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जब डीलरशिप ने गाड़ी छीनी, ग्राहक ने डीलरशिप का नाम ही हथिया लिया – ओहायो की अनोखी दांव-पेंच कहानी!

कार रिकवरी के बाद एक महिला का कार डीलरशिप का सामना करते हुए एनीमे चित्रण, उसकी कानूनी लड़ाई का प्रतीक।
इस जीवंत एनीमे-शैली के चित्रण में, ओहायो की एक महिला ने डीलरशिप के खिलाफ आत्मविश्वास से खड़ी होकर अपने अधिकारों को पुनः प्राप्त करने की ठानी है, जबकि उसका मामला अदालत की ओर बढ़ रहा है।

कहते हैं न, “जैसा करोगे, वैसा भरोगे!” लेकिन कभी-कभी बदला इतना जबर्दस्त होता है कि सामने वाले की नींद ही उड़ जाए। ओहायो (अमेरिका) में कुछ ऐसा ही हुआ, जब एक महिला की गाड़ी डीलरशिप ने वापस ले ली, तो उसने गाड़ी की जगह कंपनी का नाम ही अपने नाम कर डाला! सोचिए, अगर आपके पड़ोसी ने आपकी बाइक उठाकर ले जाए और बदले में आप उसकी दुकान का बोर्ड ही बदल डालें, तो कैसा लगेगा? आज हम आपको सुनाने जा रहे हैं ऐसी ही एक सच्ची, मजेदार और दिमाग घुमा देने वाली कहानी, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे—वाह, ये तो उस्ताद निकली!

गाड़ी गई तो नाम पर कब्जा – ये बदला कुछ अलग है!

ओहायो की तिया मैक्रेरी (Tiah McCreary) नाम की महिला कार खरीदने गईं Taylor Kia डीलरशिप पर। फाइनेंस मैनेजर ने झटपट लोन अप्रूव करवा दिया, और तिया जी नई चमचमाती 2022 Kia K5 गाड़ी लेकर घर आ गईं। सबकुछ बिल्कुल बॉलीवुड फिल्म जैसा—शुरुआत में सब बढ़िया।

लेकिन किस्मत को तो ट्विस्ट देना था। कुछ दिनों बाद फाइनेंस कंपनी (Global Lending Services – GLS) को लगा कि लोन के लिए जरूरी कागज पूरे नहीं हैं, तो एक महीने बाद ही डीलरशिप ने तिया की गाड़ी उठा ली—वो भी तब, जब वो ऑफिस में काम कर रही थीं! सोचिए, सुबह गाड़ी है और शाम को पता चलता है कि “मैडम, आपकी गाड़ी तो ले गए!”

अब कोई और होता तो शायद सिर पकड़कर बैठ जाता या शिकायत करके थक जाता। लेकिन तिया जी ने ठान लिया—“अगर उन्होंने मेरी गाड़ी ली, तो मैं उनका नाम ले लूंगी!” कुछ वैसा ही जैसे हिंदी फिल्मों में हीरोइन अपने प्रेमी की घड़ी पहन लेती है!

नाम रजिस्ट्रेशन की गलती – बड़ी मछली फिसल गई!

जैसे भारत में दुकान, संस्था या कंपनी के नाम का रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है, वैसे ही अमेरिका में भी नाम रजिस्टर करवाना पड़ता है। Taylor Cadillac और Taylor Automotive Group, उत्तर-पश्चिम ओहायो में कई डीलरशिप चलाते हैं और 2012 से "Taylor Kia of Lima" नाम का इस्तेमाल करते आए थे।

लेकिन तिया जी की खोजबीन में पता चला कि डीलरशिप ने अपने नाम का रिन्यूअल नहीं कराया, तो राज्य सरकार ने उनका नाम रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया! ये तो वही हुआ जैसे किसी दुकानवाले ने अपनी दुकान का लाइसेंस रिन्यू नहीं कराया, और गलती से कोई दूसरा उसे अपने नाम कर बैठा।

तिया ने चुपचाप "Taylor Kia of Lima" नाम अपने नाम से रजिस्टर करवा लिया। और फिर भेज दिया डीलरशिप को सीज-एंड-डीसिस्ट (cease-and-desist) नोटिस—“अब ये नाम मेरा है, बिना मेरी इजाजत इस्तेमाल नहीं कर सकते!” अब डीलरशिप के हाथ-पांव फूल गए, और कानूनी लड़ाई शुरू हो गई।

अदालत में उठा-पटक – इंसाफ की गली में लंबी दौड़

तिया ने डीलरशिप और फाइनेंस कंपनी दोनों के खिलाफ उपभोक्ता कानून, फर्जीवाड़ा और नाजायज कमाई जैसे आरोपों के साथ मुकदमा ठोक दिया। साथ ही कोर्ट से मांग की कि Taylor Cadillac डीलरशिप अब “Taylor Kia of Lima” नाम का इस्तेमाल बिना परमिशन के न करे।

डीलरशिप ने कहा, “मैडम ने जो कार खरीदी थी, उसके लिए साइन किया था कि कोई भी विवाद सीधे ‘बाइंडिंग आर्बिट्रेशन’ में जाएगा, यानी कोर्ट-कचहरी नहीं।” अदालत ने पहले डीलरशिप की बात मान भी ली, लेकिन तिया हार मानने वालों में से नहीं थीं। उन्होंने ऊपरी कोर्ट में अपील कर दी।

ऊपरी कोर्ट ने तिया की दलील मानी कि “नाम रजिस्ट्रेशन का विवाद कार खरीद से अलग है।” यानी, गाड़ी का मामला भले ही आर्बिट्रेशन में जाए, लेकिन नाम का मामला फिर से कोर्ट में चलेगा। अब मामला वापस कोर्ट में पहुंच गया है—यानि ‘पिक्चर अभी बाकी है, मेरे दोस्त!’

ऑनलाइन जनता का हंगामा – “शतरंज खेली है, लूडो नहीं!”

रेडिट पर इस कहानी ने धमाल मचा दिया। एक यूजर ने लिखा, “यह तो शतरंज की चाल है, लूडो नहीं!” (Chess not checkers.) वहीं दूसरे ने मजाकिया अंदाज में कहा, “जब सामने वाला नीचता दिखाए, तो UNO का रिवर्स कार्ड, स्किप और वाइल्ड ड्रॉ 4 सब फेंक दो!”

एक और कमेंट था, “नाम रिन्यूअल करना भूल गए? कोई तो नौकरी से जाएगा!” किसी ने तिया जी की बहादुरी की तारीफ करते हुए कहा, “ऐसे हीरो हमें चाहिए!”

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय समाज में भी बहुत बार नाम, दुकान, या वेबसाइट रजिस्ट्रेशन की गलती के किस्से होते हैं। जैसे कोई होटलवाला अपनी ब्रांडिंग की रिन्यूअल भूल जाए, और पड़ोसी उसी नाम से दुकान खोल ले। या कोई वेबसाइट का डोमेन रिन्यू ना हो, तो कोई चालाक बंदा उसे हथिया ले और फिर अच्छे पैसे लेकर बेचे!

एक यूजर ने तो मजाक में लिखा, “इस नाम को किसी डांस बार को बेच दो, वहां कम से कम कोई आपको ‘स्क्रू’ नहीं करेगा!” और एक ने तिया को सलाम करते हुए कहा, “ऐसी चालाकी तो देखने लायक है!”

क्या भारत में भी हो सकता है ऐसा?

हमारे यहां भी कई बार बैंक, दुकान या बिल्डर ग्राहकों के साथ अजीब चालें चलते हैं। लेकिन तिया जैसी हिम्मत कम ही लोग दिखा पाते हैं। कई बार लोग सोचते हैं कि “अरे, हम क्या कर सकते हैं, कोर्ट-कचहरी तो बड़ी बात है।” लेकिन तिया की तरह ठान लिया जाए और कानून का इस्तेमाल समझदारी से किया जाए, तो बड़े-बड़ों की नींद उड़ सकती है!

सोचिए, अगर आपके मोहल्ले का किराना वाला आपकी एडवांस राशन की थैली फेंक दे, और आप उसके दुकान का नाम ही अपने नाम से रजिस्टर कर लें—तो मोहल्ले में कैसी चर्चा होगी!

निष्कर्ष – सीख और मनोरंजन, दोनों

इस कहानी से ये सीख मिलती है कि जब अन्याय हो, तो चुप बैठना जरूरी नहीं। कानून और सिस्टम की थोड़ी समझ, थोड़ी हिम्मत और थोड़ा दिमाग, बड़े से बड़े डीलर या कंपनी को भी चित कर सकता है। और हां, कभी भी अपने नाम, दुकान, या ब्रांड का रिन्युअल भूलना मत—वरना कोई ‘तिया’ आपके नाम पर ही धावा बोल सकता है!

आपको ये कहानी कैसी लगी? क्या आप कभी ऐसी चालाकी का शिकार हुए हैं, या खुद कभी किसी बड़े को मात दी है? कमेंट में जरूर बताएं, और अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई हो तो शेयर करें—शायद आपके किसी दोस्त को भी कानून की ये चाल सीखने को मिल जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: Dealership Repossesses Customer’s Car, Customer Responds by Taking Dealership’s Name