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जब पार्किंग की लड़ाई में मिली 'वीडियो गेम' वाली मीठी बदला

एक सिनेमाई दृश्य में एक जोड़ा किराने की दुकान के बाहर समय का आनंद ले रहा है, जो संबंध और मस्ती को दर्शाता है।
इस सिनेमाई क्षण में, एक जोड़ा टारगेट पर हल्के-फुल्के अनुभव साझा कर रहा है, यह याद दिलाते हुए कि मज़ा वीडियो गेम से आगे भी मिल सकता है।

कहते हैं, "जहाँ चार बर्तन होते हैं, वहाँ खटकते भी हैं!" लेकिन क्या आपने कभी पार्किंग की जगह को लेकर हुई नोकझोंक में इतना मज़ेदार बदला सुना है, कि सुनकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाए? आज की कहानी बिल्कुल ऐसी ही है, जिसमें गुस्से की जगह चतुराई और बदले की जगह हल्के-फुल्के मज़ाक ने बाज़ी मार ली।

पार्किंग की पहली जंग: 'सिर्फ एक जगह की बात थी'

कहानी की शुरुआत होती है अमेरिका के Target स्टोर की पार्किंग से। हमारे नायक अपनी पत्नी के साथ कुछ सामान लेने आते हैं। जैसे ही एक गाड़ी अपनी पार्किंग छोड़ने लगती है, हमारे भाई साहब इशारा (indicator) देकर रुक जाते हैं – भारतीय सड़कों पर तो ये रोज़ का मामला है, है ना? तभी पीछे से एक तगड़ी गाड़ी Chrysler 300 आकर हॉर्न बजाती है और बिना तमीज़ के बाजू से घुस जाती है। गाड़ी वाले अंकल-आंटी का चेहरा ऐसा था, जैसे IPL में अपनी फेवरेट टीम ने छक्का मार दिया हो — मतलब, पूरे ताव में!

हमारे बंदे को गुस्सा तो आया, लेकिन वे समझदार निकले। चुपचाप दूसरी लाइन में गाड़ी लगा दी, क्योंकि "समझदार को इशारा काफ़ी है" — और Target में तो पार्किंग बहुत मिल जाती है, दिल्ली-मुंबई जैसी तंगी नहीं!

लेकिन असली मज़ा तो इसके बाद शुरू हुआ।

टारगेट के भीतर, बदले की 'छोटी' चाल

स्टोर के अंदर सब अपने-अपने काम में लग गए। लेकिन किस्मत की बात, दोनों ग्रुप फिर आमने-सामने आ गए। अब तक गुस्सा तो ठंडा हो गया था, पर दिल में वो 'चुभन' बाकी थी, जो हर भारतीय को महसूस होती है जब कोई उसकी जगह हथिया ले।

घटना की सबसे मज़ेदार बात तब हुई, जब हमारे नायक ने देखा कि उन बदतमीज़ लोगों की ट्रॉली अकेली छोड़ दी गई थी — उसमें एक वीडियो गेम (वो भी लॉक्ड प्लास्टिक बॉक्स में) और वैलेंटाइन्स चॉकलेट्स रखे हुए थे। बस, यहीं दिमाग ने घंटी बजाई: 'अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे!' बिना ज़्यादा सोच-विचार, ट्रॉली से गेम और एक चॉकलेट की थैली निकालकर, बाकी सामान को थोड़ा इधर-उधर कर दिया।

अब सोचिए, भारत में होते तो शायद कोई चुपचाप आलू-प्याज का पैकेट उठा लेता, लेकिन यहाँ तो वीडियो गेम और चॉकलेट — दोनों दिल के करीब!

कम्युनिटी का रिएक्शन: "ये बदला नहीं, मास्टरस्ट्रोक था!"

Reddit की जनता, जिसे हम भारतीय भाषा में 'जनता जनार्दन' कहते हैं, इस किस्से पर फिदा हो गई। एक कमेंट में किसी ने लिखा, "काश उन लोगों को पता चलता कि ये बदला आपने लिया!" — वैसे भारतीय मोहल्लों में तो अगले दिन ही पता चल जाता, किसने क्या किया!

एक और पाठक ने मज़ेदार तंज कसा, "अगर आपने गेम की जगह दूसरी कंसोल का गेम डाल दिया होता, तो मज़ा दोगुना हो जाता – जैसे PlayStation की जगह Xbox का गेम।" अरे वाह, ये तो वैसे ही हो गया जैसे समोसे में आलू की जगह मटर भर दी हो!

एक कमेंट ने तो शेरो-शायरी का तड़का भी लगा दिया: "गुलाब लाल हैं, बैंगनी फूल भी हैं, मेरा गेम किसने चुराया, मुझे लगता है... तुम ही थे!"

और किसी ने कहा, "ये तो वही हुआ – खेलो बेवकूफ़ों वाले खेल, पाओ बेवकूफ़ों वाला इनाम!" वैसे, ये लाइन तो हमारे यहाँ भी खूब चलती है — 'जैसा करोगे, वैसा भरोगे!'

छोटी बदला, बड़ा सबक

सबसे मज़ेदार बात ये रही कि उन लोगों को कैशियर पर भी पता नहीं चला कि गेम और चॉकलेट गायब हैं। कल्पना कीजिए, घर पहुँचकर जब सब Pizza और बीयर के साथ वीडियो गेम खेलने बैठें — और गेम ही गायब! जैसे शादी में मिठाई की टोकरी खुली और अंदर से रसगुल्ला गायब निकल आए।

कुछ लोगों ने कहा, "ये हरकत थोड़ी बचकानी थी," तो किसी ने इसे 'प्योर पेटी रिवेंज' का नाम दिया। लेकिन एक कमेंट में सच कहा गया – "किसी का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन आपके मन को ठंडक ज़रूर मिली।"

भारतीय संदर्भ में: हमारी 'जुगाड़ू' बदले की परंपरा

सोचिए, अगर यही घटना भारत में होती — तो शायद कोई चुपचाप उनकी ट्रॉली में मुफ़्त के ऑफर वाले प्रोडक्ट्स भर देता, या फिर "सबसे छोटा साइज का कंडोम" या "डायपर" डाल देता, ताकि काउंटर पर सब हंस पड़ें! वैसे किसी ने कमेंट में यही सुझाव भी दिया कि अगली बार ट्रॉली में 'एडल्ट डायपर' डाल देना चाहिए।

असल में, हमारी संस्कृति में 'बदला' हमेशा सीधे-सपाट नहीं होता, उसमें थोड़ा मज़ाक, थोड़ा जुगाड़ और बहुत सारा 'मिर्च-मसाला' होता है। यही वजह है कि इस किस्से ने इतनी लोकप्रियता हासिल की — क्योंकि हम सबके अंदर एक छोटा सा 'पेटी रिवेंजर' छुपा बैठा है!

निष्कर्ष: आपकी भी कोई 'पेटी रिवेंज' कहानी है?

तो दोस्तों, अगली बार कोई आपकी जगह छीन ले, लाइन में घुस जाए या आपकी 'चाय' चुपचाप पी जाए — सीधा लड़ने की बजाय थोड़ा सा दिमाग लगाइए, और 'छोटी सी बदला' लेकर मन को शांति दीजिए। वैसे, आपके साथ कभी ऐसी कोई 'पेटी रिवेंज' घटना हुई है? नीचे कमेंट करके ज़रूर बताइए — कौन जाने, अगली वायरल कहानी आपकी ही हो!

"बदला बड़ा हो या छोटा, मज़ा तभी है जब दिल को सुकून मिले!"


मूल रेडिट पोस्ट: Have fun without your videogame