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जब पड़ोसी ने तिलचट्टे भगाए, पर बदला लिया – मोल की अनोखी जंग!

यार्ड में गिलहरी और ज़हरीले कीड़ों के साथ 3D कार्टून चित्र, कीट नियंत्रण को दर्शाता है।
यह जीवंत 3D कार्टून चित्र मेरे यार्ड में गिलहरियों के खिलाफ चल रही लड़ाई को जीवंत करता है, जिसमें ज़हरीले कीड़ों के प्रभावी उपयोग को दर्शाया गया है। आइए, मैं अपने अनुभव और यार्ड को गिलहरी-मुक्त रखने के लिए सुझाव साझा करता हूँ!

क्या आपके घर या बगीचे में कभी छछूंदर (मोल) ने उत्पात मचाया है? अगर हां, तो आप जानते होंगे कि ये छोटे-छोटे जीव किस तरह मैदान को क्रिकेट पिच की जगह चांद जैसा बना सकते हैं! आज की कहानी है, ऐसे ही एक व्यक्ति की, जिसने अपने बगल वाले पड़ोसी के साथ ‘मोल-युद्ध’ में अनोखा बदला लिया — और इंटरनेट पर सबको हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया।

शुरुआत – दो बगिचों की एक समस्या

मालिक का नाम मान लीजिए मनोज जी। उनके और उनके पड़ोसी की बगिया में छछूंदरों ने डेरा डाल रखा था। मनोज जी ने पहले साल बाजार से ख़ास ‘ज़हरीले कीड़े’ खरीदे और बगिया में डाल दिए। छछूंदर भाग गए, बगिया फिर से हरी-भरी हो गई। लेकिन अगले साल, बगल के प्लॉट की तरफ़ से छछूंदरों का हमला फिर शुरू!

मनोज जी ने फिर से वही दवा डाली, और फिर से कुछ महीनों की शांति। लेकिन, फिर वही हाल! अबकी बार पड़ोसन से बात की, पर जवाब मिला, “अरे, दो-चार छछूंदर ही तो हैं, क्या फर्क पड़ता है दोस्त?” कुछ समझाया भी, पर अंत में बात तकरार तक पहुंच गई।

मोल भगाने का देसी जुगाड़ और ‘पेटी रिवेंज’

अब मनोज जी ने इंटरनेट खंगाला। वहां कई लोगों ने सलाह दी कि ज़मीन में एक खास किस्म की डंडी (stake) गाड़ दो, जो कंपन/आवाज़ पैदा करती है – इंसान को नहीं, छछूंदर को जरूर परेशान करती है। जैसे-जैसे छछूंदर भागे, डंडियां बगिया के किनारों पर शिफ्ट करो, और हर बार उन्हें और बाहर भगाओ।

यह दिमागी बल का बदला था! मनोज जी ने डंडियों की फौज लगाई, छछूंदरों का रेला पड़ोस की ओर बढ़ाया। कुछ महीनों में उनकी बगिया बिलकुल साफ, और पड़ोसी की बगिया में छछूंदरों की बारात! पड़ोसन परेशान, बगिया में गड्ढे, घास मरी हुई, और हर जगह नरम मिट्टी।

पड़ोसी की नाराजगी, और इंटरनेट की हंसी

एक दिन पड़ोसन आई, “तुम्हारे बगिचे में तो कुछ नहीं, मेरे में क्यों तबाही मच गई?” मनोज जी मुस्कराए, बोले, “मैंने वही किया, जो इंटरनेट ने बताया… छछूंदरों को भगा दिया!” पड़ोसन भड़क उठीं, “सोचो, वो छछूंदर गए कहां?” मनोज जी ने कंधे उचकाए, “मुझे छछूंदरों की यात्रा-आदतों की जानकारी नहीं है!”

रेडिट पर इस कहानी को पढ़ने के बाद कई लोगों ने मजेदार जवाब दिए। एक ने चुटकी ली, “क्या तुम छछूंदरों के प्रवास के बारे में शोध कर रहे हो?” तो दूसरे ने नॉनवेज मजाक किया, “मुझे लगा ये पोस्ट स्वादिष्ट ‘मोल पोब्लानो’ (मेक्सिकन चटनी) की रेसिपी होगी, छछूंदर की नहीं!” कुछ लोगों ने तो बाकायदा ‘मोल पोब्लानो’ बनाने की विधि भी डाल दी, जैसे कोई उत्तर भारतीय शादी में पनीर की रेसिपी पूछ ले!

छछूंदर: दुश्मन या बगिया का दोस्त?

मजेदार बात यह है कि कुछ अनुभवी लोगों ने समझाया कि छछूंदर असल में बगिया के कीड़ों को खाते हैं, घास-फूस नहीं। यानी छछूंदर जितना नुकसान करते हैं, उससे ज्यादा फायदा भी पहुंचाते हैं – जैसे दादी कहती थीं, “हर चीज़ में भलाई छुपी होती है बेटा!”

एक मजेदार सुझाव आया, “अगर आपके बगिचे में बार-बार छछूंदर आ रहे हैं, तो हो सकता है कि वहाँ कीड़े (grubs) बहुत हैं – उन पर दवा छिड़को, छछूंदर खुद-ब-खुद चले जाएंगे।” मतलब, समस्या का इलाज सिर्फ दिखावटी नहीं, असली वजह को मिटाना चाहिए।

हल्की-फुल्की सीख और देसी मसाला

हमारे मुहल्लों में भी ऐसा होता है – कभी गाय, कभी बंदर, कभी छछूंदर, तो कभी बिल्ली। कई बार हम अपनी समस्या से छुटकारा पाने के लिए पड़ोसी की बाउंड्री के पार चीजें फेंक आते हैं – चाहे वो सूखे पत्ते हों या फिर ‘समस्या’।

और रही बात ‘पेटी रिवेंज’ की – यानी चुपचाप, बिना लड़ाई-झगड़े के, बदला लेने की – तो इसमें मनोज जी ने देसी जुगाड़ और इंटरनेट दोनों का स्वाद मिला दिया। एक पाठक ने कमेंट किया, “क्या फर्क पड़ता है दोस्त, दो-चार छछूंदर ही तो हैं, अब मैंने भी अपने वाले तेरे यहां भेज दिए!”

निष्कर्ष – बगिया, पड़ोसी और छछूंदर

कहानी से दो बातें सीखने को मिलती हैं – पहली, अगर पड़ोसी के साथ मिलकर समस्या हल करोगे तो सबका भला होगा। दूसरी, हर समस्या का हल सीधा नहीं होता; कभी-कभी जुगाड़ और हल्की-फुल्की बदमाशी ज़रूरी है!

तो अगली बार अगर आपके घर में कोई जानवर या कीड़ा परेशान करे, तो सोचिए… क्या आप उसे पड़ोसी की तरफ भेज सकते हैं?

आपकी क्या राय है – क्या मनोज जी ने सही किया? या छछूंदरों का भी बगिचे में हक है? कमेंट में जरूर बताइए, और अगर आपके पास भी मोल भगाने का देसी तरीका है, तो वो भी शेयर करें!


मूल रेडिट पोस्ट: Mole Poblano