जब दो हफ्ते की दुकान बंदी के बाद ग्राहकों ने पूछे अनोखे सवाल
दुकानदार की जिंदगी भी क्या गज़ब होती है! रोज़ नए-नए लोग, नए-नए सवाल, और कभी-कभी ऐसे अनुभव जिन पर हँसी भी आती है और हैरानी भी। ज़रा सोचिए, आप अपनी गली की छोटी सी किराने की दुकान को सजाने-संवारने के लिए कुछ दिन बंद करते हैं, और जब बड़ी उम्मीदों के साथ दुबारा खोलते हैं, तो आपको ऐसे सवाल मिलते हैं जिनका सिर-पैर समझना मुश्किल है!
दुकान का मेकओवर: उम्मीदें आसमान पर, हकीकत ज़मीन पर
हमारे एक मित्र, जो इंग्लैंड के एक छोटे से सुपरमार्केट में काम करते हैं, ने रिफिट (मेकओवर) के लिए दुकान को दो हफ्ते बंद किया। अब आप सोचिए, 2,200 वर्गफुट की जगह में कितनी बड़ी क्रांति आ सकती है? लेकिन ग्राहक तो ग्राहक हैं! जैसे ही दुकान खुली, लोग उम्मीदों का बोझा लेकर आ धमके – “कुछ तो बहुत अलग दिखना चाहिए, आखिर दो हफ्ते बंद रही!”
पहले तो सबसे बड़ा सवाल होता था, “अंडे कहाँ हैं?” अब सवाल बदल गया – “कुछ बदला ही नहीं, इतनी लंबी छुट्टी क्यों ली?” बेचारे दुकानदार ने भी जवाब देने की कला में महारत हासिल कर ली – कभी मज़ाक में, कभी गंभीरता से, और कभी-कभी तो बिलकुल ही अजीब तरीके से!
ग्राहक और उनके अजब-गजब सवाल
अब सुनिए, एक भैया दुकान में आते हैं और पूछते हैं, “फुटबॉल के जूते मिलेंगे?” और फिर अगला सवाल – “ऊपर कपड़ों का सेक्शन कहाँ गया?” अब भाईसाहब ये भूल गए कि ये कोई मॉल नहीं, आपकी अपनी मोहल्ले वाली दुकान है!
एक और ग्राहक, जिनके लिए शायद वाइन ही जीवन का आधार है, शिकायत लेकर आईं – “मुझे अपनी पसंदीदा वाइन के लिए दूर जाना पड़ा, यहाँ कुछ बदला ही नहीं!” दुकानदार सोच में पड़ गया – अगर दुकान में नए फर्श और सफेदी से आपकी वाइन का स्वाद बदल जाता, तो हम भी चमत्कारी दुकानदार कहलाते!
दुकानदारी का सच: हर किसी को खुश करना नामुमकिन
सोचिए, अगर दुकान की सफेदी वही पुरानी रखी जाती, तो भी लोग कहते – “कुछ नया कर लेते, दुकान तो पुरानी लग रही है।” एक पाठक ने कमेंट में बड़ा सही लिखा – “क्या इन लोगों ने कभी अपने घर की छत को नया रंग करवाया है?” यानि, जो बदले उस पर भी सवाल, और न बदले तो भी शिकायत!
दूसरे कमेंट में एक दुकानदार ने अपने अनुभव साझा किए – “हर बार जब दुकान का सामान थोड़ा इधर-उधर रखते, ग्राहक परेशान हो जाते, ‘हर बार बदल क्यों देते हो, कुछ नहीं मिलता!’” अब दुकानदार बेचारा क्या करे – न बदले तो शिकायत, बदले तो और ज़्यादा परेशानी!
भारतीय नज़रिए से: हमारी गली-मोहल्ले की दुकानें और उम्मीदों का बोझ
हमारे यहाँ भी मोहल्ले की दुकानों से हर कोई कुछ न कुछ उम्मीद रखता है। चाचा जी को अगर पसंदीदा बिस्कुट की जगह बदल गई, तो पूछेंगे, “अब यहाँ कौन सा नया मैनेजर आ गया?” या फिर “पिछली बार जो नमकीन थी, वही चाहिए, वही ब्रांड!”
अब सोचिए, अगर अपनी गली की दुकानदार दो हफ्ते बंद करे तो लोग अफवाह उड़ाने में भी देर नहीं लगाते – “पता है, दुकान में बड़ी तोड़फोड़ हो रही है, नया मॉल बनने वाला है!” और जब दुकान खुलती है, तो सबकी नजरें बस एक बदलाव ढूंढ रही होती हैं।
कुछ हंसी, कुछ सीख: ग्राहक भी इंसान, दुकानदार भी
अंत में यही कहना चाहूँगा – कभी-कभी ग्राहक के सवालों पर गुस्सा नहीं, मुस्कुराना चाहिए। आखिर, हमारे देश में भी तो यह आम बात है – पान की दुकान से लेकर जूस वाले तक, हर कोई कभी न कभी ऐसे सवालों का सामना करता है।
और दुकानदार भाइयों-बहनों, आप भी परेशान मत होइए। जैसा कि एक पाठक ने लिखा, “अगर आपकी दुकान पर कोई ग्राहक सिर्फ इसलिए आता है क्योंकि उसे यहाँ से ‘प्रेरणा’ मिलती है, तो उसे अपनी ज़िंदगी पर जरूर विचार करना चाहिए!”
निष्कर्ष: अगली बार दुकान में बदलाव दिखे या न दिखे, मुस्कुराना मत भूलिए
तो दोस्तों, अगली बार जब आप अपनी पसंदीदा दुकान पर जाएं और वहाँ कुछ बदला हुआ न दिखे, तो दुकानदार से सवाल पूछने से पहले एक बार सोच लीजिए – हो सकता है, उसने आपकी सुविधा के लिए बहुत मेहनत की हो, जो आँखों से दिखाई न दे। और दुकानदारों को भी चाहिए कि वे ग्राहकों के इन सवालों को दिल पर न लें, बल्कि हँसी में उड़ा दें – आखिर, जिंदगी इतनी भी गंभीर नहीं!
आपका क्या अनुभव रहा है – कभी किसी दुकान में कोई बदलाव देखकर हैरान रह गए या ऐसे ही मजेदार सवाल पूछ डाले? कमेंट में जरूर बताइए!
मूल रेडिट पोस्ट: Refit part 2 - When we reopened