जब बॉस ने कहा 'ईमेल भेजो' और कर्मचारियों ने बना दिया सवालों का तूफान
ऑफिस की दुनिया में कभी-कभी बदलाव ऐसे आते हैं जैसे अचानक मौसम बदल जाए। सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है, तभी एक नया सिस्टम या सॉफ्टवेयर बिना बताये आ जाता है और पूरी टीम की नींद हराम कर देता है। ऐसा ही कुछ हुआ एक कंपनी में, जहां पुराने 25 साल पुराने डाक्यूमेंट शेयरिंग प्लेटफॉर्म को "सुरक्षा" के नाम पर अपग्रेड कर दिया गया।
जैसे ही नया सिस्टम आया, टीम को लगा – "चलो, अब तो सब कुछ और आसान हो जाएगा!" लेकिन असलियत में जो हुआ, वो तो किसी बॉलीवुड मसालेदार फिल्म से कम नहीं था।
नया सिस्टम, नई मुसीबतें: "किसने किया टेस्ट?"
नया प्लेटफॉर्म आया, न कोई मैसेज, न कोई ट्रेनिंग, और न ही कोई घोषणा। टीम के लोग हैरान! बहुत सी ज़रूरी सुविधाएँ ही गायब थीं। एक टीम मेंबर (जो कहानी सुना रहे हैं), ने खुद ही सारी समस्याओं की लिस्ट बनाकर प्रोजेक्ट मैनेजर (PM) को ईमेल किया – "भइया, ये सब नहीं चल रहा, कहाँ बताएं?" PM ने कॉल रखवाई, जिसमें अपने डेवलपर्स को जोड़ लिया, और हमारी टीम से भी कुछ लोग जुड़े।
कॉल में PM का रवैया कुछ ऐसा था जैसे दिल्ली के ट्रैफिक में फंसे ड्राइवर – न धैर्य, न समझदारी। बोले – "पहले ही टेस्ट हो चुका है!" टीम मेंबर ने तुरंत तगड़ा सवाल दाग दिया, "किसने टेस्ट किया? हम तो रोज़ इस्तेमाल करते हैं, हमें तो किसी ने पूछा ही नहीं!" PM का गुस्सा सातवें आसमान पर। फिर फरमान जारी – "अगर कुछ दिक्कत है तो 'Ask Help' लिंक से ईमेल भेजो!"
"जैसा कहा, वैसा किया!" – सवालों की बारिश
अब टीम ने सोचा, "ठीक है, जैसा राजा, वैसी प्रजा!" उन्होंने अपनी पूरी समस्याओं की लिस्ट को पांच हिस्सों में बांट लिया और हर दिन हर मेंबर एक-एक समस्या ईमेल करने लगे। यानी रोज़ 5 अलग-अलग ईमेल, हर एक में अलग मुद्दा। जवाब आता – "हम रिसर्च कर रहे हैं, जल्दी बताएंगे।"
हफ्ता बीता, कोई हल नहीं। अब टीम ने फॉलो-अप के नाम पर रोज़ दो-दो ईमेल भेजने शुरू कर दिए – एक पुरानी समस्या पर अपडेट मांगने और एक नई समस्या।
यहाँ एक कमेंट करने वाले ने बड़े मज़ेदार अंदाज में लिखा, "आप तो PM की मदद करना चाह रहे थे, लेकिन उन्होंने खुद ही मुश्किलें मोल लीं। अब सवालों का तूफान झेलो!"
"ऊपर से आया आदेश!" – बॉस की एंट्री और कहानी का ट्विस्ट
हफ्ते भर की ईमेल युद्ध के बाद PM ने खुद के बॉस को CC में डालकर शिकायत कर दी – "बहुत सवाल आ रहे हैं, काम नहीं हो पा रहा।" अब टीम लीड ने 'reply all' में साफ़-साफ़ लिख दिया, "हमने पहले ही आपकी कॉल में पूरी लिस्ट दी थी, आपने कहा था ईमेल करो, तो हम वही कर रहे हैं!"
यहाँ एक अनुभवी कमेंटेटर ने याद दिलाया – "ये वही पुरानी कहानी है – ऊपर बैठे लोग, नीचे काम करने वालों से बिना पूछे कोई 'सलाह' बना देते हैं, और फिर सब गड़बड़ हो जाती है।"
अब PM के बॉस ने खुद कहा – "पूरी लिस्ट एक साथ भेजो, ताकि सही तरीके से समाधान हो सके!" PM फिर कभी नजर नहीं आए। टीम ने राहत की सांस ली।
भारतीय दफ्तरों में भी है ये आम – क्यों दोहराई जाती है ये गलती?
अगर आप सोचते हैं कि ये सिर्फ विदेशी दफ्तरों की कहानी है, तो ज़रा अपने ऑफिस का हाल देखिए। यहाँ भी जब कोई नया सॉफ्टवेयर आता है – न ट्रेनिंग, न टेस्टिंग, सीधा "लाइव"। फिर सब लोग "जुगाड़" लगाते हैं, काम कैसे निकाले।
एक कमेंट में किसी ने लिखा – "हमारे यहाँ तो हर बार नई प्रक्रिया उसी दिन लागू होती है जिस दिन सबको पता चलता है। फिर सब एक-दूसरे से पूछते हैं, 'भाई, ये कैसे चलेगा?'"
एक और मज़ेदार कमेंट – "मैनेजमेंट सोचता है, 'यूज़र्स को क्या पता, असली इस्तेमाल तो हमने देखा है!' लेकिन असलियत ये है कि जो रोज़ इस्तेमाल करता है, उसी को सबसे ज्यादा पता होता है कि क्या चाहिए।"
सबक – असली उपयोगकर्ता से पूछना ही है असली टेस्टिंग
इस कहानी से साफ है – चाहे सॉफ्टवेयर हो या कंपनी की कोई नई नीति, बिना यूज़र की राय के काम शुरू करना मतलब बिना रेसिपी के बिरयानी बनाना। ऊपर से आदेश देकर नीचे के लोगों को परेशान करना, फिर उन्हीं से समाधान की उम्मीद रखना – ये गलती हर जगह होती है।
जैसा एक अनुभवी कमेंट में कहा गया – "User Acceptance Testing (UAT) सबसे जरूरी है, नहीं तो सिस्टम बदलने के बाद सबको पांच स्टेज़ ऑफ़ ग्रिफ़ में जाना पड़ता है!"
क्या आपके ऑफिस में भी ऐसा हुआ है?
दोस्तों, इस कहानी को पढ़कर अगर आपको अपने ऑफिस के किस्से याद आ गए हों, तो कमेंट में जरूर बताइए। क्या आपके यहाँ भी "ऊपर से आदेश, नीचे अफरा-तफरी" वाला माहौल है? या कभी आपने भी मैनेजमेंट को 'उनकी ही भाषा' में जवाब दिया है? मज़ेदार अनुभव और टिप्स हमारे साथ बांटें!
मूल रेडिट पोस्ट: Asking the question you told me you wanted