जब बॉस ने टाइमशीट का काम थमा दिया और पेरोल में मच गया बवाल!
हमारे देश में ऑफिस के किस्से वैसे ही कम मजेदार नहीं होते, ऊपर से जब बॉस नया हो और काम का बंटवारा गड़बड़ हो जाए, तो कहानी में मसाला खुद-ब-खुद आ जाता है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है—जहाँ टाइमशीट का झोल और एक कर्मचारी की 'जबरदस्त आज्ञापालन' (malicious compliance) ने पूरे ऑफिस को हिला कर रख दिया।
सोचिए, आपके ऑफिस में मैनेजर चला जाए और उसकी जगह कोई नया साहब आ जाए, जो नियम-कायदे को ताक पर रखकर अपना बोझ दूसरों पर फेंक दे। ऐसे में क्या करेंगे आप?
टाइमशीट का झोल: "ये मेरा काम नहीं है!"
कहानी Reddit यूज़र u/Itsgoodtoshare की है, जिनके ऑफिस में पुराने मैनेजर के जाते ही नया मैनेजर आया और आते ही टाइमशीट भरने का जिम्मा एडमिन को थमा दिया। अब हमारे यहाँ भी अक्सर देखा जाता है कि 'जो दिखता है, उसी पर काम डाल दो', चाहे वो उसका असली काम हो या नहीं।
जब उन्होंने नए मैनेजर से कहा कि "सर, ये तो आपकी ड्यूटी है, मेरी नहीं," तो साहब बोले—"जो कहा है, वही करो।" अब भारतीय ऑफिसों में भी ऐसा ही होता है—ऊपर का हुक्म टालने की हिम्मत किसमें!
आज्ञापालन या 'बुद्धिमानी'?
यहाँ से कहानी दिलचस्प हो जाती है। कर्मचारी ने टाइमशीट में सभी का नाम भर दिया—हर किसी को पूरे हफ्ते, रोज़ 9 से 5, भले ही कोई पार्ट-टाइम हो, कोई छुट्टी पर या कोई हफ्ते में दो दिन ही आता हो। अब सोचिए, अगर हमारे यहाँ पेरोल में हर किसी को पूरी सैलरी और ओवरटाइम मिल जाए, तो अकाउंट्स वाले तो माथा पीट लेंगे!
एक कमेंट में किसी ने लिखा, "ऐसा करने से तो सबको फ्री में पैसे मिल जाते!" (Money for nothing...)। दूसरे ने तंज कसा, "अगर किसी काम से बचना हो, तो उसे ऐसा करो कि दोबारा कोई कहे ही नहीं!" (Dilbert Principle #3: If you don't want to do a job, do it badly...)
पेरोल का हंगामा और मैनेजर की बोलती बंद
जैसे ही ये टाइमशीट पेरोल डिपार्टमेंट पहुँची, वहाँ के लोग हैरान—"ये क्या खेल चल रहा है?" उन्होंने तुरंत नए मैनेजर से सवाल-जवाब शुरू कर दिया। अब साहब की हालत ऐसी, जैसे किसी ने रंगे हाथों पकड़ लिया हो।
सबसे मजेदार बात—इसके बाद मैनेजर ने फिर कभी टाइमशीट की फाइल उस कर्मचारी को नहीं दी! एक और कमेंट में किसी ने लिखा, "ये तो वही हुआ, जैसे अपने ही जाल में फँस जाना।" (Weaponized incompetence at its finest!)
कई पाठकों ने यहाँ भारतीय सेना और सरकारी ऑफिसों का हल्का-फुल्का मज़ाक भी किया—"यहाँ अगर कोई सीनियर अपना काम जूनियर को दे दे, तो सीनियर ही पकड़ा जाएगा।" एक और ने कहा, "मेरे ऑफिस में तो मैनेजर टाइमशीट खुद करता है, क्योंकि गलती हुई तो उसी पर गाज गिरेगी।"
सीख क्या है? नौकरी में कब 'ना' कहना चाहिए
इस कहानी से हम सबके लिए एक बढ़िया सीख है। ऑफिस में हर बार 'हाँ' कहना ही समझदारी नहीं है। अगर कोई ऐसा काम आपके ऊपर डाल रहा है, जो आपकी जिम्मेदारी नहीं है, तो एक बार जरूर पूछना चाहिए—"क्या ये सच में मेरा काम है?"
अगर ऊपर से ज़बरदस्ती हो भी जाए, तो कभी-कभी 'आज्ञापालन' में भी बुद्धिमानी छुपी होती है। जैसे इस कहानी में—कर्मचारी ने नियम के अनुसार काम किया, लेकिन उसकी 'सीधी-सादी' गलती ने मैनेजर को उसकी असली जिम्मेदारी याद दिला दी।
एक पाठक ने लिखा, "पेरोल वालों से बढ़िया सबक कौन दे सकता है! मैनेजर अब खुद ही टाइमशीट भरेगा..."
भारतीय ऑफिसों के लिए मजेदार सबक
हमारे यहाँ भी अक्सर ऐसा होता है—कोई छुट्टी पर, तो कोई हाफ-डे, किसी का वर्क फ्रॉम होम चल रहा है। ऐसे में टाइमशीट का हिसाब-किताब बड़ा पेंचिदा होता है। लेकिन अगर काम सही जिम्मेदार के पास नहीं रहेगा, तो गड़बड़ी होना तय है।
इसलिए, अगले बार जब कोई साहब अपना काम आप पर डालने की कोशिश करे, तो ये कहानी याद रखना—कभी-कभी सीधा-सपाट होना ही सबसे बड़ी चालाकी है!
अंत में—आपकी राय?
क्या आपके साथ भी ऐसा कोई मजेदार ऑफिस किस्सा हुआ है? क्या कभी किसी ने आपको ऐसी जिम्मेदारी थमा दी, जो आपकी थी ही नहीं? नीचे कमेंट में अपने अनुभव जरूर साझा करें—शायद अगली कहानी आपकी ही हो!
धन्यवाद, और ऑफिस में थोड़ा मज़ा भी जरूरी है, वरना जिंदगी Excel शीट ही बन जाएगी!
मूल रेडिट पोस्ट: He told me to do the timesheet and send to payroll so I did. Payroll were baffled.