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जब पूर्व कर्मचारी की लापरवाही पर मैनेजर ने लिया मीठा बदला: एक दफ्तर की अनोखी कहानी

एक खुदरा स्टोर में तनावपूर्ण क्षण, जहाँ एक पूर्व कर्मचारी की हरकतों के कारण संघर्ष उत्पन्न होता है।
यह फोटोरियलिस्टिक छवि एक खुदरा प्रबंधक की तीव्रता को दर्शाती है, जो एक परेशान करने वाले पूर्व कर्मचारी के परिणामों का सामना कर रहा है, और सकारात्मक कार्य वातावरण बनाए रखने की चुनौतियों को उजागर करती है।

दफ्तरों में काम करने वाले लोग जानते हैं, टीमवर्क और भरोसे से ही माहौल चलता है। लेकिन कभी-कभी कोई ऐसा 'खिलाड़ी' टीम में आ जाता है, जिसकी वजह से सबका सिर दर्द बन जाता है। आज की कहानी एक ऐसे ही कर्मचारी 'इजेकियल' (नाम बदला हुआ) की है, जिसने अपने आलसीपन और चालाकी से पूरी टीम को परेशान कर दिया। लेकिन कहते हैं न—'जैसी करनी वैसी भरनी'! उसके मैनेजर ने भी आखिरकार ऐसा बदला लिया, जिसे पढ़कर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी।

इजेकियल: दफ्तर का 'समस्या-पुरुष'

अब सोचिए, आपको एक ऐसी नौकरी मिले, जिसमें वेतन अच्छा है, काम भी ठीक-ठाक है, और बस मालिक की ये उम्मीद है कि आप ईमानदारी से अपना काम करें। हमारे कहानी के नायक यानी मैनेजर के लिए भी सबकुछ ठीक चल रहा था, जब तक इजेकियल नाम का ये नया कर्मचारी उनकी टीम में नहीं आया।

शुरू के दो दिन में ही सबको समझ आ गया कि इजेकियल 'शॉर्टकट' का उस्ताद है। उसे कोई भी काम पूरी तरह सीखने में रुचि नहीं थी। प्रोडक्ट की गारंटी (warranty) में वो जरूरी कागज़ी कार्रवाई छोड़ देता, जिससे बाद में कंपनी को नुकसान होता और किसी और को उसकी गलती सुधारनी पड़ती। अपने हिस्से के गलियारे (aisle) की सफाई-पहचान भी इजेकियल के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी—यानी, बॉस की नाक में दम!

जब मैनेजर उसे समझाते, तो वो बहस करने लगता—जैसे कि नौकरी के नियमों को अपने हिसाब से बदलवा लेगा! और तो और, ग्राहकों को भी गलत जानकारी देकर चीज़ें बेचता, जबकि टीम को कोई कमीशन भी नहीं मिलता था। यानी कामचोरी का 'ऊपर से नमक'!

बदले की शुरुआत: 'रेफरेंस' का खेल

कहते हैं, दफ्तर में किसी को क्रिसमस के पहले निकालना अच्छा नहीं लगता, तो मैनेजर ने इजेकियल को जनवरी तक रखने का सोचा था। लेकिन इजेकियल ने तो हद ही कर दी—जरा-सी बात पर छुट्टी, बहानेबाज़ी और जब मन करे तभी ऑफिस! आखिरकार, जब छुट्टियां भी खत्म हो गईं और उसकी हरकतें बढ़ गईं, तो उसे एक हफ्ते का नोटिस दे दिया गया।

अब सोचिए, जाते-जाते भी वो 'ध्यान बम' छोड़ गया—और-और गलत फॉर्म, अधूरे कागज़ात, जिनकी सफाई बाकी टीम को करनी पड़ी। उसकी आखिरी दिन की हरकत भी देखिए; बिना बताये लोडिंग डाक से दोपहर में ही चलता बना! लेकिन कैमरे सच बोलते हैं—मैनेजर ने उसी समय उसे मैन्युअली 'क्लॉक आउट' कर दिया।

असली मज़ा: 'सिफारिश' में मीठा ज़हर

अब आता है असली 'पेटी रिवेंज'! बिना पूछे, इजेकियल ने अपने नये जॉब एप्लिकेशन में मैनेजर का नाम रेफरेंस के तौर पर दे दिया। सोचिए, जिसने टीम का जीना हराम किया, उसी से उम्मीद कि वह आपकी तारीफ करेगा?

यहाँ मैनेजर की सूझबूझ काम आई। जब भी किसी कंपनी से इजेकियल के बारे में फोन आता, वो सीधा बुराई नहीं करता, बस 'हल्की-सी तारीफ' में ही सारी कहानी बता देता। जैसे एक कमेंट में किसी ने लिखा, "उसके जूते हमेशा बंधे रहते थे और वह अधिकतर पूरे वाक्य में बात करता था।" यानी, न तो तारीफ, न सीधी बुराई—बस 'फीकी प्रशंसा'!

कई हिन्दी ऑफिसों में भी ऐसी बातें होती हैं—कोई कुछ बुरा सीधे नहीं कहेगा, बस कह देगा, "हाँ, काम कर लेता था... जब करता था तो ठीक करता था!" और जब कंपनी वाले पूछें कि "क्या दोबारा भर्ती करेंगे?" तो लंबा सन्नाटा... फिर एक थकी हुई सांस! सब समझ जाते हैं।

एक और मज़ेदार कमेंट था, "अगर कोई जानना चाहे कि इजेकियल को दोबारा रखोगे?" तो जवाब—"हमारे यहां तो नहीं, बाकियों की मर्जी!"

सीख: दफ्तर की दुनिया में चालाकी कब उल्टी पड़ जाती है

इजेकियल के मामले में मैनेजर ने न तो सीधा झूठ बोला न बदनाम किया, बस सच को इतनी चतुराई से रखा कि अगला समझ जाए—इस बंदे को रखने का मतलब है सिरदर्द मोल लेना! कुछ पाठकों ने लिखा कि भारत-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी पुराने कर्मचारियों के बारे में बहुत सोच-समझ कर ही राय दी जाती है, ताकि कानूनी पचड़े न हों।

एक पाठक ने लिखा, "हमारे यहां तो बस इतना ही बताएंगे—'अमुक व्यक्ति ने इस तारीख से उस तारीख तक काम किया, और अब दोबारा रखने के योग्य नहीं।'" बाकी बातें कंपनी वाले खुद समझ जाते हैं। एक और पाठक ने मज़ाकिया अंदाज में लिखा, "अगर कोई पूछे कि मौसम कैसा है, तो कहूंगा—बहुत खराब! सब गड़बड़ कर दिया।"

निष्कर्ष: दफ्तर की राजनीति और 'मीठा बदला'—आपकी राय?

इस कहानी में छुपा संदेश साफ है—दफ्तर में चाहे जितना भी 'दिमाग' लगाइए, पर कामचोरी और दूसरों पर बोझ डालना अंत में खुद के लिए मुसीबत बन जाता है। और कभी-कभी, सबसे असरदार बदला होता है—सच और 'फीकी तारीफ' का सही इस्तेमाल!

क्या आपके साथ भी कभी किसी 'इजेकियल' जैसे सहकर्मी ने दफ्तर का माहौल बिगाड़ा है? या क्या आपने भी कभी किसी का 'मीठा बदला' लिया है? नीचे कमेंट में अपनी कहानी ज़रूर बताइए—शायद आपकी कहानी भी किसी के चेहरे पर मुस्कान ले आए!


मूल रेडिट पोस्ट: Revenge on ex-employee