जब बॉस खुद ही सबसे बड़ा सिरदर्द निकला: एक मेडिकल रिसेप्शनिस्ट की दर्दभरी दास्तां
हमारे देश में अक्सर लोग बोलते हैं, “बॉस अच्छा हो तो काम भी मज़ेदार हो जाता है।” लेकिन सोचिए, अगर बॉस ही सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाए, तो क्या हाल होगा? आज आपकी मुलाकात करवाते हैं एक ऐसी मेडिकल रिसेप्शनिस्ट से, जिनकी ज़िंदगी किसी बॉलीवुड की कॉमेडी-ड्रामा फिल्म से कम नहीं।
छः महीने पहले, जब उन्होंने एक छोटे से क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी जॉइन की, तब सोचा था – “सीखने को मिलेगा, काम की इज़्ज़त होगी, और बॉस समझदार होंगे।” लेकिन हकीकत? बॉस इतनी बिखरी हुई कि उनके सामने तो हमारे मोहल्ले के बिजली वाले शर्मा जी भी सुपरमैन लगें!
बॉस की बेतरतीबी का महा-यज्ञ
अब ज़रा सोचिए, बॉस खुद क्लिनिक की मालिक, मरीजों की डॉक्टर, और रिसेप्शनिस्ट की सीधी रिपोर्टिंग बॉस! मतलब सारी गाड़ी एक ही पटरी पर, लेकिन उस पटरी पर ट्रेन हर दिन पटरी से उतरती है।
मरीजों की अपॉइंटमेंट्स लगभग हर बार 45-60 मिनट लेट, 80% टेलीहेल्थ का काम, एक दिन क्लिनिक में मिलना, लेकिन काम का ढर्रा ऐसा कि लगता है – बॉस के पास टाइम मैनेजमेंट की घड़ी ही नहीं है! कभी गलत दवा लिख दी, कभी गलत फार्मेसी भेज दी, और हद तो तब हो गई जब मरीजों की फाइलें इधर-उधर हो जातीं।
हमारे यहां तो लोग कहते हैं, “जितना गुरू बिखरा, उतना चेला परेशान।” ऐसा ही हाल यहाँ भी है – मरीज फोन करें, “मैडम, डॉक्टर ने कहा आपसे बात करूं।” रिसेप्शनिस्ट पूछे तो डॉक्टर बोलें, “अरे, मैं तो भूल गई बताना!” भाई, ये भूलने की बीमारी तो हमारे देश के नेताओ में ही मिलती थी, अब डॉक्टरों में भी घुस गई!
कमेंट्स की महफिल: Reddit वालों की राय भी जान लीजिए
अब Reddit पर लोग भी चुप नहीं बैठे – एक सज्जन ने तो साफ-साफ कह दिया, “ये बिखराव नहीं, ये तो सीधी-सीधी गड़बड़ी (मालप्रैक्टिस) है। अगर ऐसी गड़बड़ी में किसी मरीज को नुकसान हो गया, तो रिसेप्शनिस्ट से ज्यादा क्लिनिक की डॉक्टर ही फंसेगी।”
दूसरे ने कहा, “भाई, डॉक्टर को बिज़नेस चलाने का शौक छोड़, सीधे-सीधे डॉक्टरगिरी ही करनी चाहिए। दोनों नाव में पैर रखोगे, तो डूबना तय है।”
तीसरे ने सलाह दी, “अब देर-सवेर कोई बड़ा हादसा हो सकता है, और जब जांच होगी, तो टीम का हर सदस्य फंसेगा। नौकरी छोड़ दो, जान बचाओ!”
किसी ने हंसी में कहा, “लगता है आपकी बॉस को ADHD है – टाइम मैनेजमेंट, ध्यान की कमी, बार-बार चीज़ें भूलना – सब लक्षण वही हैं! क्यों न उन्हें मोबाइल पर अलार्म, नोट्स या फिर पुराने ज़माने का डायरी-कलम थमा दो?”
भारतीय दफ्तरों की सच्चाई: ‘अच्छा बॉस’ का असली मतलब
देखिए, हमारे यहां ऑफिस में ‘अच्छा बॉस’ का मतलब सिर्फ मुस्कुराने वाला या कभी-कभी चाय पूछने वाला नहीं होता। असली अच्छा बॉस वही है जो समय पर आए, काम में मदद करे, गलती होने पर साथ दे और टीम को आगे बढ़ाए।
एक कमेंट में तो किसी ने अपने पुराने बॉस का ज़िक्र किया – “मेरे बॉस न समय के पाबंद, नयी चीज़ें सिखाने वाले और टीम को आगे बढ़ाने वाले थे। कभी भी कोई दिक्कत हो, तो खुद आगे आकर जिम्मेदारी लेते। वो सिर्फ अच्छे नहीं, महान बॉस थे। आपके बॉस तो सिर्फ ‘मिलनसार’ हैं, पर काम के मामले में जीरो!”
हमारे देसी ऑफिसों में, अक्सर लोग कहते हैं – “बॉस भले ही सख्त हो, लेकिन काम का हो।” यहाँ तो उल्टा है – बॉस बहुत ‘लचीली’ हैं, लेकिन काम में ढीली हैं!
रिसेप्शनिस्ट के लिए सीख: खुद को बर्बाद मत करो
अब सवाल ये है – ऐसे हालात में रिसेप्शनिस्ट क्या करे? Reddit पर कई लोगों ने सलाह दी – “मरीज की जानकारी में गलती मत करो, बिना मरीज की इजाज़त किसी और से बात मत करो, गलती की जिम्मेदारी डॉक्टर की है, तुम्हारी नहीं।”
एक ने तो कहा, “बॉस को सुधारने का कोई उपाय नहीं। वो खुद ही खुद की मालिक हैं, ऊपर कोई बड़ा बॉस नहीं, इसलिए सुधारने की कोई गुंजाइश नहीं। तुम जितना आसान बनाओगी, वो उतना आराम करेगी। अच्छा बॉस होना सिर्फ ‘मिलनसार’ या ‘लचीला’ होना नहीं होता – जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।”
आखिर में – क्या करे रिसेप्शनिस्ट?
हमारे भारतीय समाज में बहुत बार ऐसा होता है – लोग सोचते हैं, “अभी नई-नई नौकरी है, थोड़ा एडजस्ट कर लेंगे।” लेकिन ध्यान रहे, आपका आत्मसम्मान, आपकी सेहत और आपका भविष्य किसी की बेतरतीबी की भेंट न चढ़ जाए।
अगर आपके बॉस की वजह से बार-बार आप पर दबाव आ रहा है, मरीजों की जान खतरे में पड़ रही है, और आप खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, तो ज़रूरी है कि आप आगे बढ़ें। नया काम ढूंढें, अपने अनुभव को अपना हथियार बनाएं और आगे बढ़ें।
कहते हैं – “अच्छा बॉस मिलना किस्मत की बात है, लेकिन खराब बॉस से दूर रहना अक्लमंदी है।” तो दोस्तो, ऐसे ऑफिस में टिके रहना, जहाँ बॉस खुद ही सबसे बड़ा सिरदर्द है, समझदारी नहीं।
आपकी क्या राय है? क्या कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ है? कमेंट में जरूर बताइए – आपकी कहानी अगला ब्लॉग बन सकती है!
मूल रेडिट पोस्ट: How should the Front Desk handle a disorganized boss?