जब बॉस ने कहा 'ऑफिस पहुँचते ही फोन करो' – कर्मचारियों का अनोखा बदला!
किसी भी दफ्तर में नए मैनेजर के आते ही माहौल थोड़ा बदल ही जाता है। लेकिन जब मैनेजर बगैर वजह के अजीब नियम बना दे, तब? आज की कहानी एक ऐसे ही ऑफिस की है, जहाँ काम से ज़्यादा टाइम पास और गेम्स चलते थे, लेकिन फिर भी बॉस को टाइम पर "हाज़िरी" चाहिए थी – और वो भी फोन से! अब जब इधर Jugaad का जमाना है, तो कर्मचारियों ने भी कमाल कर दिखाया।
"यार, काम तो बचा ही नहीं, अब क्या करें?"
ये किस्सा 2000 के आस-पास की है, जब Y2K प्रोजेक्ट लगभग खत्म हो चुका था। चार टेक्नीशियन (कुल 25 में से) ही बचे थे, जिन्हें दिनभर बस एक डिलीवरी करनी होती थी। बाकी समय छोटा सा ऑफिस था और कंप्यूटर पर Duke Nukem गेम चलती रहती थी। सोचिए, ऑफिस में PUBG या Ludo King तो सुना है, पर यहाँ तो '90s का गेम ही कमाल कर रहा था!
सब अपने हिसाब से आते-जाते थे, कोई टाइम कार्ड या बायोमेट्रिक नहीं – बस एक एक्सेल शीट पर हफ्ते की कुल 40 घंटे हाज़िरी भर दो, चाहे 38 ही काम किया हो! (जैसे हमारे यहाँ सरकारी दफ्तरों में "हाजिरी लगाओ, काम बाद में देखेंगे" वाली बात हो जाती है।)
मैडम की नई फरमाइश: "ऑफिस पहुँचते ही मुझे फोन करो!"
अब कहानी में ट्विस्ट आया – नई मैनेजर (जो खुद दूसरे शहर में बैठी थीं) ने सबको बुलाया और आदेश दिया, "हर रोज ऑफिस पहुँचकर मुझे फोन करके बताओ कि तुम आ गए हो।" अरे भई, खुद तो 8 बजे कभी आती नहीं थीं, मगर कर्मचारियों से punctuality की उम्मीद!
ऑफिस में सिर्फ एक ही फोन था। चारों को एक-दूसरे के बाद कॉल करनी पड़ती, तो आखिरी वाला अक्सर 8 बजे के बाद ही वॉइसमेल छोड़ पाता। मज़े की बात, मैडम खुद कभी समय पर फोन उठाती नहीं थीं – हर बार वॉइसमेल ही मिलता था!
एक मीटिंग में उन्होंने ताना मारा, "तुम सब लेट हो!" कर्मचारियों ने समझाया – "मैडम, फोन एक है, आप वॉइसमेल ही सुनती हैं।" मगर उनका जवाब – "ये तुम्हारी समस्या है, मेरी नहीं। टाइम पर clock-in करो।" साथ ही सुझाव दिया, "चारों में से कोई एक फोन करे, बाक़ी सब साथ में 'हैलो' बोल दें।"
कर्मचारियों का देसी जुगाड़: "अब सुनिए हमारी भी!"
बस फिर क्या था! अगले हफ्ते, कर्मचारियों ने तय किया कि अब हर वॉइसमेल को जितना लंबा हो सके, खींचेंगे। 90 सेकंड की रिकॉर्डिंग लिमिट थी – उसमें भी पूरा मसाला भर दिया। एक कर्मचारी ने तो Van Halen के गाने की लाइन जोड़ दी – "I don't feel tardy" (मतलब 'मुझे देर होने का अहसास ही नहीं!') – और पूरे 90 सेकंड तक ऐसे ही फालतू बातें घुमाईं। अंत में सबने मिलकर कहा, "हैलो, हम clock-in कर रहे हैं!"
अब मैडम को हर सुबह 90-90 सेकंड बोरिंग बातें सुननी पड़ती थीं, वो भी सिर्फ इसलिए कि कर्मचारी टाइम पर आए या नहीं! कुछ ही दिन में, सब पुराने तरीके पर लौट आए – सीधा एक्सेल शीट में टाइम भर दो, न कोई फोन, न वॉइसमेल।
कम्युनिटी का मज़ेदार रिएक्शन – "ऐसी पॉलिसी का क्या करें?"
रेडिट पर इस किस्से को पढ़कर कई लोगों ने अपने-अपने ऑफिस के अनुभव बांटे। एक यूज़र ने लिखा, "हमारे यहाँ भी कंप्यूटर बंद करने की पॉलिसी थी, मगर चालू होने में 10 मिनट लगते थे! अगर 3 मिनट में लॉगिन न किया, तो मैनेजर डाँट देता। बाद में पता चला, ये सब कानून के खिलाफ है।"
दूसरे ने मज़ाकिया अंदाज में कहा – "हमारे यहाँ तो बार-बार कम्प्यूटर लॉक करने पर IT वाले खुद आकर अनलॉक करते, फिर मैनेजर और HR को शिकायत कर देते थे। तीसरी बार पकड़े गए, तो नौकरी खतरे में!"
तीसरे ने तो ऑफिस की 'देसी' जुगाड़ याद दिलाई – "हम तो punch card से सीधे कम्प्यूटर clock-in पे आए, मगर PC इतना स्लो था कि चाय बनाते-बनाते ही चालू होता था!"
एक कमेंट में किसी ने सलाह दी, "अगर मैडम को इतना ही clock-in सुनना है, तो बार्बरशॉप क्वार्टेट स्टाइल में गा भी सकते थे!" अब सोचिए, हर सुबह चारों मिलकर 'हैलो' गा रहे हैं – बॉस का क्या हाल होता!
क्या सीख मिली? "जो जैसा करेगा, वैसा ही भर पाएगा!"
इस पूरी कहानी से साफ़ है – बेवजह की सख्ती, उल्टी पॉलिसी और खुद नियम न मानने वाले बॉस को कभी-कभी कर्मचारी भी मज़ेदार अंदाज में जवाब दे सकते हैं। हमारे यहाँ भी अक्सर देखा जाता है – जहाँ सिस्टम बेवजह टाइट हो, वहाँ लोग अपना जुगाड़ खोज ही लेते हैं। आखिर, "जहाँ चाह वहाँ राह!"
आपके ऑफिस में भी कभी ऐसा अजीब नियम आया? या आपने भी कभी बॉस को मज़ेदार तरीके से जवाब दिया? नीचे कमेंट में जरूर बताइए!
मूल रेडिट पोस्ट: Oh, you want us to call you when we get into the office?