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जब बॉस को अपनी ही चाल उल्टी पड़ गई: एक डेवलपर की छोटी मगर मज़ेदार बदले की कहानी

ऐप कोड और क्लाइंट की मांगों के बीच संतुलन बनाते डेवलपर, तकनीकी गलतफहमियों को दर्शाते हुए।
एक समर्पित डेवलपर की फिल्मी छवि, ऐप निर्माण की चुनौतियों का सामना करते हुए, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रबंधन के बीच की दूरी को उजागर करती है।

कहते हैं, "सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे" — लेकिन कभी-कभी सांप खुद अपने बिल में फँस जाता है! आज की कहानी एक ऐसे आईटी डेवलपर की है, जिसने कंपनी के बॉस की चाल को उसी पर उल्टा फेर दिया। और ऐसा जवाब दिया कि बॉस के पसीने छूट गए।

हमारे देश में आईटी सेक्टर में काम करने वालों के लिए ये कहानी किसी मसालेदार बॉलीवुड ड्रामे से कम नहीं है। ऑफिस की राजनीति, चापलूसी, और 'मैं सब जानता हूँ' वाले बॉस — सब इसमें मिलेंगे। एक कप चाय के साथ पढ़िए, मज़ा आ जाएगा!

जब बॉस को टेक्नोलॉजी से ज़्यादा चापलूसी आती हो

कहानी शुरू होती है एक मेहनती, ईमानदार और अकेले ऐप बनाने वाले डेवेलपर से, जिसका मैनेजर (यहाँ हम उसे 'जॉन' कहेंगे) टेक्नोलॉजी में इतना अनाड़ी था कि जैसे किसी को चूल्हा न जलाना आता हो। जॉन का काम बस अपने ऊपर वालों को खुश करना था, बाक़ी टीम की चिंता उसे कम ही थी।

हमारे डेवेलपर साथी दिन-रात पसीना बहा रहे थे, डेडलाइन की तलवार सिर पर लटक रही थी, और संसाधन थे नहीं। ऐसे में अचानक एक दिन ऑफिस में मीटिंग बुलाई जाती है और पूरी डेवेलपर टीम को एक झटके में निकाल दिया जाता है — "अभी और इसी वक्त! सामान समेटो और आइडेंटिटी कार्ड जमा कराओ।"

नौकरी गई, अब क्या करे? लेकिन असली ट्विस्ट तो बाकी था!

सोचिए, अचानक आपकी नौकरी चली जाए तो क्या हाल होगा! डर, चिंता, गुस्सा — सबकुछ एक साथ। लेकिन साथ ही एक सुकून भी कि अब उस बेवकूफ बॉस का मुंह नहीं देखना पड़ेगा।

मज़ेदार बात देखिए, जैसे ही डेवेलपर अपना सामान समेट रहा था, जॉन साहब प्रकट हुए – "अगर तुम्हें कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने का ऑफर दें, तो क्या ऐप पूरा कर दोगे?" मतलब, अभी-अभी निकाला और अब फिर से उसी काम के लिए बुला रहे हैं! डेवेलपर थोड़े झिझके, लेकिन उस वक्त ‘हां’ कह दिया।

घर जाते ही रिज़्यूमे निकाली, नए जॉब्स के लिए हाथ-पैर मारने लगे। कुछ ही दिन बाद जॉन का फोन आया – "मैनेजमेंट ने मान लिया है, कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर लो, पैसे भी ठीक-ठाक हैं।"

जब मुंह से निकल गई 'डबल फीस' की बात – और बॉस की हालत ख़राब!

अब असली मज़ा यहीं है! हमारे भाई साहब के मुंह से अचानक निकल गया, "इतने में नहीं होगा, डबल पैसे चाहिए!" जॉन तो सुनकर पानी-पानी हो गया। लेकिन मजबूरी थी – ऐप बनाने वाला कोई और जानता ही नहीं था। जॉन ने बोला, "डबल? ये तो मुश्किल है...फिर भी पूछता हूँ।"

इधर डेवेलपर के मन में डर – "ये क्या कर दिया मैंने? कहीं सड़क पर न आ जाऊँ!" लेकिन किस्मत ने साथ दिया। एक नई कंपनी में इंटरव्यू हुआ, और सबकुछ बढ़िया लगने लगा। तभी जॉन का फिर से फोन – "मैनेजमेंट ने डबल पैसे मंज़ूर कर लिए! ऐप कब तक दे सकते हो?"

अब भाई साहब ने क्या किया? "सॉरी जॉन, अब मैं नहीं कर सकता, दूसरी जगह बात पक्की हो गई है।"

कम्युनिटी के जवाब: जनता का न्याय

रेडिट पर लोगों ने खूब मज़ेदार टिप्पणियाँ कीं। एक यूज़र ने कहा, "इसी मौके पर तो 10 गुना पैसे मांगने चाहिए थे! या तो जमकर पैसे मिलते, या वो लोग अपना सिर पीटते।"

दूसरे ने लिखा, "कभी-कभी सामने वाले को खुद गिरने देना ही अच्छा होता है। ऐसे मैनेजर के लिए मेहनत क्यों करें?"
एक और ने बड़ी काम की बात कही – "जब एक कर्मचारी को कॉन्ट्रैक्ट पर बुलाया जाता है, तो डबल पैसे लेना बिल्कुल जायज़ है, क्योंकि अब ऑफिस की सारी सुविधाएँ, बीमा, पीएफ वगैरह आपके खुद के जिम्मे होते हैं।"

किसी ने तो मज़ाकिया अंदाज में लिखा, "जॉन को अब समझ आ गया होगा कि टेक्नोलॉजी और चापलूसी में फर्क क्या है!"

अंत भला तो सब भला – और कंपनी का हश्र?

कहानी का क्लाइमेक्स भी जबरदस्त है। डेवेलपर को नई कंपनी में शानदार जॉब मिल गई, जहाँ एक दशक तक काम किया, दोस्त बनाए। उधर, जॉन की कंपनी का बुरा हाल हुआ – शेयर मार्केट में कंपनी का नाम-ओ-निशान मिट गया, स्टॉक -99% गिर गया, और कंपनी 'सस्पेंड' हो गई।

सबसे बढ़िया बात – कुछ हफ्तों बाद एक दोस्त ने बताया कि उसे उसी ऐप पर काम करने के लिए रखा गया है। हमारे डेवेलपर ने दोस्ती निभाई, उसे ऐप समझाया, ताकि वो भी मुश्किल में न फँसे।

सीख – अपने हुनर की कदर करना सीखो

इस कहानी में वो मज़ा है जो घर के पुराने किस्सों में मिलता है – थोड़ी चुटकी, थोड़ा ताना, और आखिर में सीख।

हमारे देश में भी ऑफिस की राजनीति, बॉस की चापलूसी, और कर्मचारियों की मेहनत का पूरा फायदा उठाने वाले लोग कम नहीं हैं। लेकिन ये कहानी बताती है – अगर आप अपने हुनर पर भरोसा रखते हैं और खुद की कद्र करना जानते हैं, तो वक्त आने पर आपके पास भी 'डबल' मांगने की हिम्मत आ जाती है!

आप क्या करते अगर आपकी जगह होते? कभी बॉस को ऐसा मज़ेदार जवाब दिया है? अपने किस्से नीचे कमेंट में जरूर सुनाएँ!


मूल रेडिट पोस्ट: It'll cost you more than that.