जब 'नाज़ुक' ऑडियो जैक और गुस्सैल डायरेक्टर ने आईटी वाले की परीक्षा ली
ऑफिस में टेक्निकल सपोर्ट वाले की ज़िंदगी किसी रोलरकोस्टर से कम नहीं होती। कोई दिन आराम से निकल जाता है, तो कभी-कभी ऐसे झोल हो जाते हैं कि हँसी भी आ जाती है और माथा भी ठनक जाता है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, जिसमें ‘डायरेक्टर साहब’ का गुस्सा, उनकी ‘तकनीकी समझ’ और एक बिचारा आईटी वाला – सब मिलकर एक अनोखी स्थिति पैदा कर देते हैं।
डायरेक्टर साहब और उनकी ‘टॉप क्लास’ मशीनें
हमारे नायक, जो एक मंझोले लॉजिस्टिक्स ऑफिस के अकेले आईटी एक्सपर्ट हैं, की सुबह उस दिन कुछ ज़्यादा ही व्यस्त थी। डायरेक्टर साहब – यानी यहाँ के ‘डेव’ – बिल्कुल वैसी ही शख्सियत हैं, जैसी अक्सर भारतीय दफ्तरों में देखने को मिलती है: तकनीकी मामलों में बिलकुल कच्चे, लेकिन अपनी बात पर अड़े रहने वाले!
उनकी बड़ी प्रेज़ेंटेशन थी, और वो ऑफिस में शेर की तरह घूमें जा रहे थे। सबकुछ ठीक चल रहा था, तभी दस मिनट पहले उनकी असिस्टेंट की घबराई आवाज़ आई – "स्पीकर काम नहीं कर रहे, और साहब का पारा सातवें आसमान पर है!" अब बताइए, ऐन वक्त पर मशीनों का धोखा और ऊपर से साहब का गुस्सा – किसी भी आईटी वाले के लिए ये किसी परीक्षा से कम नहीं।
‘नाज़ुक’ ऑडियो जैक और साहब का क्रोध
आईटी वाले भाई साहब दौड़ते-दौड़ते मीटिंग रूम पहुँचे, तो देखा साहब अपने लैपटॉप स्क्रीन पर उंगली से ऐसे वार कर रहे हैं जैसे दुश्मन देश की सरहद पर हो! मेज पर महंगे स्टूडियो मॉनिटर रखे थे – बिल्कुल चुप।
साहब गरज उठे, "हमने तो टॉप क्लास इक्विपमेंट लिया है, लेकिन जब ज़रूरत होती है, तब ही सब धोखा दे जाते हैं!" भाई साहब सॉफ्टवेयर से लेकर वॉल्यूम तक सब चेक कर चुके, लेकिन आवाज़ गायब। फिर उनकी निगाह गई उस 3.5mm ऑडियो केबल पर, जो बस हल्के से पोर्ट से बाहर लटक रही थी।
जैसे ही उन्होंने केबल को अंदर करने की कोशिश की, साहब ने हाथ झटक दिया – "ज्यादा ज़ोर से मत लगाइए! मैंने भी कोशिश की थी, इसमें रुकावट सी महसूस हुई। ये चीजें बहुत नाज़ुक होती हैं, कहीं मदरबोर्ड टूट ना जाए!" अब भला बताइए, हमारे देश में भी बड़े अफसरों की यही आदत होती है – बिना जाने-समझे खुद से छेड़छाड़, और अगर कुछ उल्टा हो जाए तो आईटी वाले पर इल्ज़ाम।
आईटी वाले ने बड़ी विनम्रता से समझाने की कोशिश की, "सर, ऑडियो जैक को अच्छे से लगाना पड़ता है, तभी अंदर क्लिक की आवाज़ आती है।" लेकिन साहब कहाँ मानने वाले थे, बोले – "कोई हार्डवेयर की गड़बड़ी है, सेटिंग्स से ही ठीक कीजिए!"
समाधान, जो था बिल्कुल सामने
साहब जब शीशे में अपनी टाई ठीक कर रहे थे, आईटी वाले ने चुपचाप केबल को ज़रा जोर से दबा दिया – 'क्लिक'! और अगले पल पूरे कमरे में साहब के इंट्रो वीडियो की धाँसू म्यूज़िक जोरदार बज उठी – वॉल्यूम भी फुल था! साहब तो उछल पड़े, जैसे अचानक कान में पटाखा फूट गया हो। फिर जो नज़रों में ताज्जुब और हल्की नाराजगी मिली, उसका जवाब नहीं।
शुक्रिया तो छोड़िए, साहब बड़बड़ाते हुए बोले – "लगता है, अब पोर्ट थोड़ा ढीला हो गया जब मैंने कोशिश की थी।" और आईटी वाले को बाहर जाने का इशारा कर दिया, ताकि उनकी ‘महान’ मीटिंग शुरू हो सके।
जब जनता का दिल बोला – "ऐसे साहबों से भगवान बचाए!"
इस किस्से पर Reddit की जनता ने भी खूब चुटकी ली। एक कमेंट में किसी ने लिखा, "ऐसे लोगों के सामने तो HR के पास जाना चाहिए था!" लेकिन खुद कहानी के लेखक ने बताया, "ऑफिस में अकेला आईटी वाला होने का यही झंझट है, मीटिंग दस मिनट में शुरू होने वाली थी, भागकर ही मसला सुलझाया।"
एक और मज़ेदार कमेंट आया – "साहब कह रहे हैं, हार्डवेयर में दिक्कत है, आप सेटिंग्स से ठीक कीजिए! अरे भाई, ये तो वैसा ही है जैसे पंचर टायर पेट्रोल डालकर ठीक करने की कोशिश!" सच में, हमारे ऑफिसों में भी ऐसे ‘जुगाड़ू’ तर्क सुनने को मिल जाते हैं।
किसी और ने बड़ी सही बात कही – "जब आप ही समस्या पैदा करते हैं और आईटी वाला उसे ठीक करते वक्त डाँट खाता है, तो कभी-कभी उसे छोड़ देना चाहिए, ताकि असली सबक मिले।" लेकिन हर कोई मानता है कि ऐसे हालात में भी आईटी वाले अपनी ड्यूटी निभाते हैं, चाहे सामने DIPswitch Dave (या हमारे देसी 'साहब') ही क्यों न हों।
तकनीक और घमंड – सीख सबके लिए
इस पूरे वाकये में एक गहरा संदेश भी छिपा है। ऑफिस में ‘तकनीकी ज्ञान’ की कमी और घमंड जब मिलते हैं, तो सबसे ज़्यादा फँसता हमेशा आईटी वाला ही है। चाहे वो छोटा ऑफिस हो या बड़ी कंपनी, ऐसी कहानियाँ हर जगह सुनने को मिल जाती हैं। और सबसे खास बात – समाधान अक्सर हमारी आँखों के सामने ही होता है, बस ज़रूरत है सही तरीके से देखने की और थोड़ा धैर्य रखने की।
आपके ऑफिस में भी कभी ऐसा कोई किस्सा हुआ है? या फिर कोई ‘साहब’ आपको भी बिना बात डाँट चुके हैं? नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें – क्या पता आपकी कहानी भी अगली बार सबको हँसा दे!
मूल रेडिट पोस्ट: The case of the 'delicate' audio jack and the angry Director