जब बॉस को मोहॉक पसंद नहीं आया: बाल कटवाने की जिद और देसी तड़का
कभी सोचा है कि सिर्फ बालों का स्टाइल भी बवाल मचा सकता है? आज के दौर में भले ही हेयरस्टाइल पर कोई खास चर्चा न हो, लेकिन 60 के दशक में ये इतना बड़ा मुद्दा था कि ऑफिस से लेकर स्कूल तक, हर जगह इसका असर दिखता था। चलिए, सुनाते हैं आपको एक ऐसी ही किस्सा, जिसमें एक कर्मचारी ने अपने बॉस को हेयरस्टाइल के मामले में ऐसा पटखनी दी कि ऑफिस की हवा ही बदल गई!
ऑफिस की राजनीति और बालों का स्टाइल: एक अनोखा संघर्ष
ये किस्सा है 1950-60 के दशक का, जब अमेरिका में मोहॉक हेयरस्टाइल (सिर के दोनों तरफ के बाल मुंडवा कर बीच में बाल छोड़ना) को बहुत ही बागी और अजीब माना जाता था। अब सोचिए, अगर हमारे मोहल्ले के किसी शर्मा जी के बेटे ने ऐसे बाल कटवा लिए होते, तो मोहल्ले की चाय की दुकान पर हफ्तों चर्चा चलती!
कहानी के नायक हैं एडी, जिनके बारे में उनकी गर्लफ्रेंड (जो बाद में एक संस्कारी संडे स्कूल की टीचर बनीं) के बेटे ने Reddit पर ये किस्सा साझा किया। एडी बड़े ही टशन में मोहॉक कटवा कर ऑफिस पहुंच गए। वहां के बॉस, बिल, को ये बिल्कुल हजम नहीं हुआ। उसने गुस्से में कहा, "मैं तुम्हें इस बेवकूफी भरे बालों के साथ फिर कभी न देखूं!"
अब एडी भी कोई कम नहीं थे। उन्होंने अगले ही दिन बाल पूरी तरह मुंडवा लिए – यानी सिर बिल्कुल चमचमाता हुआ! बॉस बिल का चेहरा देखने लायक था: "अब ये क्या कर दिया? ऐसे अजीब क्यों बन गए?"
इस किस्से की सबसे मज़ेदार बात ये थी कि बॉस को न मोहॉक पसंद आया, न गंजा सिर! अब एडी बेचारे सोच में पड़ गए – "भैया, आपको आखिर चाहिए क्या?"
बालों पर बवाल: स्कूल से ऑफिस तक
ये कोई इकलौती घटना नहीं थी। Reddit पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक कमेंट में किसी ने बताया कि 1960 के दशक में उनके स्कूल के दो लड़कों ने मोहॉक कटवाया, तो स्कूल ने उन्हें तब तक सस्पेंड कर दिया, जब तक वो 'सही' बाल नहीं कटवा लेते। माता-पिता ने कहा – "हमारे बच्चे अपने हिसाब से बाल रखेंगे!" स्कूल ने बच्चों को निकाल दिया, लेकिन बाद में मामला इतना बढ़ गया कि शायद कोर्ट-कचहरी तक पहुंच गया। आखिर में उन बच्चों को दूसरा स्कूल ढूंढना पड़ा।
सोचिए, आज के जमाने में कोई स्कूल बच्चों को बालों के लिए बाहर कर दे, तो सोशल मीडिया पर बवाल मच जाए! लेकिन 60 के दशक में ये आम बात थी। एक और कमेंट में लिखा था, "मेरे भाई ने 70 के दशक में स्कूल की फोटो के लिए लंबे बाल रख लिए, तो मां को मोहल्ले में बहुत सुनना पड़ा!"
हेयरस्टाइल और पहचान: समाज की सोच का आईना
कई लोगों ने ये भी कहा कि उस जमाने में बालों का स्टाइल सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि बगावत की निशानी था। जैसे हमारे यहां भी 80-90 के दशक में लड़कों का लंबे बाल रखना या मूंछें रखना, घरवालों के लिए सिरदर्द बन जाता था। एक कमेंट में किसी ने लिखा, "मैंने कॉलेज जाते ही मूंछें रख लीं, घरवालों ने कई बार टोका, लेकिन मैंने नहीं मानी।"
अमेरिका में भी कुछ ऐसा ही था। कोई कहता है, "मेरे दोस्त ने आर्मी जैसी हेयरकट रखी, तो दूसरा था जो वानर सेना के सदस्य जैसा बाल बढ़ा लेता था!" यानी बालों के बहाने हर कोई अपनी पहचान, अपनी आज़ादी जताने की कोशिश करता था।
आज का दौर: बालों की आज़ादी या फिर वही पुरानी सोच?
भले ही अब फैशन बदल गया है, लेकिन कहीं-न-कहीं बालों को लेकर समाज की सोच आज भी जड़ है। एक कमेंट में किसी ने लिखा, "2000 के दशक में जब मैंने मोहॉक कटवाया, स्कूल ने मुझे सस्पेंड कर दिया!" यानी ये बहस अभी भी खत्म नहीं हुई है।
एक और मज़ेदार कमेंट था – "मेरे दोस्त ने गंजा होने को खुद की स्टाइल बना लिया। कोई बालों का रोना रोता है, कोई बिना बाल के ही टशन दिखाता है!"
निष्कर्ष: आखिर बालों की इतनी अहमियत क्यों?
हमारे समाज में बाल और मूंछें हमेशा से मर्दानगी, विद्रोह या संस्कृति की पहचान माने गए हैं। कभी किसी फिल्मी हीरो के बालों की नकल, तो कभी माता-पिता की डांट – बालों का मुद्दा हर पीढ़ी में रहा है। एडी की कहानी हमें ये भी सिखाती है कि कभी-कभी 'मालिशियस कंप्लायंस' यानी जानबूझकर नियम मानना भी अपना अलग मज़ा रखता है!
तो अगली बार जब घर में कोई बालों के स्टाइल पर बहस छेड़े, तो एडी की ये कहानी जरूर सुनाइएगा – और पूछिए, "तो भैया, आखिर चाहिए क्या?"
आपके स्कूल या ऑफिस में कभी बालों को लेकर कोई मज़ेदार किस्सा हुआ हो? कमेंट में जरूर बताइए, और इस पोस्ट को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर कीजिए जिन्हें बालों की आज़ादी बहुत प्यारी है!
मूल रेडिट पोस्ट: Don’t like my Mohawk? Ok.