जब बॉस ने कहा – 'ज्यादा मुस्कुराओ!', फिर दुकान बना भूतिया स्माइल शो-रूम
कहते हैं, मुस्कान दिल जीत लेती है। लेकिन कभी-कभी, जब मुस्कान 'आदेश' बन जाए तो क्या होता है? सोचिए, अगर किसी ने आपसे कह दिया – "हर वक्त मुस्कुराओ, चाहे कोई देखे या न देखे!" तो कैसा लगेगा? आज हम आपको ऐसी ही एक मज़ेदार कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसमें एक रिटेल स्टोर की लड़की ने अपने बॉस के बेहूदे आदेश को इतने दिलचस्प तरीके से निभाया कि न सिर्फ ग्राहक घबरा गए, बल्कि पूरा स्टाफ भी 'स्माइल मोड' में आ गया!
मुस्कराहट का फरमान और Craig की 'Axe' वाली सोच
कहानी की नायिका है – 21 साल की कॉलेज छात्रा, जो पार्ट-टाइम एक ब्रांडेड कपड़ों की दुकान में काम करती है। दुकान वही – महंगे कपड़े, अजीब-सी पृष्ठभूमि में बजता अंग्रेज़ी म्यूज़िक, और एक मैनेजर Craig – जिसकी पहचान है 'Axe' डियो की तेज़ खुशबू और आत्मविश्वास की कमी।
एक दिन Craig ने लड़की को साइड में बुलाकर बड़ा 'ज्ञान' दिया – "तुम ज्यादा मुस्कुराती नहीं हो। मुस्कुराओ, इससे ग्राहक स्वागत महसूस करते हैं।" जब लड़की ने पूछा, "मतलब, दोस्ताना बनूं?" तो Craig बोला – "नहीं, मतलब बस मुस्कुराओ, हर वक्त, चाहे कोई हो या न हो।"
अब भला इतना बेतुका आदेश! क्या हम रोबोट हैं? Craig को तो जैसे 'मुस्कान' का भूत सवार था।
जब मुस्कान बनी डरावनी – 'स्माइल मोड' का जलवा
Craig के आदेश के बाद लड़की ने सोचा – "ठीक है, बॉस! अब देखो, मुस्कान कैसी होती है।"
दूसरे ही पल से, वह दुकान में कपड़े तह करते हुए, झाड़ू लगाते हुए, यहां तक कि जब किसी 'कैरन' जैसी ग्राहक को बताया कि उनका साइज नहीं है – हर वक्त, हर काम में, वह ऐसी मुस्कान देती रही कि दांत तक दिख जाएं – बिल्कुल जोकर जैसी, आंखें बेजान, चेहरे पर चौड़ी मुस्कान!
मजेदार बात यह रही कि ग्राहक ही डरने लगे – कोई पूछे, "तुम ठीक तो हो?" कोई बोले, "कहीं किसी पंथ में तो नहीं हो?" और एक बच्ची तो ट्रायल रूम पर मुस्कुराते ही रोने लगी!
धीरे-धीरे बाकी साथी भी इस 'स्माइल मोड' में शामिल हो गए। अब हर स्टाफ के चेहरे पर वही अजीब, चौड़ी, डरावनी मुस्कान – दुकान जैसी नहीं, किसी भूतिया मेले जैसी लगने लगी! सप्ताह के अंत तक, Craig खुद घबरा गया और बोला – "अब थोड़ा कम करो!" लड़की ने मासूमियत से मुस्कुराते हुए पूछा – "अरे, आपने ही तो कहा था ज्यादा मुस्कुराओ?"
Craig फिर कभी मुस्कान की बात नहीं कर पाया!
मुस्कान – कब, क्यों और कैसे? कम्युनिटी की दिलचस्प राय
यह कहानी Reddit पर वायरल हुई तो कमेंट्स की बाढ़ आ गई। एक पाठक ने लिखा – "मैं भी एक छोटे ऑफिस में काम करता था। जब मैनेजर के बेटे ने मुझसे पूछा, 'इतना क्यों मुस्कुरा रहे हो?' तो मैंने कहा – या तो मैं खुश हूं या मुझे किसी के बारे में कोई खास बात पता है। बस, उसके बाद वो बच्चा हर बार मेरी मुस्कान देखकर घबरा जाता!"
एक और कमेंट में लिखा गया – "भैया, मुस्कराना भी अब काम का हिस्सा हो गया है? जितनी तनख्वाह मिलती है, उतना ही मुस्कुरा सकते हैं।"
दूसरे ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा – "मुझे भी बॉस ने मुस्कुराने का कहा था, मैंने चेहरे पर जान-बूझकर बेजान, डरावनी मुस्कान रखी। कुछ ही देर में उन्होंने खुद मना कर दिया!"
एक पाठक ने तो फिल्मी अंदाज़ में लिखा – "हम कपड़े बेचने आए हैं, जोकर बनने नहीं!"
एक कमेंट ने भारतीय संस्कृति पर भी बात छेड़ी – "हमारे यहां तो मुस्कान अपने आप आती है, जब मन खुश हो। जबरदस्ती हंसी तो बेमतलब की लगती है – जैसे शादी में जबरन फोटो खिंचवाते वक्त चेहरे पर नकली मुस्कान!"
असली मुस्कान बनाम बनावटी हंसी – भारतीय नजरिए से
भारतीय संस्कृति में मुस्कान को 'सौम्यता' और अपनापन का प्रतीक माना गया है। लेकिन जब कोई मुस्कराहट 'आदेश' बन जाए, तो वह बनावटी लगने लगती है। ऑफिस, दुकानों या परिवार में भी सब जानते हैं – असली मुस्कान आंखों से झलकती है, चेहरे पर झूठी मुस्कान कोई भी पहचान लेता है। यही वजह है कि कहानी पढ़ते हुए हर किसी ने महसूस किया – मुस्कराना अच्छी बात है, पर जबरन हंसने का आदेश देना किसी को भी 'भूतिया' बना सकता है!
अंत में – मुस्कान दिल से हो तभी असरदार
तो दोस्तों, अगली बार अगर आपका बॉस या कोई रिश्तेदार आपसे कहे – "थोड़ा और मुस्कुराओ!" तो सोचिए, असली खुशी कहां से आती है? मुस्कान तब ही खूबसूरत लगती है जब वह दिल से निकले, वरना बनावटी हंसी किसी डरावने जोकर से कम नहीं लगती!
क्या आपके साथ भी कभी किसी ने ऐसा अजीब आदेश दिया है? या ऑफिस में कोई 'Craig' टाइप बॉस है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में जरूर लिखिए – और हां, मुस्कान दिल से लाइए, जबरदस्ती नहीं!
मूल रेडिट पोस्ट: oh i’ll smile alright