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जब पापा ने कम्यूनियन पर भूल की, तो बेटे ने मासूम बदला लिया

एक जॉर्जियाई चर्च में कम्यूनियन सेवा का नेतृत्व करते पादरी की सिनेमाई छवि।
एक शांत क्षण, जो सिनेमाई शैली में कैद किया गया है, जिसमें पादरी एक गर्म जॉर्जियाई चर्च में कम्यूनियन सेवा का मार्गदर्शन कर रहे हैं, इस पवित्र अनुष्ठान के दौरान गहरी आध्यात्मिक महत्व और सामुदायिक संबंध को दर्शाते हुए।

कभी-कभी हमारा सबसे प्यारा बदला भी इतना छोटा और मासूम होता है कि हँसी आ जाए। क्या आपने कभी अपने परिवार में किसी से छोटा सा बदला लिया है? आज की कहानी अमेरिका के जॉर्जिया राज्य से है, जहाँ एक 14 साल के बच्चे ने अपने पादरी पिता से ऐसा ही प्यारा सा ‘पेटी रिवेंज’ लिया — वो भी चर्च की एक खास रस्म के दौरान!

पारिवारिक चर्च और मासूम बदला

इस कहानी के नायक हैं एक 14 वर्षीय नॉन-बाइनरी (NB) बच्चा, जिनके पिता (41 वर्षीय पुरुष) जॉर्जिया, अमेरिका के एक चर्च के पादरी हैं। अब, जॉर्जिया नाम सुनकर कहीं आप सोवियत संघ वाला “जॉर्जिया” तो नहीं समझ बैठे? लेखक ने खुद भी इसी को लेकर मज़ाक किया — "अगर आप अमेरिका के बाहर से हैं और सोच रहे हैं कि 'जॉर्जिया' क्यों कहा गया, तो जान लें, अमेरिका में भी एक राज्य है जॉर्जिया!"

हर महीने के पहले रविवार को इनके चर्च में कम्यूनियन (ईसाई धर्म का विशेष अनुष्ठान, जिसमें रोटी और अंगूर का रस बांटा जाता है) होता है। पिछले महीने, पापा ने वादा किया था कि इस बार बेटा कम्यूनियन में मदद करेगा। लेकिन महीने बाद जब वह दिन आया, पापा ने सब कुछ भूल गए और किसी और को बुला लिया।

अब हमारे देश में भी ऐसी घटनाएँ आम हैं — मम्मी-पापा कुछ वादा करें, फिर भूल जाएँ, और बच्चे का दिल टूट जाए! हर घर की कहानी है न?

बदले की शुरुआत: छोटा सा कदम, बड़ी बात

अब बच्चा तो बच्चा ही है! हमारे यहाँ भी कहते हैं — "बच्चे की मुस्कान में भी बदला छुपा हो सकता है!" इस बच्चे ने बदला लेने का तरीका ढूँढा। चर्च की हर शाम को, प्रार्थना के बाद, सब लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़कर गाते हैं, जैसे हमारे यहाँ घर की आरती या भोजन से पहले प्रार्थना होती है।

आमतौर पर, बेटा अपने पापा का हाथ पकड़ता है, लेकिन इस बार उसने टशन दिखाया — माँ का हाथ पकड़ लिया! और अपने दोनों छोटे भाई-बहनों (12 साल की बहन और 10 साल का भाई) को अपने और पापा के बीच में खड़ा कर दिया। अब पापा बेचारे, सामने खड़े होकर सिर्फ देख सकते थे। और ये तो बस शुरुआत थी!

‘हैट’ का खेल और चर्च की मस्ती

पापा के सिर के बाल ज्यादा सजे-धजे नहीं रहते, इसलिए वह अकसर हैट पहनते हैं — जैसे हमारे यहाँ कोई चचा गमछा पहन लें! हमारे नायक ने मौके का फायदा उठाया — पापा की हैट छीन ली और उनका बाल बिगाड़ दिया। सोचिए, चर्च के पादरी का बाल बिखरा हुआ, सबके सामने! “पेटी रिवेंज” का असली मज़ा तो यहीं है — ना कोई चीख-चिल्लाहट, ना कोई बड़ी सज़ा, बस हल्की सी शरारत!

इसी पर एक कमेंट करने वाले सदस्य ने मज़े लेते हुए लिखा — “तो पापा की ‘हैट-हेड’ वाली हालत हो गई?” खुद लेखक (OP) ने जवाब दिया, “हाँ, लेकिन खास मौके पर ही वो बाल सँवारते हैं।”

एक और सदस्य ने तंज कसा, “ये बदला तो इतना प्यारा है कि इसे ‘चाइल्डिश रिवेंज’ कहा जाना चाहिए!” सच कहें, भारतीय परिवारों में भी ऐसे ‘चाइल्डिश रिवेंज’ रोज़ होते रहते हैं — मम्मी की साड़ी में गाँठ बाँधना या पापा के जूते छुपा देना!

कम्यूनिटी की राय: हँसी, मज़ाक और अपनापन

इस कहानी पर Reddit कम्युनिटी में भी खूब मज़ाक उड़ाया गया। एक सदस्य ने तो अमेरिका के लोगों पर ही तंज कस दिया — “अमेरिका के लोग बाहर की दुनिया के बारे में कम जानते हैं!” जैसे हमारे यहाँ चुटकुले चलते हैं — “दिल्ली वाले सिर्फ दिल्ली जानते हैं।”

किसी ने ये भी लिखा, “लिटर सिब्लिंग्स” (गलती से लिखा गया था, असल में ‘लिटिल सिब्लिंग्स’ होना था), तो किसी ने मज़ाक में पूछा, “कहीं छोटे भाई-बहन पिल्ले तो नहीं?” खुद लेखक ने हँसते हुए जवाब दिया — “धन्यवाद, गलती सुधारी दी है!”

कुछ ने धार्मिक नियमों को लेकर सवाल किए — “चर्च में 14 साल के बच्चे को कम्यूनियन में कैसे मदद मिल गई?” लेखक ने बताया, “पापा पिछले कुछ महीनों से मदद करा रहे हैं, हमारे यहाँ बच्चों को भी ये मौका मिलता है।” भारतीय संस्कृति में जैसे बच्चों को पूजा में आरती देने का मौका मिल जाता है, वैसे ही!

और सबसे मज़ेदार कमेंट — “तुमने बस उनके बाल बिगाड़े और हाथ नहीं पकड़ा, बस इतना ही? वाह! क्या बदला है!” लेखक ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मुझे तो यही सबसे सही जगह लगी अपनी कहानी शेयर करने की!”

निष्कर्ष: हर घर की छोटी-छोटी कहानियाँ

कहानी का मज़ा ये है कि ये सिर्फ एक Reddit पोस्ट नहीं, बल्कि हर ऐसे परिवार की कहानी है, जहाँ बच्चे और पेरेंट्स के बीच प्यार, शरारत और थोड़ी-सी नाराज़गी रोज़ चलती रहती है। ये मासूम बदले ही तो हमारे रिश्तों में मिठास लाते हैं — पापा की टोपी छीनना हो या मम्मी को चाय में ज्यादा चीनी डालकर चिढ़ाना!

क्या आपके घर में भी कभी किसी ने ऐसा मासूम बदला लिया है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए — “मेरा भी बदला सुनिए!” शायद अगली बार आपकी कहानी भी यहाँ पढ़ने को मिले!


मूल रेडिट पोस्ट: Communion.