जब बॉस ने हर लेनदेन की फोटो मांगी... और फिर पछताए!
ऑफिस की दुनिया भी बड़ी निराली है। कभी बॉस कहता है "तुम्हें खुद ही सब सीखना है", तो कभी अचानक हर छोटी-बड़ी चीज़ पर सवाल दागने लगता है। लेकिन जब कर्मचारी भी जवाब देने के अपने ही अंदाज़ में उतर आए, तो नज़ारा देखने लायक होता है!
आज की कहानी एक ऐसे मैनेजर की है, जिसने अपने बॉस को उसकी ही बनाई हुई जाल में फंसा दिया। तो चलिए, जानते हैं ये दिलचस्प दास्तान, जिसमें 'मालिशियस कंप्लायंस' का तड़का है—यानी नियमों का पालन भी, और बॉस को मज़ा भी चखाना!
शुरुआत: जब काम सीखना पड़ा था बिना सहारे के
हमारे नायक (Reddit यूज़र u/No_Bait) एक मल्टी-लोकेशन स्टोर के मैनेजर थे। जब उन्होंने नई नौकरी पकड़ी, तो उम्मीद यही थी कि खुद ही सब सीखें—न कोई ट्रेनिंग, न कोई गाइड। अब हिंदुस्तान में भी ऐसे कई ऑफिस हैं जहाँ 'सीनियर' लोग बस कहते हैं, "खुद सीख लो, हमने भी ऐसे ही किया था।" ऐसे में भाई साहब ने भी रात-दिन एक कर के हर काम में महारत हासिल कर ली।
बॉस का कंट्रोल: "हर लेनदेन की फोटो भेजो!"
जब बॉस ने देखा कि कर्मचारी अपना काम बखूबी कर रहा है, तो उस पर शक करने लगे। "ये इनवॉइस ऐसे क्यों?", "ये रकम कम क्यों?"—हर बात पर सवाल! और फिर तो हद ही हो गई, जब बॉस ने कहा, "अब से जितने भी ट्रांजैक्शन हो, उनकी फोटो मुझे भेजो।" सोचिए, हर नगद लेनदेन, हर बिल, हर जमा-निकासी की फोटो!
अब हमारे मैनेजर साहब भी कम नहीं निकले। उन्होंने सोचा, "ठीक है, जैसा आदेश वैसा पालन!" फिर क्या था—हर छोटी-बड़ी ट्रांजैक्शन की फोटो, बिल की फोटो, सेल्स की फोटो... बॉस के फोन पर बाढ़ आ गई।
मालिशियस कंप्लायंस: बॉस की मोबाइल गैलरी बनी 'लेनदेन मेला'!
कुछ ही महीनों में बॉस का फोन इतना भर गया कि वो हैंग होने लगा। फोटो डिलीट करने में घंटों लगने लगे। एक कमेंटकर्ता ने हँसी में लिखा—"शायद बॉस ने पहली बार ये सारी फोटोज़ तभी देखी होंगी, जब फोन धीमा पड़ने लगा।" और एक और ने मज़ेदार अंदाज में कहा—"कभी-कभी तो लगता है बॉस फोटो मांगते हैं, बस दिखाने के लिए कि वो मॉनिटर कर रहे हैं, असल में तो देखते तक नहीं!"
ये बात तो भारतीय दफ्तरों में भी आम है—कई बार बॉस या सीनियर सिर्फ इसलिए रिपोर्ट्स, फाइलें या अपडेट्स मांगते हैं ताकि लगे कि वे सब कंट्रोल में रख रहे हैं। एक यूज़र ने लिखा—"मेरे बॉस 2 साल से एक्सेल शीट्स बनवा रहे थे, पर कभी देखी ही नहीं।" जरा सोचिए, कितना वक्त और मेहनत बर्बाद!
कर्मचारी की चालाकी: "आपने कहा था, मैंने भेज दिया!"
जब बॉस ने आखिरकार फोन घिसटते-घिसटते हार मान ली, तब उन्होंने फोन कर गिड़गिड़ाया—"अब और फोटो मत भेजो, मेरा फोन भर गया है!" यहाँ हमारे नायक ने वही किया जो अक्सर भारतीय कर्मचारी करते हैं—बॉस के आदेश का लिखित सबूत रखना! यानी, अगर ऊपर से कोई पूछे कि ये डेटा क्यों भेज रहे हो, तो सीधा जवाब—"बॉस ने कहा था।"
एक कमेंट में सलाह दी गई—"बॉस से ईमेल में लिखवाओ कि अब फोटोज़ भेजना बंद करो, ताकि कल को कोई ऊँगली उठाए तो सबूत रहे।" आजकल दफ्तरों में 'अपना बचाव' करना भी एक कला बन गई है!
ऑफिस की राजनीति और ह्यूमर
एक और यूज़र ने बड़ा प्यारा कमेंट किया—"बॉस को फोटो गैलरी चलानी थी या बिज़नेस?" सच पूछिए तो, कभी-कभी बॉस लोगों को लगता है कि फोटो या रिपोर्ट्स मांगते रहना ही असली काम है! कोई कह रहा था, "अगर बॉस को सच में फोटो चाहिए थीं, तो अगली बार HD क्वालिटी में भेजना चाहिए था, फोन अगले ही दिन बैठ जाता!"
वहीं, कुछ लोगों ने चेतावनी भी दी—"भैया, ऑफिस के कागज़ात की फोटो अपने फोन से भेजना, कहीं गड़बड़ में न फँस जाना।" इस पर हमारे नायक बोले—"ये फैमिली बिज़नेस है, धोखाधड़ी का सवाल ही नहीं। बस बॉस को अपनी चलानी थी!"
निष्कर्ष: सबक और हँसी दोनों
इस कहानी से एक बात जरूर सीखने को मिलती है—मालिशियस कंप्लायंस यानी बॉस के आदेश का पालन भी, और उन्हें उनकी ही चाल में उलझाना भी, एक बेहतरीन हथियार है। और सबसे बड़ी बात—कभी-कभी बॉस खुद ही अपनी चाल में फँस जाते हैं!
तो अगली बार जब आपका बॉस बेवजह नई-नई डिमांड करे, तो जरा ये किस्सा याद कर लीजिए। और हाँ, अगर आपके पास भी ऐसा कोई मज़ेदार ऑफिस किस्सा है, तो कमेंट में जरूर बताइए—शायद अगली बार उसी पर ब्लॉग लिख दिया जाए!
आपका क्या ख्याल है, क्या ऐसे बॉसों को सबक मिलना चाहिए? या फिर कर्मचारी को थोड़ा और चालाक होना चाहिए? अपने विचार कमेंट में साझा करें!
मूल रेडिट पोस्ट: Want pictures of all the transactions and deposits, you got it!