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जब पड़ोसी से नहीं, कीचड़ से हुई जंग: एक अनोखा बदला

बगीचे की मिट्टी में खुदाई करता हुआ कुत्ता, दो घरों के बीच फेंस से पौधों और फूलों को नुकसान पहुंचा रहा है।
पड़ोसी के कुत्ते द्वारा बगीचे में किए गए नुकसान का जीवंत चित्रण, जो हमारे दैनिक जीवन में आने वाली अप्रत्याशित चुनौतियों को उजागर करता है।

पड़ोसियों के साथ अच्छे रिश्ते बनाना कौन नहीं चाहता? लेकिन क्या करें जब उनके शौक़ आपके सिर चढ़ जाएँ! ऐसी ही एक मज़ेदार और थोड़ी चुटीली कहानी है Reddit पर वायरल हुई — जिसमें न तो कोई लड़ाई हुई, न ही बहस, लेकिन फिर भी सबक ऐसा मिला कि पड़ोसन की हँसी हमेशा के लिए गायब हो गई।

एक प्यारा बगीचा, और पड़ोसी का ‘शरारती’ कुत्ता

इस कहानी की नायिका (या कहें, शिकार) है एक सज्जन व्यक्ति, जो अपने घर के पास के बगीचे में बड़े प्यार से पौधे लगाते थे। उनकी बगल में रहने वाली महिला के पास एक बड़ा सा कुत्ता था। रोज़ सुबह वह उसे बग़ैर पट्टे के, बाड़ के पास छोड़ देती थी — और उस कुत्ते की मस्ती का इलाका था हमारे सज्जन का बगीचा!

धीरे-धीरे पौधों की पत्तियाँ कुतर गईं, फूल गायब, और मिट्टी बिखर गई। पहले तो उन्हें लगा कि शायद गलियों के आवारा कुत्ते या बच्चे शरारत कर रहे हैं। लेकिन एक दिन काले रंग का सबूत सामने था — पड़ोसन अपने फोन पर व्यस्त थी, और उसका कुत्ता बाग़ में खुदाई कर रहा था।

जब उन्होंने शांति से पड़ोसन से शिकायत की, तो जवाब मिला, “कुत्ते तो ऐसा ही करते हैं!” और हँसी में टाल दिया। इसके बाद भी कोई बदलाव नहीं आया — पौधे फिर बिगड़े, बाड़ फिर टूटी। अब भला, ऐसी बेपरवाह हँसी का क्या इलाज?

जब शब्द नहीं चले, तो कीचड़ ने अपना जादू दिखाया

अब बात आई असली ‘पेट्टी रिवेंज’ (हल्का-फुल्का बदला) की। बहस-मुबाहिसों से थककर, हमारे सज्जन ने एक अनोखा तरीका ढूंढा। उन्होंने पौधों को रोज़ तड़के ज़्यादा पानी देना शुरू कर दिया — इतना कि बाड़ के पास की ज़मीन घंटों तक कीचड़ भरी रहती थी।

कुछ दिन बाद वही हुआ जिसका डर था, या यूँ कहें — जिसका इंतज़ार था! पड़ोसन का कुत्ता आया, और फिसलते-फिसलते पूरे कीचड़ में सन गया। अब सफ़ाई का सारा झंझट पड़ोसन के सिर — कुत्ते को नहलाओ, फर्श साफ़ करो, और ऊपर से पालतू जानवर की बदमाशी भी झेलो!

एक बार नहीं, ये कारनामा कई बार हुआ। Reddit पर एक कमेंट में किसी ने बिल्कुल दादी की कहावत याद दिलाई — “अकल ठिकाने तभी आती है जब खुद पर बीतती है।”

Redditिया पंच: हँसी गई, पौधे बचे!

इस कहानी पर Reddit के लोगों ने भी खूब ठहाके लगाए। किसी ने कहा, “ये सबसे बेगुनाह बदला है, जो मैंने आज तक देखा है!” तो किसी ने दार्शनिक अंदाज़ में लिखा, “कई बार शब्दों से नहीं, हालात से ही समझ आती है।”

एक मज़ेदार कमेंट था: “अरे, पड़ोसन को अब पता चल गया कि कीचड़ भी वही करता है, जो कुत्ते करते हैं!”
वहीं किसी ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में सुझाया, “अगर कीचड़ से भी काम न चलता, तो गोबर डाल देते — फिर कुत्ता और उसकी मालकिन, दोनों ही उस इलाके से दूर भागते!”

बातचीत में एक और कमेंट बहुत लोकप्रिय हुआ — “कोई झगड़ा नहीं, कोई शोर-शराबा नहीं। बस शांति और पौधों की सुरक्षा।”
किसी ने ये भी याद दिलाया: “कुत्ता तो शायद कीचड़ में खेलकर मज़े कर रहा होगा — असली सफ़ाई का झंझट तो पड़ोसन के हिस्से आई!”

बिना बोले सिखाया सबक: पड़ोसन की हँसी कहाँ गई?

कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है आख़िरी पंक्ति — “मैंने फिर कभी कुछ नहीं कहा, और उसने भी फिर कभी हँसी नहीं उड़ाई।”
रेडिट पर तो इस लाइन ने धूम मचा दी! लोगों ने लिखा — “ये पंक्ति तो किसी बॉलीवुड फिल्म का क्लाइमैक्स लगती है!”

वास्तव में, कई बार हम सोचते हैं कि समस्या का हल सिर्फ़ बहस या शिकायत में है। लेकिन कभी-कभी ‘पेट्टी रिवेंज’ यानी हल्के-फुल्के मज़ाकिया बदले भी बड़े काम के होते हैं — और किसी का अहंकार चुपचाप, मज़ाकिया अंदाज़ में शांत हो जाता है।

आपकी राय?

तो पाठकों, क्या आपने भी कभी किसी पड़ोसी को बिना बोले ऐसा कोई मज़ेदार सबक सिखाया है? या आपके पास कोई देसी जुगाड़ है, जिससे आप बिना बहस के समस्या सुलझा लेते हैं?
नीचे कमेंट में ज़रूर लिखिए — आखिरकार, पड़ोसीपन में थोड़ा हास्य, थोड़ी चतुराई और ढेर सारी समझदारी ज़रूरी है!

पढ़ने के लिए धन्यवाद — और अगली बार बगीचे में पौधों के साथ-साथ कीचड़ का भी ध्यान रखें, क्या पता कब ज़रूरत पड़ जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: I didn’t fight with my neighbor. Mud did