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जब पड़ोसी ने टीवी की आवाज़ बढ़ाई, तो 'योक्ड एल्विस' ने दिखाया असली दम

एक कार्टून-3D चित्र जिसमें नौसेना के नाविक अपने अतीत की रोमांचक यादों में खोए हुए हैं, आरामदायक अपार्टमेंट में।
यह जीवंत कार्टून-3D चित्र 90 के दशक में नौसेना जीवन की यादों को जीवित करता है, जब दोस्त अपने अविस्मरणीय अपार्टमेंट के पलों पर चर्चा करते हैं।

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आपके पड़ोसी को आवाज़ कम करने के लिए बार-बार कहना पड़े और वो टस से मस न हो? अगर हाँ, तो आज की कहानी आपके चेहरे पर मुस्कान ज़रूर ले आएगी। एक छोटे से अपार्टमेंट में रहने वाले नौसेना के जवानों की यह कहानी है, जिसमें एक शांत दिखने वाले 'दक्षिणी एल्विस' ने अपने पड़ोसी को ऐसा सबक सिखाया कि उसकी आवाज़ हमेशा के लिए धीमी हो गई।

जब संगीत बना सिरदर्द: पड़ोसी की आदतों से बेहाल

कहानी है 90 के दशक की, जब तीन नौसेना के जवान—जिनमें से एक का नाम हम "स्टीव" मान लेते हैं—अपनी ड्यूटी के दौरान एक ही अपार्टमेंट में किराए पर रहते थे। एक साथी की शादी होने वाली थी, दूसरा साथी धोखे के बाद नए घर की तलाश में था। सब कुछ ठीक चल रहा था, बस एक बात ने चैन छीन रखा था—साझा दीवार वाले पड़ोसी की ज़ोरदार टीवी और म्यूजिक!

शुरुआत में, उनके घर में रहने वाली 'जेन' ने शालीनता से कई बार पड़ोसी से अनुरोध किया, "भैया, आवाज़ थोड़ी कम कर लें?" लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। शिकायत की, मैनेजमेंट से बात की, पर पड़ोसी का कान न पड़ा जूं।

"योक्ड एल्विस" की एंट्री: बदले का फिल्मी तरीका

अब स्टीव की बात करें—दक्षिण भारत के शांत, विनम्र और कद-काठी में 6 फुट 4 इंच के पहलवान, जिनका चेहरा हूबहू एल्विस प्रेस्ली जैसा, बस थोड़ा और दमदार। जब जेन ने गुस्से में पड़ोसी की हरकतें साझा कीं, तो स्टीव ने मुस्कुराते हुए कहा, "इसका इलाज मैं करता हूँ।"

स्टीव ने सोफा दीवार से हटा दिया, अपने 90 के दशक के भारी-भरकम स्पीकर्स को साझा दीवार की ओर घुमा दिया, और 'ड्वाइट योएकम' का "सस्पिशियस माइंड्स" गाना फुल वॉल्यूम पर बजा दिया। पर्दे खोल दिए ताकि पड़ोसी को साफ़ दिखे कि यहां क्या हो रहा है। और खुद एक कुर्सी पर, दरवाजे के सामने, ऐसे बैठ गए जैसे कोई बॉडीगार्ड पहरा दे रहा हो।

अब तो पड़ोसी का पारा चढ़ना लाज़िमी था। लेकिन जैसे ही उसने खिड़की से स्टीव की गठीली कद-काठी देखी, उसकी चाल धीमी हो गई। दरवाज़े पर पहुंचा, तो स्टीव ने बड़ी शांति से जवाब दिया, "हमने तो बस तब तक वॉल्यूम बढ़ाया जब तक आपकी आवाज़ के ऊपर हमारी सुनाई देने लगी।" गाने की धुन के बीच पड़ोसी ने शर्मिंदा होकर कहा, "माफ़ कीजिए, अब आवाज़ कम कर दूँगा।" स्टीव ने मुस्कुरा कर कहा, "ज़रूर करिए।" और बस, उसके बाद कभी आवाज़ ऊँची नहीं हुई।

कमेंट्स की चटपटी बातें: पाठकों के अनुभव और मज़ाकिया रंग

रेडिट पर इस कहानी के नीचे कई भारतीयों के दिल को छू जाने वाले कमेंट्स आए। एक पाठक ने लिखा, "हमारे यहां भी एक पड़ोसी का अलार्म हफ़्तों तक बजता रहा, जब जाकर देखा तो अम्मा जी ने मुस्कुराकर कहा—'बेटा, मैं तो बहरी हूँ, पर एल्विस सुनना हो तो आवाज़ और बढ़ा लेना!'"

इस कमेंट ने साबित कर दिया कि उम्रदराज़ महिलाएँ भी कम शरारती नहीं होतीं। एक दूसरे पाठक ने तो इसे 'ड्वाइट योक्ड-एम' का नाम दे दिया—यानि एल्विस के म्यूजिक और पहलवानी का अनोखा संगम।

एक और मज़ेदार बात सामने आई—पांच नौजवानों ने अपने पड़ोसी को उसके कुत्ते की आवाज़ के लिए समझाया, और जब सब दरवाजे पर खड़े हो गए, तो पड़ोसी की बोलती बंद! वाकई, हिंदी मोहल्लों में भी जब मिलकर सामने खड़े हो जाएँ, तो बड़े से बड़ा 'शेर' भी बिल्ली बन जाता है।

भारतीय नजरिए से सबक: हद कर दी आपने!

सोचिए, अगर यही किस्सा हमारे देश के किसी शहर में होता? मोहल्ले की चाय की दुकान पर चर्चा होती—"अरे शर्मा जी, कल रात उस पड़ोसी ने ऐसा सबक सिखाया कि अब तो उसकी आवाज़ मुर्गे की तरह सुबह-सुबह भी नहीं सुनाई देती!"

यह कहानी हमें याद दिलाती है कि विनम्रता ज़रूरी है, लेकिन कभी-कभी 'दूसरे की भाषा' में जवाब देना भी उतना ही जरूरी। हमेशा बातचीत से हल निकले, यह ज़रूरी नहीं, लेकिन जब हद हो जाए, तो थोड़ा 'फिल्मी' अंदाज़ भी चल जाता है।

निष्कर्ष: आपकी कहानी क्या है?

तो दोस्तों, अगली बार अगर आपके पड़ोसी की आवाज़ हद से ज़्यादा हो, तो स्टीव और एल्विस वाला तरीका याद रखना—पर थोड़ा प्यार और हंसी-मज़ाक के साथ!

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? अपनी पड़ोस वाली मज़ेदार कहानियाँ नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें। कौन जाने, आपकी कहानी अगली बार हमारे ब्लॉग की शान बन जाए!

चलते-चलते—जैसा कि एक पाठक ने कहा, "अगर पड़ोसी को सबक सिखाना हो, तो खुद का अंदाज़ अपनाओ और थोड़ा फिल्मी ट्विस्ट डाल दो।"

आपका दिन शुभ हो, और आपके पड़ोसी हमेशा 'धीमी आवाज़' में रहें!


मूल रेडिट पोस्ट: Can you turn down the volume?