जब पड़ोसी बना सिरदर्द, और ‘बार्नी’ बना हथियार: एक अनोखी बदला-कहानी
पड़ोसी अच्छे हों तो घर स्वर्ग जैसा लगता है, वरना हर दिन किसी सीरियल का एपिसोड। आज की कहानी एक ऐसे ही पुराने मकान की है, जिसे डुप्लेक्स में बदल दिया गया है। यहाँ रहने वाला एक युवक, जो घर से काम करता है, आमतौर पर अपने पड़ोसियों से खुश है – सब मिलनसार, हँसमुख, और हमेशा बातचीत के लिए तैयार।
लेकिन हर कहानी में एक खलनायक तो होता ही है। और यहाँ ये खलनायक है – एक बूढ़ी दादी का नाकारा पोता, जिसकी वजह से पूरी बिल्डिंग का चैन छिन गया।
जब सब अच्छा था, फिर आया तूफ़ान
इस मकान में पाँच साल से रहने वाले युवक की ज़िंदगी तबतक सुकून से चल रही थी जबतक दूसरी मंज़िल पर एक बुजुर्ग महिला, उसके दो प्यारे बिल्लियों और उसका पोता नहीं आए। दादी तो बेहद दयालु, हँसमुख और बेहद कमजोर सी दिखती हैं – मानो एक तेज़ हवा भी गिरा दे। लेकिन पोता? एकदम उल्टा! नशे का आदी, शराबी, और गुस्सैल – मानो ‘रंगीला’ फिल्म का खलनायक।
आठ महीनों में जितनी बार पुलिस आई, उतनी बार तो शायद मोहल्ले में शादी-ब्याह भी नहीं होते। शुरू-शुरू में युवक ने भी संयम रखा – सबकी ज़िंदगी में मुश्किलें होती हैं, सोचकर माफ़ किया। लेकिन एक दिन दादी की आँख पर काला निशान दिखा, और वो वही पुरानी ‘दरवाजे से टकरा गई’ वाली कहानी सुनाने लगी, तो युवक का दिल दहल गया।
'बार्नी' का बदला: बच्चों के गानों से नशेबाज़ को सबक
कुछ समय के लिए पोता गायब हो गया – शायद जेल या नशा मुक्ति केंद्र में। पूरा माहौल शांत और सुखद! बालकनी गार्डन में बैठकर युवक ने चैन की साँस ली। लेकिन, जैसा फिल्मों में होता है, ‘विलेन’ फिर लौट आया – और फिर से वही चीख-पुकार, गाली-गलौच, और दिन-रात का झगड़ा शुरू।
अब बाथरूम के वेंट से सबकुछ साफ़-साफ़ सुनाई देता था। एक दिन सुबह-सुबह युवक का सब्र का बाँध टूट गया। उसने अपनी ब्लूटूथ स्पीकर में ‘बार्नी’ का बच्चों वाला थीम सॉन्ग (यानी “I love you, you love me…”) फुल वॉल्यूम में बजा दिया और स्पीकर को वेंट के पास रख दिया। दादी को तो शायद कम सुनाई देता, पर पोता बिलकुल साफ़-साफ़ सुनता। अब हर बार जब पोता बवाल करे, उसे सीधे ‘बार्नी’ के गाने की धुन सुनाई देगी!
एक पाठक ने मज़ेदार सुझाव दिया – “अगर बार्नी से असर कम हो, तो बेबी शार्क चला दो!” किसी ने तो यहाँ तक कह दिया कि ‘लैम्पचॉप’ का “This Is The Song That Never Ends” 10 घंटे तक चला दो – सोचिए, कैसा लगेगा अगर आपके घर में लगातार बच्चों के गाने गूंजते रहें!
क्या बच्चों के गानों से सचमुच बदल सकता है कुछ?
कई पाठकों ने युवक की इस ‘पेटी रिवेंज’ (छोटी बदला) की तारीफ की – एक ने लिखा, “यही वो छोटी-छोटी हरकतें हैं जो असली मजा देती हैं!” तो कोई बोला, “अब तो शैतान भी शर्मा जाए!” कुछ लोग तो अपनी कहानी भी लेकर आ गए – “हमारे घर में बच्चे नहीं, लेकिन बेबी शार्क का जादू ऐसा है कि पति खुद गुनगुनाने लगते हैं।”
लेकिन, सब खुश नहीं थे। कईयों ने चिंता जताई – “ये दादी के लिए असली खतरा है, सिर्फ गाने बजाने से काम नहीं चलेगा। पुलिस को बुलाओ, बुजुर्ग सुरक्षा सेवा को खबर करो।” कुछ ने तो सीधा कहा – “इससे गुस्सैल पोता और हिंसक हो सकता है, और गुस्सा दादी पर निकाल सकता है। जरा सोच-समझ के कदम उठाओ।”
असल में, युवक ने पुलिस को कई बार खबर की, लेकिन दादी खुद पोते के खिलाफ शिकायत नहीं करतीं। यही असली भारतीय परिवारों जैसी दुविधा – बुजुर्ग, चाहे कितना भी कष्ट सह लें, अपनों को घर से निकालना नहीं चाहते। युवक और मकान मालिक मिलकर मामले की पूरी लिस्ट तैयार कर रहे हैं, जिससे पोते को इलाज या जेल भेजा जा सके।
समाज की जिम्मेदारी और दिलचस्प टिप्पणियाँ
कई पाठकों ने सामाजिक जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाया – “पड़ोसी की सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी है। जब भी झगड़ा हो, पुलिस को जरूर बुलाओ।” कुछ ने सलाह दी – “दादी से अकेले में बात करो, भरोसा दिलाओ कि वो अकेली नहीं हैं। मदद के लिए हाथ बढ़ाओ – जैसे किराना लाने में मदद।”
एक पाठक ने कहा, “हमारे देश में भी कई बार बुजुर्गों के साथ ऐसी घटनाएँ होती हैं, लेकिन वो चुप रहते हैं। अगर कोई पड़ोसी सामने आकर खड़ा हो जाए, तो बहुत फर्क पड़ता है।”
लेकिन मज़ेदार कमेंट्स की भी कमी नहीं थी – “अगर कभी कोई पड़ोसी परेशान करे, तो गूगल कीजिए ‘बच्चों के सबसे झल्लाने वाले गाने’, और बजा दीजिए!” किसी ने तो ये तक कह डाला – “अगर पोता जेल वापस चला जाए, तो यही असली बदला होगा!”
निष्कर्ष: छोटे-छोटे कदम, बड़ी सोच
कहानी में ‘बार्नी’ और ‘बेबी शार्क’ जैसे गानों का इस्तेमाल थोड़ा मज़ाकिया जरूर है, लेकिन असल मुद्दा गंभीर है – बुजुर्गों की सुरक्षा और समाज की जिम्मेदारी। कभी-कभी हल्के-फुल्के बदले से गुस्सैल लोगों की नाक में दम किया जा सकता है, लेकिन जब बात किसी की जान और इज़्ज़त की हो, तो सही कदम उठाना ज़रूरी है।
क्या आपके पड़ोस में भी कोई ऐसा सिरदर्द है? आप ऐसी स्थिति में क्या करते? अपने विचार नीचे कमेंट में जरूर बताइए! और हाँ, अगली बार अगर कोई आपको तंग करे, तो ‘बार्नी’ का गाना बजाने से पहले एक बार पुलिस को जरूर याद कर लीजिए।
मूल रेडिट पोस्ट: I love you, you love me ...