जब पड़ोसी ने कहा 'इन ज़हरीले फूलों को हटाओ!' और मिला करारा जवाब
कभी-कभी हमारे पड़ोस में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिनकी छोटी-छोटी बातें भी ज़िंदगी में तुफ़ान ला देती हैं। एक बार एक कॉलेज विद्यार्थी को अपने घर के सामने उग आई डंडेलियन (सिंहपर्णी) के फूलों की वजह से अपने झगड़ालू पड़ोसी से दो-दो हाथ करने पड़े। कहानी में न तो हीरो कोई बड़ा आदमी है, न ही पड़ोसी कोई विलेन, लेकिन दोनों की नोक-झोंक किसी बॉलीवुड ड्रामा से कम नहीं!
पड़ोसी की तानाशाही: "तुम्हारी घास मोहल्ले की शान बिगाड़ रही है!"
यह बात है 80 के दशक के आखिर की, जब किराए पर घर लेना आम लोगों के लिए भी मुमकिन था। हमारा नायक, एक 24 वर्षीय कॉलेज स्टूडेंट, अपनी पहली नौकरी और सीमित बजट के साथ शहर के एक टाउनहाउस में रहने लगा। घर जुड़ा हुआ था—एक तरफ़ दोस्ताना पड़ोसी, दूसरी तरफ़ ‘बॉब’ नाम का महाशय, जिनके चेहरे पर हमेशा ग़ुस्सा और शिकायत चिपकी रहती थी।
जब मोहल्ले के लोग अपनी घास में महंगे केमिकल डालकर उसे "परफेक्ट" बनाते थे, तब यह विद्यार्थी प्रकृति से प्रेम करता था। उसके लॉन में घास के साथ डंडेलियन के पीले-पीले फूल मुस्कुरा रहे थे। लेकिन बॉब को ये फूल अपनी आंखों में कांटे की तरह चुभते थे। हर बार जब बॉब मिलते, "तुम मोहल्ले की इज़्ज़त गिरा रहे हो! ज़रा सी भी सेल्फ रेस्पेक्ट है?" जैसी बातें कहते। मानो फूलों से नहीं, उनकी खुशबू से मोहल्ले का माहौल बिगड़ रहा हो!
नियमों की दुहाई और ‘मालिशियस कंप्लायंस’ का मास्टरस्ट्रोक
एक दिन तो हद ही हो गई—बॉब ने सबके सामने ज़ोर से चिल्लाकर कहा, "इन हरामखोर डंडेलियन को हटाओ!" हमारे नायक के साथी भी उस वक्त मौजूद थे, तो बॉब की असलियत सबके सामने खुल गई। हमारे छात्र ने तंग आकर पलटकर जवाब दिया, "अपने काम से काम रखो!"
कुछ दिन बाद नगरपालिका का अधिकारी घर आ पहुंचा—"आपके गार्डन में 'नॉक्सियस वीड्स' (हानिकारक घास) की शिकायत आई है, देखना है।" लेकिन छात्र ने पहले ही नियम पढ़ रखे थे—डंडेलियन उस लिस्ट में नहीं थे! अधिकारी ने देख कर कहा, "कोई समस्या नहीं, आपका गार्डन एकदम सही है।" अधिकारी ने जाते-जाते बॉब को चेतावनी भी दी कि पड़ोसियों को बेवजह परेशान करना बंद करें।
डंडेलियन की 'आंधी': फूलों की बदला लेने वाली फौज
अब असली मज़ा तो तब आया, जब हमारे नायक के दिमाग में बदला लेने का बीज अंकुरित हुआ। उसने देखा कि बॉब रोज़ अपनी बालकनी में बैठते हैं। तो उसने हर बार हाथ भर-भर कर डंडेलियन के सफेद फूल (बीजों वाले) लेकर, बॉब के लॉन की तरफ़ हवा में उड़ा दिए। हवा भी उस दिन जैसे उसकी मददगार बन गई!
बॉब का चेहरा गुस्से से लाल, लेकिन नियमों के आगे उनकी एक न चली। "क्या हुआ बॉब? आप ही तो कह रहे थे डंडेलियन हटाओ, मैं तो हटा रहा हूँ!" लड़ाई में जीत उसी की होती है, जो धैर्य और दिमाग से खेले—यही यहाँ भी साबित हुआ।
फूल या ज़हर? समाज की सोच और कुछ दिलचस्प टिप्पणियाँ
जैसे हमारे यहाँ पड़ोसी की भैंस मर जाए तो लोग खुश हो जाते हैं, वैसे ही कुछ लोग घास-फूल की वजह से परेशान हो जाते हैं। Reddit पर एक पाठक ने लिखा, "डंडेलियन तो नाज़ुक लगते हैं मगर असल में बड़े ज़िद्दी होते हैं—जैसे कुछ रिश्तेदार!" एक और ने कहा, "ये फूल मधुमक्खियों के लिए अमृत हैं, इन्हें क्यों हटाएं?" कुछ ने तो डंडेलियन की तारीफ में लिखा, "ये फूल स्वादिष्ट सलाद, चाय और यहां तक कि वाइन तक के काम आते हैं।"
एक पाठक की माँ ने तो बच्चों को डंडेलियन उखाड़ने के लिए अजीब सा औज़ार पकड़ाया था, पर एक बड़ा डंडेलियन मिला जिसे उन्होंने 'मदरशिप' नाम दिया—जैसे हमारे गाँव में कोई पुरानी बड़ की जड़ मिल जाए!
किसी ने सही ही लिखा, "वीड (घास/जंगली पौधा) वही है, जो आपको पसंद न आए। अगर आपको डंडेलियन अच्छे लगें, तो वो आपके लिए फूल हैं, न कि घास।" और एक पाठक का कहना, "लॉन परफेक्शन के चक्कर में लोग ज़हर फैला रहे हैं, लेकिन नेचर का तो अपना ही मज़ा है!"
निष्कर्ष: फूलों से दोस्ती या पड़ोसियों से दुश्मनी?
ये कहानी सिर्फ़ डंडेलियन की नहीं, बल्कि इंसानी स्वभाव की भी है। कभी-कभी समाज की 'परफेक्ट' छवि के पीछे हम वो छोटी-छोटी खुशियाँ भूल जाते हैं, जो प्रकृति हमें मुफ्त में देती है। क्या ज़रूरी है कि हर लॉन गोल्फ कोर्स जैसा हो? या क्या हम पड़ोसी की खुशियों को अपने गुस्से के ज़हर से मारें?
दोस्तों, अगली बार जब आपके गार्डन में कोई छोटा सा फूल मुस्कुराए, तो उसे जंगली घास समझकर न उखाड़ें—शायद वही किसी तितली या मधुमक्खी की पहली उम्मीद हो। और अगर पड़ोसी बॉब जैसा निकले, तो डंडेलियन के बीजों के साथ हवा का रुख़ पहचानना न भूलें!
आपके विचार क्या हैं—क्या आप भी ऐसे किसी 'लॉन पुलिस' से मिले हैं? या आपको भी डंडेलियन और जंगली फूलों से लगाव है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताएं!
मूल रेडिट पोस्ट: GET RID OF THOSE F#&KIN' DANDELIONS!!!!