जब नई नौकरी के पहले ही दिन कर्मचारी ने मांगी तरक्की: होटल की मजेदार कहानी
कहते हैं, “नया झाड़ू ज्यादा साफ़ करता है,” लेकिन कभी-कभी नया झाड़ू खुद ही झाड़ू बन जाता है! होटल इंडस्ट्री में वैसे तो हर रोज़ कुछ न कुछ मजेदार होता है, लेकिन हाल ही में एक होटल में जो हुआ, वो सुनकर आप भी कहेंगे – “भैय्या, ये तो हद हो गई!”
सोचिए, आपने किसी को नाइट शिफ्ट (रात की ड्यूटी) के लिए नौकरी पर रखा, और उस बंदे ने पहले ही दिन सुबह-सुबह बॉस से इतनी फरमाइशें कर डालीं कि GM (जनरल मैनेजर) भी हैरान रह गए! चलिए, जानते हैं पूरी कहानी।
पहली रात और सुबह-सुबह की सैर
कहानी स्पेन के एक होटल की है, जहां गर्मियों का सीज़न शुरू होते ही नया स्टाफ रखा गया। पुराने नाइट ऑडिटर (NA – रात की ड्यूटी करने वाला) का प्रमोशन हो गया था, तो उसकी जगह एक 20 साल के नौजवान को रखा गया, जिसे दो दिन ट्रेनिंग मिलनी थी।
पहली रात सब ठीक चला। लेकिन सुबह 7 बजे GM खुद होटल आ गए – वैसे तो वे सुबह जल्दी उठने वालों में से हैं, पर आज खास तौर पर चेक करने आए थे कि सब सही चल रहा है या नहीं।
उन्होंने नए लड़के से पूछा, “भैया, नौकरी कैसी लग रही है?”
लड़का बोला, “सब बढ़िया है, पर मेरी कुछ डिमांड्स हैं।”
GM बोले, “क्या डिमांड?”
लड़का बोला, “मुझे तनख्वाह बढ़ा दीजिए।”
GM – “पहले दिन ही?”
लड़का – “हाँ, और मेरी शिफ्ट 12-8 की बजाय 11-7 कर दीजिए।”
GM – “और?”
लड़का – “जल्दी से मुझे भी दिन की शिफ्ट चाहिए, रात की नहीं।”
GM – “तो रात में कौन करेगा काम?”
लड़का – “कोई और कर ले, आपके पुराने वाले या दूसरा।”
GM ने बिना देर किए फैसला सुनाया – “भैया, घर जाओ और वापस मत आना।”
‘नई पीढ़ी’ या ‘नयी सोच’?
इस किस्से पर खुद पुराने NA (जो सिर्फ 24 साल के हैं!) ने तंज कसते हुए कहा, “ये आजकल की जनरेशन Z है, इन्हें लगता है दुनिया बस इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती है।”
लेकिन कमेंट्स में कई लोगों ने कहा – “ये बात सिर्फ उम्र की नहीं, एटीट्यूड की है। हर दौर में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिन्हें लगता है कि बिना मेहनत के सबकुछ मिलना चाहिए।”
जैसे हमारे यहां भी कई लोग इंटरव्यू में बोल देते हैं, “सर, वर्क फ्रॉम होम मिल सकता है?”, “पहले महीने में छुट्टी चाहिए”, या “पहले तनख्वाह बताइए।”
नाइट शिफ्ट – सजा या इनाम?
दिलचस्प बात ये है कि पश्चिमी देशों में भी नाइट शिफ्ट को कई लोग ‘सजा’ मानते हैं, तो कुछ को यह लाइफस्टाइल पसंद भी आता है। एक कमेंट में किसी ने लिखा, “हमें तो नाइट शिफ्ट के लिए ज्यादा सैलरी मिलती है, और दिन की शिफ्ट में सिर्फ राजनीति और झंझट ही झंझट है!”
दूसरे ने कहा, “भैया, नाइट में तो शांति है, कंप्यूटर पर काम करो, और थोड़ा-बहुत गेस्ट से डील करो, बैचैन करने वाली बातें कम होती हैं।”
पर पुराने NA बोले, “मुझे हफ्ते में एक रात करनी पड़ती है, और मैं तो तौबा करता हूँ!”
यानी पसंद अपनी-अपनी, ख्याल अपना-अपना।
नौकरी का ‘हनीमून पीरियड’ और नए ट्रेंड्स
एक और मजेदार कमेंट था, “पहले दिन ही तनख्वाह बढ़वाने की डिमांड? लगता है उसके दोस्तों ने कहा होगा, ‘भाई, सीधा बोल देना, बढ़ जाएगी!’ लेकिन सच्चाई तो ये है कि पहले दिन कंपनी में पैर जमाना चाहिए, फिर धीरे-धीरे डिमांड करनी चाहिए।”
यहां भारत में भी बहुत बार सुनने मिलता है – “भैया, मेरा तो फ्रेशर है, पर सैलरी 40 हज़ार चाहिए, और ऑफिस घर के पास ही होना चाहिए।”
एक अन्य कमेंट में किसी ने कहा, “ज़्यादा लोग ‘कॉर्नर ऑफिस’ चाहते हैं, लेकिन मेहनत कोई करना नहीं चाहता।”
यही बात यहां भी लागू होती है – काम शुरू होते ही लोग प्रमोशन, आरामदायक शिफ्ट और छुट्टियों की लिस्ट पकड़वा देते हैं।
आखिर में – सीख क्या है?
इस पूरी घटना से एक सीख जरूर मिलती है – नौकरी में ‘सब्र का फल मीठा’ होता है। पहले दिन ही सबकुछ मांगने से नौकरी हाथ से भी जा सकती है!
पुराने NA के कज़िन ने फौरन जगह ले ली, और होटल का काम चल निकला। होटल इंडस्ट्री हो या कोई भी फील्ड – जो लोग जिम्मेदारी निभाते हैं, वही टिकते हैं। बाकी तो आते-जाते रहते हैं, जैसे ट्रेनिंग के बहाने होटल की चाय पीकर निकल लिए!
आप क्या सोचते हैं?
क्या आपको भी कभी ऐसा अनुभव हुआ है, जब नया कर्मचारी आते ही बॉस बनने की कोशिश करने लगे? या आपने कभी नाइट शिफ्ट में कुछ मजेदार देखा हो? नीचे कमेंट में जरूर बताइए – आपकी कहानियां भी पढ़ने का इंतज़ार रहेगा!
मूल रेडिट पोस्ट: The NA who lasted one day (or night, but day rhymes better)