जब ड्रायर में मार्स चॉकलेट ने कर दी मीठी-सुहानी बदला-लीला
अगर आपने कभी हॉस्टल, पीजी या ऑफिस कैंप में रहकर कपड़े धोए हैं, तो आपको पता होगा कि वॉशिंग मशीन या ड्रायर के लिए कैसे-कैसे जुगाड़ करने पड़ते हैं। और अगर बात हो किसी दूर-दराज़ की खनन साइट (माइनिंग साइट) की, तो कहानी में ट्विस्ट और भी मजेदार हो जाता है!
आज की ये किस्सा भी कुछ ऐसा ही है, जिसमें कपड़ों के साथ-साथ दो मार्स चॉकलेट ने भी अपनी भूमिका निभाई और एक घमंडी सुपरवाइज़र को मिला अपनी करनी का मीठा—और चिपचिपा—जवाब।
खनन स्थल के कपड़े, मशीन और ‘जुगाड़’ का संघर्ष
भारत में अक्सर रेलवे कॉलोनी, सरकारी क्वार्टर या किसी निर्माण स्थल पर अगर अस्थायी व्यवस्था हो, तो कपड़े धोने की मशीन पर कब्जा जमाना किसी ओलंपिक खेल से कम नहीं होता। वहाँ भी कुछ ऐसा ही माहौल था—12-12 घंटे की शिफ्ट, सातों दिन काम, और हफ्तों तक घर की शक्ल नसीब नहीं।
कपड़े धोने की मशीन 25 मिनट में काम निपटाती थी, लेकिन ड्रायर में 90 मिनट लगते थे। यानी, जब तक एक बैच सूखे, तीन-चार लोग लाइन में लग जाते। ऊपर से, जैसे हमारे यहाँ कोई कपड़े मशीन में डालकर भूल जाता है, वैसे ही वहाँ भी लोग बीयर पीकर या थककर कपड़े निकालना भूल जाते थे।
‘अनौपचारिक नियम’ ये था कि किसी के कपड़े सूख गए हों तो उठा कर बेंच पर रख दो, ताकि मशीन खाली हो जाए। लेकिन कुछ लोग जल्दी में गीले कपड़े भी निकाल देते थे—जैसे हमारे यहाँ बिन सूखे कपड़ों को रस्सी पर टांग देते हैं, वैसे ही वहाँ बेंच पर पटक देते थे।
सुपरवाइज़र की गुस्से वाली एंट्री और ‘चॉकलेटी’ बदला
कहानी में असली ट्विस्ट तब आया जब एक सुपरवाइज़र—नाम था रिचर्ड—अपना ड्रायर देखने आया। वहाँ उसके कपड़े नहीं थे, बल्कि किसी और के कपड़े घूम रहे थे। उसके अपने कपड़े एक गीले ढेर के रूप में बेंच पर पड़े थे। सोचिए जरा, 12 घंटे की शिफ्ट के बाद गीले कपड़े देखकर किसका पारा नहीं चढ़ेगा?
रिचर्ड को गुस्सा आया, मगर वह चुपचाप बाहर चला गया। लोग सोच रहे थे, शायद मामला खत्म। लेकिन असली मजा तो अब शुरू हुआ! कुछ मिनट बाद रिचर्ड लौटकर आया, दो मार्स चॉकलेट लेकर। उसने दोनों को फाड़ा, ड्रायर में कपड़े के ऊपर फेंका, और 90 मिनट का हाई हीट टाइमर सेट कर दिया। यानी, अब कपड़ों के साथ-साथ चॉकलेट भी तंदूरी बनकर निकलेगी!
कमेंट्स में मची धूम: “ये तो शैतानी का शिखर है!”
जब ये कहानी Reddit पर आई, तो लोगों ने अपनी-अपनी राय दी। एक यूज़र ने मजाकिया अंदाज में कहा, “ये तो शैतानी का शिखर है! ड्रायर में पिघली चॉकलेट हमेशा के लिए छाप छोड़ जाती है—सख्त लेकिन जायज बदला।”
दूसरे ने चिंता जताई, “अब अगला बेचारा, जो ड्रायर यूज करेगा, उसके कपड़े भी चॉकलेट से सराबोर हो जाएंगे! क्या ये सही है कि किसी एक की गलती की सजा दूसरों को भी मिले?”
एक और कमेंट ने मजेदार सुझाव दिया—“अगर कपड़े निकालने का बदला लेना ही था, तो बाल्टी में पानी भर के उसमें डाल देते। लेकिन भाई ने तो सीधा चॉकलेट का जुगाड़ लगाया!”
भारत में भी अक्सर ऐसे बदले देखने को मिल जाते हैं—कई हॉस्टल वाले दूध में नमक या मिर्च डाल देते हैं, कोई चाय में बिस्कुट डुबोकर बदला लेता है। Reddit पर एक और यूज़र ने बताया, “हमारे कैंप में दूध चोरी करने वाले के दूध में नमक डाल दिया गया था, फिर जो हुआ वो देखने लायक था!”
सबक और सोच: “हमेशा कोई बड़ा सिरफिरा मिल ही जाता है!”
कहानी का असली मजा तो तब आया जब लोगों ने कहा—“हीरो तो वो है जो बिना कुछ कहे मीठा बदला ले, लेकिन असली सबक ये है कि दुनिया में हमेशा कोई और बड़ा सिरफिरा मिल ही जाता है।”
एक और कमेंट ने चुटकी ली, “मार्स चॉकलेट का तो बेड़ा गर्क हो गया, लेकिन असली मजा तो उस ‘कॉक-वॉम्बल’ (यानि घमंडी/बेबाक इंसान) के चेहरे पर देखने लायक होगा, जब उसके कपड़े चॉकलेट में लथपथ निकलेंगे!”
अंत में: आपकी बदला-लीला क्या है?
कहानी पढ़कर आपको भी अपने हॉस्टल, ऑफिस या परिवार की कोई बदला-लीला जरूर याद आई होगी। बताइए, आपके साथ ऐसा कभी हुआ है? या आपने भी कभी कोई ‘मार्स चॉकलेट’ वाला जुगाड़ किया है?
कमेंट में जरूर साझा करें, हंसना-मुस्कराना तो बनता है!
याद रखिए—कपड़े हों या रिश्ते, जरा-सी लापरवाही मीठा ही नहीं, चिपचिपा भी कर सकती है।
तो अगली बार जब ड्रायर में कपड़े डालें, ध्यान रहे—कहीं कोई रिचर्ड आपकी भी चॉकलेटी शाम न बना दे!
मूल रेडिट पोस्ट: Sweet, sweet, chocolaty revenge.