जब बॉस ने बाल छोटे करने को कहा, कर्मचारी ने बना ली चमचमाती चाँद!
ऑफिस की दुनिया भी अजीब है। यहाँ कभी-कभी छोटा सा आदेश भी ऐसी हलचल मचा देता है कि सब हैरान रह जाएँ। ऐसी ही एक मज़ेदार और चौंकाने वाली कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक कर्मचारी ने अपने मैनेजर के 'बाल छोटे करो' आदेश का ऐसा जवाब दिया कि पूरा दफ्तर सन्न रह गया।
आदेश का पालन या 'मालिशियस कम्प्लायंस'?
हुआ यूँ कि एक अनुभवी कर्मचारी, जो सालों से एक कंपनी में काम कर रहे थे, हमेशा अपने बाल सलीके से कटवाते थे। पुराने बॉस और यहाँ तक कि CEO को भी कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। लेकिन एक महीने पहले नया मैनेजर आया—जिसे शायद अपनी धाक जमानी थी—और उसने आदेश दे डाला, "बाल छोटे कराओ!"
अब यहाँ भारतीय दफ्तरों में ऐसे आदेश सुनना आम बात है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ यूनिफॉर्म या विशेष लुक की माँग होती है। पर इस बार कर्मचारी ने आदेश का पालन 'हद से ज़्यादा' कर डाला।
बाल छोटे? लो जी, पूरे ही गायब!
अब हमारे देश में बाल मुंडवाना (पूरी तरह सिर मुँडवाना) अक्सर दो मौकों पर होता है—या तो किसी परिवार में मृत्यु हो, या फिर कोई धार्मिक कामकाज हो। तो जब इस कर्मचारी ने अगली सुबह ऑफिस में सिर चमकाता हुआ प्रवेश किया, हर कोई दंग रह गया। सहकर्मी तो ऐसे दूर-दूर हट गए जैसे कोरोना फिर से आ गया हो!
एक कमेंट में किसी ने लिखा, "शायद सबको लगा घर में किसी का देहांत हुआ है, इसलिए सबने स्पेस देना शुरू कर दिया।"
दूसरे ने चुटकी ली, "अब तो बॉस कभी किसी को बाल काटने के लिए नहीं कहेगा!"
यहाँ तक कि CEO, जो रोज़-रोज़ बात किया करते थे, पिछले महीने से बात ही नहीं कर रहे! और तो और, अब रोज होने वाली मीटिंग्स में भी बुलावा नहीं आ रहा। एक पाठक ने मज़ाक में लिखा, "बॉस को तो ऐसा झटका लगा है, अब वो बालों का नाम भी नहीं लेगा!"
भारतीय समाज में बाल और उनकी अहमियत
विदेशी पाठकों के लिए यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है कि 'बाल मुंडवाना' इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया। कई कमेंट्स में पूछा गया कि 'आखिर इसमें क्या बड़ी बात है?' तो बता दें, भारत में सिर पूरी तरह मुंडवाने का सामाजिक और सांस्कृतिक अर्थ होता है। यह आम तौर पर शोक का प्रतीक माना जाता है।
एक पाठक ने लिखा—"अगर ऑफिस में कोई लड़का सिर मुंडवाकर आ जाए, तो लोग सोचते हैं किसी के घर में शोक हुआ है। ऐसे में सहानुभूति के साथ लोग थोड़ी दूरी भी बना लेते हैं।"
कुछ ने यह भी कहा, "अगर कोई महिला ऐसा करे तो वो तो 'रॉकस्टार' कहलाएगी!"
नौकरी की राजनीति और 'ओस्ट्रेसिज़्म'
अब ऑफिस की राजनीति भी कम मज़ेदार नहीं। कर्मचारी ने बॉस को जवाब तो दे दिया, लेकिन बाकी दफ्तर में उसका हाल 'अकेलेपन' जैसा हो गया। एक कमेंट में लिखा गया, "अब जब CEO भी बात नहीं कर रहे, तो शायद ऑफिस में भविष्य खतरे में है।"
दूसरे ने सलाह दी—"जब कंपनी के नियम इतने अजीब हों, तो नई नौकरी देखना ही अच्छा है!"
कुछ पाठकों ने मज़ाक में सलाह दी, "अब तो भाई, मूँछें और भौंहें भी साफ कर लो, पूरा पैकेज बन जाओ!"
एक और कमेंट—"अगर कोई मुझसे बाल काटने कहे तो मैं आधा इंच का कटवा लूँगी, लेकिन मुंडन नहीं कराऊँगी!"
क्या यह अंत सही था?
पूरा किस्सा पढ़कर लगता है, कर्मचारी ने 'मालिशियस कम्प्लायंस' का वो उदाहरण पेश किया जो हर बॉस को सावधान कर देगा। कभी-कभी नियमों का अंधा पालन खुद को ही मुसीबत में डाल सकता है।
एक पाठक ने कमाल की लाइन लिखी—"कभी-कभी दूसरों को सबक सिखाते-सिखाते, खुद को ही फँसा लेते हैं लोग!"
आपकी राय क्या है?
कहानी के आखिर में यही सवाल खड़ा होता है—क्या इतना कट्टर पालन करना सही था? या फिर ऑफिस में नियमों का पालन करते हुए भी थोड़ा व्यावहारिक रहना चाहिए?
अगर आप ऐसी स्थिति में होते तो क्या करते? क्या कभी आपने भी किसी बॉस को इसी तरह जवाब दिया है?
अपने विचार और अनुभव कमेंट में ज़रूर साझा करें।
काम की दुनिया में अक्सर छोटे-छोटे फैसले बड़ा असर छोड़ जाते हैं। तो अगली बार जब कोई कहे 'बाल छोटे कराओ', तो सोच समझकर ही जवाब दें!
मूल रेडिट पोस्ट: My manager told me cut my hair, so I became bald