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जब पड़ोसी की ज़िद्दी हरकतों पर टूटा सब्र का बांध: एक छोटी सी बदला कहानी

हर मोहल्ले में एक न एक ऐसा पड़ोसी जरूर होता है जिसे लगता है कि नियम सिर्फ दूसरों के लिए बने हैं, उसके लिए नहीं। कुछ लोग तो इतने ‘बिंदास’ होते हैं कि उनकी हरकतें देखकर गुस्सा भी आए और हंसी भी। आज की कहानी भी एक ऐसे ही पड़ोसी की है, जिसने अपने कुत्ते के सहारे पूरे मोहल्ले का जीना हराम कर रखा था। लेकिन कहते हैं न, “बूंद-बूंद से घड़ा भरता है” – एक दिन सब्र का घड़ा फूट ही गया!

मोहल्ले का ‘राजा बाबू’ और उसकी मालकिन

अब जरा सोचिए, सुबह-सुबह आप अपने घर के लॉन में बैठे हैं, बच्चे खेल रहे हैं, और अचानक एक पड़ोसी बेपरवाह अपने कुत्ते को बिना पट्टा लगाए घुमा रहा है। कुत्ता इधर-उधर भाग रहा है, कभी किसी के आंगन में घुस जाता है, तो कभी बच्चों को गिरा देता है। और इसकी मालकिन? उसे तो जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ता! हमारे कहानी के नायक ने जब विनम्रता से कहा, “बहनजी, कुत्ते को पट्टा तो लगा लो”, तो जवाब में गालियां और धमकियाँ मिल गईं – “पुलिस बुला लूंगी!”

भारत में भी ऐसे लोग मिल ही जाते हैं, जिन्हें लगता है कि मोहल्ले के नियम-कायदे केवल दूसरों के लिए हैं। बचपन में जब मोहल्ले के मैदान में क्रिकेट खेलते वक्त कोई अंकल शिकायत कर देता था, तब भी कुछ लोग इसी अंदाज में जवाब दे देते थे – “हमारे बच्चे हैं, खेलने दो!” लेकिन यहां मामला थोड़ा अलग था, कुत्ता बच्चों को गिरा रहा था, और पड़ोसन का रौब भी कम नहीं था।

कानून का सहारा और छोटी-छोटी जीतें

हमारे नायक ने हार नहीं मानी। हर बार जब कुत्ता बिना पट्टे के घूमता दिखा, तुरंत स्थानीय प्रशासन (जिसे वहां ‘bylaw’ कहा जाता है, हमारे यहां ये काम नगर निगम या नगरपालिका करती है) में शिकायत दर्ज करवाई। धीरे-धीरे सबूत इकट्ठा किए – वीडियो बनाए, फोटो खींचे। आखिरकार प्रशासन ने उस पड़ोसन पर जुर्माना ठोक ही दिया। अब बला टली – कुत्ता पट्टे पर आ गया!

यहां Reddit की चर्चा में एक मजेदार सुझाव आया – “अगली बार जब वो जानबूझकर आपके घर के सामने बर्फ लात मार-मारकर फुटपाथ पर डाले, तो उसकी ये हरकत वीडियो में रिकॉर्ड करें और प्रशासन को भेज दें। हो सकता है उसे फिर से जुर्माना लग जाए।” भारतीय मोहल्लों में भी ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो हर छोटी बात पर शिकायत करने निकल पड़ते हैं – जैसे गाड़ी गलत पार्क कर दी, या बालकनी से पानी गिरा दिया।

एक और कमेंट ने तो हद कर दी – “उसकी हरकतों का वीडियो प्रोजेक्टर पर अपनी गैराज दीवार पर चलाओ, बीच-बीच में किसी अच्छे मनोचिकित्सक का नंबर भी डाल दो!” सोचिए, अगर किसी ने दिल्ली के किसी पॉश कॉलोनी में ऐसा किया तो पूरा मोहल्ला तमाशा देखने आ जाएगा!

बदले की ‘हॉर्न’ बजाने वाली रात

लेकिन मामला यही नहीं रुका। पड़ोसन को जब अपनी गलती का एहसास हुआ, तो उसने भी ‘छोटी सोच’ दिखा दी – रोज़ाना हमारे नायक के घर के सामने से गुजरते हुए, बर्फ को लात मारकर फुटपाथ पर डालने लगी। आख़िरकार, एक दिन सब्र का बांध टूटा। हमारे नायक ने अपनी गाड़ी निकाली और उस पड़ोसन के घर के सामने जाकर एक लंबा हॉर्न बजा दिया।

अब सोचिए, भारतीय मोहल्ले में अगर कोई किसी के घर के आगे हॉर्न बजा दे, तो अगले दिन चाय की दुकान पर चर्चा हो ही जाती – “कल रात शर्मा जी के घर के आगे कौन था?” Reddit पर भी लोगों ने बड़े मजेदार रिएक्शन दिए – किसी ने कहा, “ये तो गजब का ड्राइव-बाय था!”, तो किसी ने लिखा, “भाई, बाकी पड़ोसियों का भी ध्यान रखा करो, सबकी नींद खराब हो गई होगी।”

कुछ लोगों ने तो और भी ‘देसी’ आइडिया दे डाले – “उसके घर के सामने बर्फ के ढेर लगा दो”, “उसके लॉन पर प्याज के बीज डाल दो, जब घास कटेगी तो खुशबू से पता चल जाएगा!”, “उसके दरवाजे के पास बर्डसीड फेंको, कबूतर जमा हो जाएंगे।” ये सब सुनकर लगता है, बदला लेने के ‘घरेलू नुस्खे’ हर संस्कृति में मौजूद हैं।

समाज में अच्छाई का संदेश

इसी कहानी में सबसे प्यारी बात ये थी कि हमारे नायक ने अपनी गलती भी मानी। उन्होंने कहा, “शायद मुझे इतना लंबा हॉर्न नहीं बजाना चाहिए था, बाकी पड़ोसियों को परेशानी हुई होगी। अब मैं इस हफ्ते दो-तीन और लोगों के फुटपाथ की बर्फ भी साफ कर दूंगा – ताकि मोहल्ले में फिर से सौहार्द लौटे।”

हमें भी यही सीख मिलती है कि गुस्से में किए गए काम बाद में खुद ही खटकने लगते हैं। लेकिन जब आप अच्छाई से जवाब देते हैं, तो समाज में सकारात्मकता जरूर लौटती है। Reddit के एक यूजर ने बहुत सही कहा – “सबसे अच्छा बदला ये है कि आप चुपचाप ऐसी चीजें करें, जिससे सामने वाले को खुद ही अपनी गलती का एहसास होने लगे।”

निष्कर्ष: आपके मोहल्ले में भी है कोई ऐसी ‘मालकिन’?

तो दोस्तों, ये कहानी सिर्फ एक Reddit पोस्ट नहीं, हर मोहल्ले की सच्चाई है। हमारे आस-पास भी ऐसे लोग रहते हैं, जो कानून को मजाक समझते हैं। लेकिन संयम, धैर्य और हल्की-फुल्की बदमाशियों के साथ भी, बड़ी से बड़ी समस्या का हल निकाला जा सकता है।

क्या आपके पड़ोस में भी कोई ऐसा किरदार है? या आपने कभी किसी अजीबोगरीब पड़ोसी से निपटने के लिए कोई जुगाड़ अपनाया हो? नीचे कमेंट में जरूर बताइए – आपकी कहानी पढ़कर बाकी लोगों को भी हंसी आएगी, और शायद सीख भी मिलेगी!

अंत में बस यही – पड़ोसियों से प्यार बना रहे, लेकिन अगर कोई हद से गुजर जाए, तो एक ‘देसी’ जुगाड़ हमेशा काम आता है!


मूल रेडिट पोस्ट: Sunk to her level today