जब दफ्तर की सारी कंप्यूटरें एक साथ रीस्टार्ट करनी पड़ी: टेक सपोर्ट का देसी जुगाड़
सोचिए, ऑफिस में सैकड़ों कंप्यूटरों पर अचानक बड़ी सुरक्षा खामी आ जाए, और नियामक एजेंसी ने अगले दिन ही ऑडिट ठोक दिया हो! ऐसे में आईटी टीम के पसीने छूट जाएं तो गलत नहीं होगा। कुछ ऐसा ही हुआ 2014 में, जब OpenSSL की हार्टब्लीड बग के चक्कर में एक कंपनी की नींद उड़ गई।
अब हमारे यहां अक्सर कहते हैं न, “मुसीबत के समय दिमाग की बत्ती जलानी पड़ती है।” इसी बात को सच कर दिखाया वहां की आईटी टीम ने, और ऐसा जुगाड़ निकाला कि सारी तकनीकी दुनिया दंग रह गई!
समस्या बड़ी, पर हल और भी बड़ा – हार्टब्लीड बग का कहर
2014 में OpenSSL लाइब्रेरी में ऐसी कमजोरी उजागर हुई कि दुनिया भर के सर्वर और कंप्यूटर खतरे में पड़ गए। सारी कंपनियां सिर पकड़कर बैठ गईं। अब जिस कंपनी की कहानी है, वहां नियामक संस्था ने उसी समय सुरक्षा ऑडिट तय कर रखा था। यानी अगले दिन ऑडिटर आने वाले थे, और कंप्यूटरों में ज़रा भी चूक मिली तो मुसीबत तय थी।
कंपनी में 90% डिवाइस ‘लिनक्स थिन क्लाइंट’ थे – यानी हल्के-फुल्के, आसान से कंप्यूटर, जिनका सॉफ्टवेयर अपग्रेड करना काफी आसान था। आमतौर पर, रात में अपडेट पुश कर दो, सुबह सब नये वर्शन में अपने-आप बूट हो जाते हैं। पर इस बार गड़बड़ हो गई – कुछ कर्मचारी कंप्यूटर बंद करना भूल गए थे। और जिस ऑपरेटिंग सिस्टम का नया वर्शन था, उसमें रिमोट से रीस्टार्ट करने का फीचर ही काम नहीं कर रहा था!
देसी जुगाड़: “जब सब फेल हो जाए, तो बिजली काट दो!”
अब सैकड़ों कंप्यूटरों को एक-एक कर ढूंढकर बंद करना नामुमकिन था। ऑफिस में कई केबिन तो ताले में बंद थे, चाबी आईटी वालों के पास थी नहीं। टीम माथा पकड़कर बैठी थी कि तभी एक साथी की जुबान से निकला – “भाई, इन मशीनों की BIOS सेटिंग्स में तो ‘पावर लॉस के बाद पिछला स्टेट’ सेट है न?”
अब असली देसी जुगाड़ यहीं शुरू हुआ। जैसे हमारे यहां बिजली कटने पर सबकुछ फिर से शुरू हो जाता है, वैसे ही उन्होंने पूरा ऑफिस ही बंद कर दिया! आईटी टीम के पास बिल्डिंग के मेन पावर ब्रेकर रूम की चाबी थी। उन्होंने पूरी बिल्डिंग की बिजली काट दी, फिर चालू की। सब थिन क्लाइंट खुद-ब-खुद रीस्टार्ट हुए, नया अपडेट डाउनलोड किया, और सुबह ऑडिटर के आने से पहले हर मशीन एकदम फिट।
टिप्पणी: “बिल्डिंग को रीस्टार्ट कर दो” – इंटरनेट की राय
इस किस्से पर Reddit पर जमकर चर्चा हुई। एक कमेंट करने वाले ने तो कहा, “भैया, ये तो सबसे बड़ा ‘क्या आपने इसे बंद करके चालू किया?’ वाला किस्सा है!” (हमारे यहां भी जब कंप्यूटर अटक जाता है, तो यही सलाह मिलती है – “एक बार बंद करके चालू कर लो!”)
ऑप (मूल लेखक) ने भी लिखा – “इतने बड़े ब्रेकर स्विच को घुमाना बड़ा सुकून देने वाला था, वैसे। और फेसीलिटीज वाले भी खुश थे, बस लिफ्ट को पहले पार्क करा लिया था।”
किसी ने मजाक में कहा, “कभी-कभी तो ज़िंदगी में हर समस्या के लिए बड़ा हथौड़ा ही चाहिए!” एक और उपयोगकर्ता ने कहा, “जब कुछ न समझ आए, तो पूरी बिल्डिंग को ही रीस्टार्ट कर दो।”
कई लोगों ने तो अपने कॉलेज और दफ्तरों के किस्से भी सुनाए – “हमारे कॉलेज में भी स्टूडेंट्स कंप्यूटर बंद करना भूल जाते थे, तो आईटी वाले ब्रेकर ही गिरा देते थे।”
यहां तक कि किसी ने लिखा – “अगर आपकी कंपनी कई बिल्डिंगों में बंटी हो, तो पूरा इलाका ही ब्लैकआउट कर दो!”
सीख: जुगाड़ और इनोवेशन – भारतीय आईटी की असली ताकत
इस कहानी में एक और दिलचस्प बात थी – ऑप ने बताया कि इस घटना के बाद उन्होंने सिस्टम में ऐसा बदलाव कर दिया कि अब कोई भी यूज़र ऑफिस छोड़ते वक्त थिन क्लाइंट को चलने नहीं छोड़ सकता। जैसे ही आखिरी यूज़र लॉगआउट करता है, मशीन ऑटोमैटिकली बंद हो जाती है। इससे हर सुबह सिस्टम एकदम ताजा और अपडेटेड रहता है।
सोचिए, हमारे देश के सरकारी दफ्तरों में अगर ऐसी सख्ती आ जाए, तो कितनी बार “सर, सिस्टम डाउन है” सुनने को न मिले!
निष्कर्ष: कभी-कभी सबसे बड़ी समस्या का हल, सबसे आसान जुगाड़ में छुपा होता है
दोस्तों, तकनीक की दुनिया में हर समस्या का हल किताबों में नहीं मिलता। कई बार देसी दिमाग और थोड़ा सा साहस ही काफी होता है। जैसा कि एक कमेंट में कहा गया, “जब सब फेल हो जाए, तो लेयर-1 (यानी बिजली) की तरफ लौट जाओ।”
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा जुगाड़ू किस्सा हुआ है? ऑफिस या कॉलेज में कभी अजीब-ओ-गरीब तरीके से टेक्निकल प्रॉब्लम सॉल्व की हो? अपनी कहानी नीचे कमेंट में जरूर बताइए – हो सकता है अगली बार उसी पर ब्लॉग बन जाए!
“कंप्यूटर को रीस्टार्ट करो” – यह सलाह अब “पूरी बिल्डिंग को रीस्टार्ट करो” तक पहुंच गई है। टेक्नोलॉजी की दुनिया में जुगाड़ सबसे बड़ा गुरु है, क्या कहते हो?
मूल रेडिट पोस्ट: Stupid problems require stupid solutions.