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जब बाइबिल ने कहा – “वाय-फाई मना है!” : एक तकनीकी समर्थन की अनोखी दास्तान

तकनीकी युग में निराशा का प्रतीक, एक बंद स्मार्टफोन की सिनेमाई छवि।
इस सिनेमाई दृश्य में, एक बंद स्मार्टफोन बेकार पड़ा है, जो अप्रत्याशित तकनीकी परेशानियों की निराशा को दर्शाता है। यह छवि उस अजीब स्थिति को बखान करती है जिसका सामना मेरे प्रेमी ने एक बंद फोन मिलने के बाद किया, जिसने हमारी तकनीकी निर्भरता से भरी ज़िंदगी में एक अप्रत्याशित मोड़ ला दिया।

हमारे देश में भी दफ्तरों में कभी-कभी ऐसे-ऐसे नियम बन जाते हैं कि सुनकर हंसी आ जाए। लेकिन ज़रा सोचिए, अगर आपके ऑफिस में वाय-फाई सिर्फ़ इसलिए न हो कि “धर्म में मना है!” तो? एक ऐसी ही कहानी आई है विदेश से, जिसने इंटरनेट की दुनिया में सबको चौंका दिया – और हंसी भी दिला दी!

“बाइबिल में वाय-फाई मना है!” – कैसे शुरू हुई कहानी

तो साहब, कहानी कुछ यूं है कि एक महाशय का मोबाइल फोन टूट गया। उन्होंने नई डिवाइस मंगवाई, लेकिन गलती से लॉक्ड फोन आ गया – जिससे नेटवर्क चल ही नहीं रहा था। अब जनाब एक गैर सरकारी गैर-शहरी वर्कशॉप में मेकेनिक हैं, और वहां के मालिक किसी पुराने मेनोनाइट चर्च से जुड़े हैं। बॉयफ्रेंड ने गर्लफ्रेंड को बता दिया कि, “अब मैं गैराज जा रहा हूं, वहां नेटवर्क नहीं चलेगा, बात नहीं हो पाएगी।”

लेकिन जैसे ही वे गैराज पहुंचे, मैसेज आ गया – “मैं पहुंच गया!” गर्लफ्रेंड हैरान! बोली – “अरे, नेटवर्क कैसे चल गया? क्या वहां भी वाय-फाई है?” जवाब मिला – “नहीं-नहीं, यहां तो वाय-फाई ही मना है, किसी तीसरे पार्टी सर्विस से नेटवर्क मिला है।”

यहां से शुरू हुआ असली सवाल – आखिर किस ग्रंथ में वाय-फाई मना है? बाइबिल में कहीं लिखा है क्या कि “तू वाय-फाई मत चलाना”? या फिर यह सिर्फ़ किसी पुरानी सोच की देन है?

तकनीक और धर्म: कभी मिक्स, कभी क्लैश

हम हिंदुस्तानियों के लिए भी धर्म और तकनीक का रिश्ता बड़ा दिलचस्प है। कभी-कभी हमारे बड़े-बुजुर्ग भी ‘नया-नया मोबाइल’ या ‘इंटरनेट’ देखकर माथा पकड़ लेते हैं। वहां, मेनोनाइट और अमीश जैसे समुदायों में तो तकनीक को लेकर अलग ही सोच है। एक यूज़र ने कमेंट किया, “मेनोनाइट्स और अमीश समुदायों को हर नई तकनीक से डर सा लगता है, जैसे प्रिंटर या वाय-फाई कोई काला जादू हो!”

दूसरे ने तो यहां तक कह दिया, “अगर तकनीक से समाज में मेल-जोल बढ़ता है, तो मंज़ूर है। लेकिन जो इंसान को अकेला, खुदगर्ज़ या आलसी बना दे, वो नहीं चाहिए।” मतलब, अगर वाय-फाई घर में सबको सोशल मीडिया में उलझा दे, तो धर्म को बुरा लगेगा – लेकिन वैन में सबको ले जाना, सबको मिलाना – वो सब मंजूर!

एक मज़ेदार कमेंट में, किसी ने लिखा, “अगर वाय-फाई शैतान का है, तो प्रिंटर तो उसके खास कारिंदे हैं!” और सोचिए, हमारे दफ्तर में भी यही हाल है – प्रिंटर कभी ठीक से चले तो समझो चमत्कार हो गया!

बाइबिल में वाय-फाई? या बस बहाना?

कई पाठकों ने बड़ा बढ़िया पॉइंट उठाया – “बाइबिल में तो वाय-फाई का नाम तक नहीं! दरअसल, कुछ धार्मिक लोग हर नई चीज़ को पुराने ग्रंथों से जोड़कर डर जाते हैं।” एक जगह किसी ने मस्ती में लिखा, “क्या पता, बाइबिल के किसी छुपे हुए पन्ने पर लिखा हो – पड़ोसी का वाय-फाई चुराना पाप है!”

कुछ लोगों ने बताया कि असल में यह ‘कम्युनिटी’ को बचाने का तरीका है। जैसे एक हिंदुस्तानी परिवार में दादी कहें – “फोन में मत घुसो, वरना पढ़ाई चौपट हो जाएगी!” वैसे ही, कई चर्च या धार्मिक समूह सोचते हैं – जितना साधारण, उतना अच्छा। अगर वाय-फाई घर-घर चला गया तो बच्चे बाहर खेलना छोड़ देंगे, सब इंटरनेट में खो जाएंगे – और समाज का मेल-मिलाप कम हो जाएगा।

किसी ने बड़ा दिलचस्प उदाहरण दिया – “मेनोनाइट्स वैन में सबको साथ ले जाते हैं, ताकि सब मिलकर जाएं, एक-दूसरे का ध्यान रखें। लेकिन कार से अकेले जाना – वो मंज़ूर नहीं!” सोचिए, हमारे यहां भी तो गांव के लोग बोले – “बस या ट्रैक्टर में सब बैठो, अकेले मत निकलो।” वही सोच!

धर्म, नियम, और टेक्नोलॉजी: हंसी में लपेटा गहरा सवाल

इस पूरे किस्से में एक बात साफ़ है – धर्म और तकनीक का रिश्ता बड़ा उलझा हुआ है। जैसे एक कमेंट में लिखा, “धर्म तो ऐसी किताब है जिसमें हर किसी को अपनी सुविधा के हिसाब से जवाब मिल जाता है – असली ‘अपना एडवेंचर चुनो’ बुक!”

कुछ लोग सख्ती से नियम बनाते हैं, तो कुछ लचीलापन दिखाते हैं। एक मजेदार कमेंट आया – “मेनोनाइट्स के यहां एक ही चीज़ सबको पसंद है – वॉशिंग मशीन! कपड़े हाथ से धोना छोड़ना भला किसे बुरा लगेगा?”

और हां, एक सज्जन ने चुटकी ली – “अगर बाइबिल में लिखा होता – हवा में बात करना पाप है – तो मोबाइल, रेडियो, सब बंद हो जाते!” लेकिन असलियत में, हर समाज अपने हिसाब से नियम बनाता है, और कभी-कभी वो इतने अजीब होते हैं कि हंसी आ जाए, लेकिन कहीं न कहीं उनकी जड़ें ‘समुदाय को बचाने’ में होती हैं।

निष्कर्ष: कहीं धर्म, कहीं तकनीक – असली मसाला तो तर्क में है!

तो दोस्तों, अगली बार जब आपके ऑफिस में IT टीम कहे, “यह वेबसाइट ब्लॉक है” या “यह डिवाइस नेटवर्क से नहीं जुड़ सकती”, तो सोचिए – कहीं ऊपर से कोई धार्मिक आदेश तो नहीं चल रहा! और अगर कभी बाइबिल या किसी धर्मग्रंथ का हवाला देकर कहा जाए, “यह तकनीक मना है”, तो मुस्कुरा लीजिए – इंसानों की सोच और तर्क का कोई जवाब नहीं!

आपका क्या अनुभव है? क्या आपके गांव, मोहल्ले या ऑफिस में कभी किसी अजीब ‘तकनीकी पाबंदी’ का सामना करना पड़ा है? कमेंट में ज़रूर बताइए, और शेयर कीजिए ये कहानी उन दोस्तों के साथ, जिनका वाय-फाई हमेशा ‘कनेक्टिंग...’ ही दिखाता है!


मूल रेडिट पोस्ट: The bible forbids Wi-Fi