जब पड़ोसी ने सड़क को अपनी जागीर समझ लिया: एक चुटीली पड़ोस की जंग
पड़ोसियों के साथ रहना कभी-कभी कटहल खाने जैसा होता है – ऊपर से सख्त, अंदर से चिपचिपा! कभी त्योहारों में मिठाई का डिब्बा, तो कभी दरवाजे पर कचरे की थैली। लेकिन जब पड़ोसी अपनी ज़िद पर उतर आए, तो क्या किया जाए? आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें सड़क, पार्किंग और पड़ोसियों का घमासान है – और मसालेदार ट्विस्ट भी!
"मेरी सड़क, मेरा हक!" – पड़ोसी की ज़िद
हमारे देश में भी आपने देखा होगा कि मोहल्ले की सड़क अचानक किसी की जागीर बन जाती है। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं, जैसे सड़क उनके दादा की विरासत हो! Reddit यूजर u/spookyookykittycat के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वो जब से नए घर में शिफ्ट हुए, बाईं तरफ़ के वृद्ध दंपती ने मानो सड़क को अपनी निजी पार्किंग बना लिया। उम्र ज़रूर 70 पार, पर अकड़ और घमंड कम नहीं!
शुरुआत में तो सब ठीक-ठाक था, लेकिन बात तब बिगड़ी जब एक बार मेहमान की गाड़ी उनके घर के सामने 24 घंटे के लिए खड़ी हो गई। बस, वृद्ध महाशय का पारा सातवें आसमान पर! जगह की कोई कमी नहीं थी, फिर भी "यह मेरी जगह है" की तानाशाही।
"पुलिस बुला लेंगे!" – डराने-धमकाने का फॉर्मूला
अब हमारे यहाँ भी बहुत लोग होते हैं जो छोटी-छोटी बात पर पुलिस बुलाने की धमकी देते हैं। Reddit पोस्ट में भी पड़ोसी ने यही किया – सुबह-सुबह दरवाज़े पर आकर बोले, "हमने पुलिस बुला ली थी, टिकट लगवाने वाले थे, पर हमने कहा पहले बात कर लें।" अब भला, अपने ही घर के सामने सही-सलामत गाड़ी खड़ी है, उसमें क्या गुनाह?
लेखक ने भी गज़ब जवाब दिया – गाड़ी और करीब लगा दी, अब एक फुट का फासला! जाते-जाते कैमरे के सामने शांति का इशारा (peace sign) – मानो कह रहे हों, "बाबूजी, शांति रखिए!" फिर खुद पुलिस को कॉल करके सच जान लिया – पुलिसवाले भी हँसते-हँसते बोले, "कोई जुर्म नहीं, बस ये पड़ोसी झगड़ालू हैं।"
पड़ोसियों की राजनीति और मोहल्ले का सच
कई बार पड़ोसी अपनी उम्र या बीमारी का बहाना बनाकर दूसरों को डराने की कोशिश करते हैं। जैसा एक कमेंट में लिखा – "इनकी उम्र की वजह से डर नहीं, बस कार का ध्यान रखना, क्योंकि ऐसे लोग चुपके से नुकसान कर सकते हैं।" एक अन्य पाठक ने तो व्यंग्य में लिखा, "इनकी सेहत के लिए अच्छा नहीं, शायद ब्लड प्रेशर बढ़ाने में ही सुकून मिलेगा!"
कुछ लोगों ने सलाह दी – "अपने घर के सामने कैमरा लगवा लो, ताकि अगर कुछ ऊल-जुलूल हो, तो सबूत रहे।" भारतीय समाज में भी अब मोहल्ले में सीसीटीवी आम हो चले हैं, खासकर ऐसे पड़ोसियों के चलते। एक और कमेंट ने तो कह दिया, "सड़क सबकी है, कोई भी पार्क कर सकता है, बस कानून का ध्यान रखना चाहिए।"
क्या हर पड़ोसी ऐसा ही होता है?
नहीं! Reddit के बहुत से पाठकों ने यही तसल्ली दी – "हर कोई ऐसा नहीं होता, ये तो सिर्फ कुछ चंद लोग हैं जिनकी दुनिया पार्किंग तक सिमट गई है।" एक पाठक ने तो मज़े में लिखा, "मोहल्ले का ऐसा बुज़ुर्ग था, जो खिड़की से रोज़ देखता कि कौन उसकी 'जमीन' पर पार्किंग कर रहा है। उसकी पत्नी और बेटा बहुत अच्छे थे, लेकिन उनकी वजह से सबका जीना दुश्वार था।"
लेखक ने भी लिखा, "मैं तो वर्क फ्रॉम होम करता हूँ, समय है, इसलिए इनकी जिद्द का मुकाबला करूंगा। वैसे भी, पुलिस को झूठी शिकायतें करते रहे, तो खुद ही फँसेंगे।"
नतीजा? धैर्य और हक की जीत!
इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है – अपने अधिकार जानो, और बेवजह की धमकियों से डरो मत। सड़क किसी एक की नहीं, सबकी है। अगर कोई पड़ोसी आपको डराने की कोशिश करे, तो कानूनी जानकारी रखना, सबूत इकट्ठा करना और धैर्य बनाये रखना ही सबसे अच्छा जवाब है।
कमेंट्स में किसी ने लिखा, "समय सबका हिसाब कर देता है।" और सच भी है – ऐसे लोग मोहल्ले में कुछ समय के मेहमान होते हैं, पर आपकी इज्जत और आत्मसम्मान सबसे ऊपर है।
आपकी राय?
क्या आपके मोहल्ले में भी कोई ऐसा पड़ोसी है, जो सड़क को अपनी जायदाद समझता है? या ऐसी कोई मज़ेदार घटना आपके साथ घटी हो? नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें! और अगर आपको ये कहानी पसंद आई हो, तो अपने दोस्तों को भी हँसी का डोज़ दीजिए – शायद अगली बार कोई सड़क पर हक जताए, तो आप भी शांति का इशारा कर दें!
मूल रेडिट पोस्ट: Neighbors try to own the entire street in front of their house, I’m the first neighbor to not let them get what they want