जब पार्किंग में 'हुशियार' बना, तो मिला वैसा ही जवाब!
क्या आपने कभी किसी मॉल या ऑफिस की पार्किंग में ऐसे 'तीसमार खां' लोगों को देखा है जो दो गाड़ियों की जगह घेरकर, बड़ी ही बेशर्मी से अपनी गाड़ी पार्क कर देते हैं? सोचिए, अगर कोई ऐसा करे और उसी की चाल उसी पर उल्टी पड़ जाए, तो कैसा लगेगा? आज की कहानी कुछ ऐसी ही है, जहां बद्तमीज़ी का जवाब मिला उसी की भाषा में—और वो भी इतने मज़ेदार अंदाज़ में कि पढ़कर आप भी मुस्कुरा उठेंगे।
जब किताबों की खरीदारी की खुशी छीन ली गई
कहानी शुरू होती है एक आम से मॉल में, जहां लेखक (Reddit यूज़र u/No_Employee2238) किताबों का दीवाना है और Barnes and Noble जैसी किताबों की दुकान पर गया है। भारत में तो अक्सर हमें Crossword, Oxford या लोकल बुकस्टोर्स की याद आ जाती है, लेकिन अमेरिका में यह दुकान बड़ी मशहूर है।
खैर, जैसे-तैसे भीड़भाड़ वाली पार्किंग में एक प्यारी-सी जगह मिली और जनाब ने खुशी-खुशी अपनी गाड़ी लगा दी। किताबों पर ढेर सारा पैसा खर्च करके जब बुक्स के झोले लेकर वापस लौटे, तो देखा—अरे! किसी साहब ने अपनी गाड़ी इतनी सटाकर लगा दी कि ड्राइवर साइड से अंदर जाने की जगह छोड़ना तो दूर, बच्चा भी न घुस पाए!
अब क्या करें? बड़े झल्लाते हुए, जिम्नास्टिक की तरह पैसेंजर सीट से घुसना पड़ा। सोचिए, भारत में भी अकसर ऐसी पार्किंग मिलती है कि साइड मिरर फोल्ड करके, साँस रोककर गाड़ी में घुसना पड़ता है!
बदला भी ज़रूरी है, जनाब!
लेखक के मन में सवाल आया—"जब मैं परेशान होकर गाड़ी में घुसा, तो ये बद्तमीज़ आराम से क्यों निकले?" असली मज़ा तो तब है जब 'जैसे को तैसा' का जवाब मिले।
लेखक ने दांव खेला और इंतज़ार करने लगे कि शायद अगल-बगल की गाड़ियाँ पहले चली जाएँ। किस्मत देखिए, दो मिनट भी नहीं बीते कि एक और 'बुक-प्रेमी' अपने झोले के साथ आया और गाड़ी निकाल दी।
अब लेखक की बारी थी—उन्होंने फिर से अपनी गाड़ी को ऐसे पार्क किया कि उस बद्तमीज़ ड्राइवर को भी ड्राइवर साइड से घुसने में वही झमेले झेलने पड़े, जैसे खुद को हुए थे!
पार्किंग के जुगाड़ और 'जुगाड़ू' लोग
लेखक ने देखा कि वो 'महाशय', जो स्लिम नहीं थे और लगभग 5'11'' के लंबे-चौड़े थे, तीन मिनट तक गाड़ी में घुसने की कसरत करते रहे। लेखक तो छोटे कद के थे, तो आधे मिनट में घुस लिए थे!
इसी बात पर एक कमेंट में किसी ने मज़ाकिया अंदाज़ में लिखा—"कुछ लोगों को तो जिम्नास्टिक के लिए ओलंपिक भेज देना चाहिए!" वहीं, एक और ने कहा, "मैं तो ऐसी हरकतों वाले लोगों को देखता हूं तो अपनी पुरानी Maruti 800 को मिस करता हूँ—छोटे कद की गाड़ी, कहीं भी फिट!"
भारत की पार्किंग संस्कृति में भी ऐसे 'जुगाड़ू' दृश्य आम हैं—कभी कोई दो जगह घेर लेता है, कभी कोई लाइन के ऊपर-नीचे। एक पाठक ने अपनी कहानी साझा की, "ऑफिस में एक महिला हर रोज़ दो जगह घेरकर पार्क करती थी, तो हमने ट्रक और अपनी गाड़ी दोनों तरफ लगा दीं। बेचैन होकर उन्हें पैसेंजर साइड से घुसना पड़ा। कुछ दिन सुधरीं, फिर वही आदत!"
पार्किंग की बेशर्मी—हर जगह एक जैसी
पार्किंग की 'बदतमीज़ी' और उसका जवाब सिर्फ अमेरिका या भारत में नहीं, पूरी दुनिया में आम है। किसी ने लिखा—"मेरे अपार्टमेंट में दो लोग हमेशा लाइन के ऊपर पार्क करते हैं, बीच में जगह छोड़कर कि कोई न घुस पाए। एक दिन मैंने अपनी छोटी कार वहाँ घुसा दी और ट्रंक से बाहर निकला!"
कुछ ने तो बदला लेने के और भी देसी तरीके बताए—"गाड़ी के हैंडल में च्युइंगम चिपका दो, या झाड़ू की डंडी फंसा दो!" हालांकि ऐसे तरीकों से बचना ही बेहतर है, लेकिन गुस्सा और मज़ाक दोनों समझ में आते हैं।
एक पाठक ने मज़ेदार अनुभव साझा किया—"किसी की Mercedes थी, दो जगह पर पार्क कर रखी थी। मैंने अपनी गाड़ी बिल्कुल लाइन में लगा दी। वो महिला गाड़ी में ही थी, और मुझे डांटने लगीं। मैंने कहा—'मैं तो सही खड़ा हूं, आप पीछे जाकर ठीक से खड़ी हो जाएं!'"
निष्कर्ष: जैसा करोगे, वैसा भरोगे
इस कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है—'जैसी करनी, वैसी भरनी'। चाहे मॉल की पार्किंग हो या ऑफिस की, अगर दूसरों की असुविधा का कारण बनेंगे, तो कभी न कभी वही आपके साथ भी होगा।
लेखक ने जाते-जाते उस बद्तमीज़ को मुस्कराकर 'फिंगर' भी दिखा दी—भारतीय संदर्भ में कहें तो, एक तीखी नज़र और हल्की-सी मुस्कान ही काफी है!
तो अगली बार जब आप पार्किंग में गाड़ी लगाएं, याद रखिए—आपकी एक छोटी-सी चालाकी किसी और के लिए सिरदर्द बन सकती है, और कभी-कभी खुद आपके लिए भी!
आपका भी कोई ऐसा पार्किंग का किस्सा है? कमेंट में ज़रूर शेयर करें—शायद आपकी कहानी अगली बार हमारी ब्लॉग पोस्ट का हिस्सा बने!
मूल रेडिट पोस्ट: Wanna park like an a-hole? Get trapped like an a-hole.