-तारीफ है।

एक कॉमेंट में किसी ने मजाक में लिखा, "भाई, जब कोई केमिकल वाला फल-सलाद आपके मुंह के सामने फूंके, तो खांसी आना तो बनता है। अगली बार सीधे आंखों पर निशाना लगाइए!"

निष्कर्ष: ट्रेन, नियम और 'जिम्मेदार नागरिक'

तो साथियों, इस कहानी से दो बातें साफ निकलकर आती हैं—पहली, पब्लिक प्लेस में अपने शौक दूसरों पर न थोपें, चाहे वो वेप हो, परफ्यूम हो या पान-मसाला। और दूसरी, अगर कोई नियम तोड़े, तो उसे सभ्य तरीके से सबक सिखाना भी जरूरी है। खांसी का जवाब वेप से देना भले ही थोड़ा 'पेटी' (छोटा-मोटा) बदला लगे, लेकिन कभी-कभी ऐसे छोटे कदम ही बड़ी समझदारी का संकेत होते हैं।

अब आप बताइए, अगर आपके साथ ऐसा हो तो आप क्या करते? क्या आप भी खांसकर जवाब देते, या कोई और तरीका अपनाते? कमेंट में जरूर लिखिए—शायद अगली बार किसी को ट्रेन में आपसे ही सीख मिले!


मूल रेडिट पोस्ट: Coughed on a vaper