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जब बॉस ने कहा 'फेंक दो!' – और IT टीम की लगी लॉटरी

एक अव्यवस्थित नेटवर्क क्लोज़ेट में रखे ढेर सारे बॉक्स, जो ऑफिस के स्थानांतरण के बाद की अराजकता को दर्शाते हैं।
इस सिनेमाई दृश्य में, नेटवर्क क्लोज़ेट में बेतरतीब बॉक्स हमारे ऑफिस के स्थानांतरण के बाद की अराजकता को दर्शाते हैं। यह एक याद दिलाने वाला पल है कि कभी-कभी, सबसे अच्छा यही होता है कि चीज़ों को बाहर फेंक दें और नई शुरुआत करें!

ऑफिस में काम करते हुए आपने भी कई बार सुना होगा – "अरे, ये सब पुराना हो गया है, फेंक दो!"। लेकिन अगर कभी बॉस खुद कह दे कि लाखों की चीज़ें कूड़े में डाल दो, तो क्या आप सच में ऐसा करेंगे? आज की कहानी कुछ ऐसी ही है, जो टेक्नोलॉजी की दुनिया के साथ-साथ हमारे देसी ऑफिस कल्चर को भी छूती है।

ऑफिस शिफ्टिंग और 'कूड़े' में छुपा खज़ाना

कहानी एक सरकारी टेक कंपनी की है, जो खुद को गेमिंग कंपनी जैसा कूल दिखाने की कोशिश कर रही थी – जैसे हमारे यहां कॉलेज फेस्ट में सब खुद को सबसे स्टाइलिश दिखाने की होड़ लगाते हैं। ऑफिस शिफ्टिंग के बाद, नेटवर्क क्लोज़ेट में ढेरों डिब्बे भरकर रख दिए गए। हमारे नायक, जो IT टीम में थे, को कुछ जरूरी सामान चाहिए था, तो उन्होंने डिब्बे हटाने शुरू किए।

इतने में कंपनी के बड़े साहब – जिनका ओहदा सुनकर ही लोग चाय छोड़ देते हैं – वहां से गुजरते हैं। वो बोले, "ये सब तो यहां आना ही नहीं चाहिए था, फेंक दो!"। अब भारत में तो बॉस की बात भगवान की बात मानी जाती है, लेकिन भाई, सामान फेंकना भी तो रिस्क है – कल को कोई पूछे कि डिब्बे में तो कंपनी के कागज़ थे या कोई जरूरी डेटा, तो फंसे न!

पर जब डिब्बे खोले, तो जो निकला, उसे देखकर किसी का भी मुंह खुला का खुला रह जाए। नया-नवेला ASUS का गेमिंग लैपटॉप, दो Sonos स्पीकर, Google Glass, बीट्स के हेडफोन, 14 Raspberry Pi किट, पॉडकास्टिंग के लिए Blue माइक्रोफोन, Samsung टैबलेट्स – सब कुछ या तो ब्रांड न्यू या सिर्फ थोड़ा इस्तेमाल किया हुआ। कुल मिलाकर, करीब 8-10 लाख रुपए का माल!

"फेंक दो" का मतलब – समझदारी या बेवकूफी?

अब यहां से कहानी दिलचस्प होती है। हमारे नायक ने फिर से बड़े साहब से पूछा – "सर, ये सब तो नया है, रख लें?" और बॉस ने गुस्से में डांटते हुए कहा – "मैंने कहा न, फेंक दो!" अब हमारे यहां IT वाले भी दूध के धुले नहीं होते; उन्होंने और उनकी टीम ने चुपचाप वो सब "फेंकना" शुरू किया – सीधा अपने-अपने बैग में!

सोचिए, भारत के किसी सरकारी दफ्तर में ऐसा होता, तो शायद अगले दिन OLX और Quikr पर नये-नये गैजेट्स की बाढ़ आ जाती! वैसे एक कमेंट में किसी ने लिखा, "मैनेजर्स जब 'फेंक दो' कहते हैं, तो सबसे मज़ा आता है!" किसी ने चुटकी ली – "कभी-कभी बॉस खुद परेशान हो जाते हैं जब Pentium III कंप्यूटर भी फेंक दिए जाते हैं, जिन पर उनका कोई जरूरी सॉफ्टवेयर चल रहा होता है!"। एक और ने कहा – "हमारे यहां तो पुराने कंप्यूटर, प्रिंटर, मॉनिटर का एक कमरा बना है – शायद कभी काम आ जाए!"

यहां ये भी ध्यान देने वाली बात है कि कई बार कंपनियां सिर्फ इसलिए सामान बदल देती हैं क्योंकि वारंटी खत्म हो गई, जबकि वो पूरी तरह चालू होता है। एक पाठक ने बताया कि उनके यहां हर तीन साल में कंप्यूटर बदले जाते थे, और पुराने डिवाइस जरूरतमंद बच्चों को दे दिए जाते थे – कितनी बढ़िया सोच!

सरकारी-बॉस और टेक्नोलॉजी – "ये मेरा पैसा थोड़े है!"

बड़ी कंपनियों में अक्सर बॉस "C-suite" (यानि CEO, CTO वगैरह) टेक्नोलॉजी को फैशन समझते हैं। एक कमेंट में लिखा था, "इन लोगों के लिए तो ये उनका पैसा है ही नहीं!" कोई बोले – "हमारे यहां तो जब कॉल सेंटर शिफ्ट हुआ, तो हम सबने डंपस्टर से महंगे-महंगे केबल्स निकालकर बेच डाले!"।

किसी ने अपने अनुभव शेयर किए – "हमारे बॉस को हर नया गैजेट चाहिए था। जैसे ही तीन साल की वारंटी खत्म, पुराना लैपटॉप या डेस्कटॉप उठा लो, घर ले जाओ। मैंने तो परिवार के हर सदस्य को लैपटॉप दिला दिया।" और सच पूछिए, भारत में भी कई IT और सरकारी विभागों में ऐसा ही चलता है – एक बार 'कबाड़ी' को बुला लीजिए, फिर देखिए क्या-क्या निकलता है!

काम का सामान या जुगाड़ का खज़ाना?

हमारे यहां तो कहावत है – "कचरे में भी सोना मिल सकता है"। टेक्नोलॉजी की दुनिया में ये कहावत बिलकुल फिट बैठती है। बहुत से कमेंटर्स ने अपने-अपने अनुभव बताए – किसी को पुराना मॉडेम मिल गया, किसी को ऑफिस का नया प्रिंटर, किसी को कॉलेज के कंप्यूटर, तो किसी ने खुद का पहला कंप्यूटर ऑफिस के 'कचरे' से ही बना लिया!

एक सज्जन तो बोले – "मेरे घर के सारे टीवी 'कूड़े' से आए हैं – 70 इंच का 4K टीवी भी!" एक और ने बताया – "मेरे पापा ऑफिस से हर दो साल में पुराना कंप्यूटर घर ले आते थे, वो हमारे लिए 'नया' होता था।"

निष्कर्ष: ऑफिस का कूड़ा, किसी का सपना!

तो दोस्तों, जब अगली बार आपके ऑफिस में कोई बॉस बोले "फेंक दो", तो ज़रा डिब्बे खोलकर देख लेना – क्या पता आपकी किस्मत भी चमक जाए! टेक्नोलॉजी की दुनिया में कब क्या चीज़ 'कचरा' बन जाए, और कब वो आपके लिए खजाना हो जाए, कौन जानता है?

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा कुछ हुआ है – ऑफिस में 'कचरे' से निकला कोई अनमोल सामान? या आपने भी कभी पुराने कंप्यूटर, मोबाइल या गैजेट से जुगाड़ करके अपना काम चलाया? अपने मजेदार किस्से ज़रूर शेयर कीजिए, और अगर पसंद आया हो तो दोस्तों के साथ शेयर करना मत भूलिए – हो सकता है अगली बार किसी का OLX का सपना सच हो जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: 'Just throw it out!'