जब बदतमीज़ी करने वाले 'डोनट चोर' को मिली मीठी सज़ा
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो अपने गुस्से और बेसब्री में सारी सीमाएं लांघ जाते हैं। ऐसे ही एक दिन एक बेकरी में, डोनट्स के लिए लाइन में लगे एक सज्जन ने, सामने खड़े एक शांत ग्राहक को कुछ ऐसा कह दिया कि खुद ही उलझन में फँस गए। ये कहानी सिर्फ बदतमीज़ी की नहीं, बल्कि उस मीठे बदले की भी है, जो बिना शोर-शराबे के दे दिया गया।
बेकरी में 'मिठास' के पीछे की कड़वाहट
हमारे कहानी के नायक, जो स्वभाव से बेहद शांत और अंतर्मुखी (introvert) हैं, अपनी पसंदीदा डोनट्स चुनने में लगे थे। अब, भारत में भी मिठाई की दुकान हो या हलवाई की कतार, लोग अक्सर बेसब्र हो जाते हैं, लेकिन वहाँ मौजूद एक पचास के करीब उम्र वाले सज्जन तो मानो धैर्य खो बैठे। कुछ ही सेकंड में वे साँसें छोड़ते हुए, सामने वाले ग्राहक को ताना मार बैठे — "अरे मोटी...!" (यहाँ अंग्रेज़ी शब्दों का हिंदीकरण कर दिया गया है)।
कहानी सुनकर लगता है, जैसे किसी दिल्ली की मिठाई की दुकान पर चाशनी में डूबे रसगुल्ले के लिए झगड़ा हो रहा हो! लेकिन यहाँ बात थी डोनट्स की — और फिर ऐसी बदतमीज़ी भला कौन सह ले?
जब चुप्पी ही बन गई हथियार
हिंदी समाज में अक्सर कहा जाता है, "चुप्पी सबसे बड़ा जवाब है।" हमारे नायक ने भी सीधे-सीधे कुछ नहीं कहा, बल्कि उस ग्राहक को एक ठंडी नज़र से देखा और चुपचाप अपने काम में लग गए। लेकिन इस बार दिल में एक चिंगारी जल चुकी थी।
फिर, जैसे ही वो बदतमीज़ सज्जन डोनट्स ले रहे थे, हमारे नायक ने देखा कि वो बिना पैसे दिए ही डोनट्स खाने लगे। ऊपर से एक-एक डोनट कोट और पैंट में भी छुपा रहे थे! यह तो वही बात हुई — चोरी और सीना जोरी!
यहाँ एक कमेंट में किसी ने बिल्कुल सही लिखा — "जो दूसरों को 'मोटी' कह रहा था, असल में वही खुद डोनट्स ठूंस-ठूंस कर खा रहा था!"
मीठा बदला: बिना बोले, काम तमाम
अब भारतीय कहावत है — "जैसी करनी, वैसी भरनी।" हमारे नायक ने बिना कोई तमाशा किए, बेकरी के कर्मचारियों को जाकर धीरे से बताया, "भैया, देखिए वो आदमी वहाँ डोनट्स खा रहा है और कुछ अपने कपड़ों में भी छुपा रहा है।"
बस फिर क्या था, तीन-तीन कर्मचारी उस 'डोनट चोर' के पीछे हो लिए। सोचिए, कैसी मज़ेदार स्थिति रही होगी — मुंह पाउडर से सफेद, कपड़ों में डोनट्स के टुकड़े, और सामने कर्मचारी! एक कमेंट में किसी ने चुटकी ली, "अब तो उसके कपड़े भी सबूत बन गए होंगे!"
यहाँ एक और कमेंट में बड़ा मज़ेदार तंज था — "कभी-कभी सबसे शांत लोग सबसे बड़ा झटका दे जाते हैं।" सच है, बाहर से शांत दिखने वाले लोग अंदर से प्रेशर कुकर की तरह होते हैं — जब फटते हैं, तो सब याद रह जाता है।
कम्युनिटी का मीठा व्यंग्य और सीख
रेडिट कम्युनिटी के लोगों ने इस वाकये पर खूब मज़े लिए। किसी ने कहा, "डोनट्स की चोरी तो गुनाह है, ऊपर से इतनी बदतमीजी! उम्मीद है, बेकरी वालों ने उसकी जेब की भी तलाशी ली होगी।"
एक अन्य ने लिखा, "ऐसे लोग खुद का गुस्सा दूसरों पर निकालते हैं, असल में उन्हें खुद की हरकतें आईने में देखनी चाहिए।"
और सबसे बढ़िया कमेंट — "कभी शांत रहने वालों को परेशान मत करो, क्योंकि जब वो बदला लेते हैं, तो हँसी रोक पाना मुश्किल हो जाता है!"
निष्कर्ष: मीठा बदला, सीखा सबक
इस कहानी से यही सीख मिलती है — दूसरों को बिना वजह ताना मारना, बदतमीज़ी करना या चोरी करना, आखिर में खुद के लिए ही मुसीबत बन जाता है। और कभी-कभी, सबसे सीधा दिखने वाला इंसान भी ऐसा जवाब दे जाता है, कि अगले को पूरी ज़िंदगी याद रहता है।
तो अगली बार जब आप लाइन में हों, या किसी मिठाई की दुकान पर अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हों, तो धैर्य रखें और दूसरों की इज़्ज़त करें। क्या पता, कहीं कोई शांत सा दिखने वाला शख्स आपके लिए भी कोई मीठा बदला प्लान कर रहा हो!
आपका क्या कहना है? ऐसे किस्से आपने भी देखे या सुने हैं? नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें।
मिठास बाँटें — और बदतमीज़ी से दूर रहें!
मूल रेडिट पोस्ट: You wanted to get impatient and call me a fat ass bitch for taking too long to grab donuts ahead of you...