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जब टीवी का रिमोट बना भाई, और बहन की म्यूज़िकल शरारत पर लग गई ब्रेक!

भाई-बहन टीवी देख रहे हैं, कार्टून और गाने वाले शो के बीच पसंद चुनते हुए।
एक अनौपचारिक क्षण भाई-बहन की प्रतिस्पर्धा और समझौते की भावना को दर्शाता है, जब एक बच्चा उत्सुकता से कार्टून देखता है जबकि दूसरा गाने वाले शो का आनंद लेता है। यह फोटो यथार्थवादी चित्रण परिवारों के बीच स्क्रीन टाइम साझा करने की पुरानी चुनौतियों को बखूबी दिखाता है।

भाई-बहन की लड़ाईयों का कोई जवाब नहीं! कभी चॉकलेट के लिए झगड़ा, तो कभी टीवी के रिमोट को लेकर मैदान-ए-जंग। आजकल के बच्चे तो नेटफ्लिक्स और मोबाइल की दुनिया में डूबे रहते हैं, लेकिन 90s या 2000s के शुरुआती दौर में एकमात्र मनोरंजन का साधन था – घर का टीवी। और उस पर भी अगर घर में छोटा भाई या बहन हो, तो समझो रिमोट की लड़ाई आम बात थी।

आज हम एक ऐसी ही मज़ेदार Reddit कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिसमें एक बड़े भाई ने अपनी छोटी बहन की "गानों वाली" जिद के आगे एक ऐसा दांव चला, कि घरवालों के बनाए नियम ही बदल गए!

भाई-बहन के टीवी युद्ध: हर घर की कहानी

हर भारतीय घर में ये सीन आम है – टीवी पर कौन सा कार्यक्रम चलेगा, इस पर महायुद्ध! कभी मम्मी का पसंदीदा धारावाहिक, तो कभी पापा का क्रिकेट मैच। और बच्चों के लिए – या तो कार्टून या कोई मस्ती भरा गाना। Reddit यूज़र u/LilacSoba की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

उनके घर में एक नियम था: "अगर टीवी देखना है, तो छोटी बहन को भी साथ में बैठने देना होगा।" अब आप सोचिए, 10 साल का लड़का, जिसे कार्टून देखना पसंद, और उसकी छोटी बहन, जो हर वक्त वही गाने वाले बच्चों के शो देखना चाहती है, जैसे हमारे यहाँ 'बाल गीत' या 'चुन्नु-मुन्नु का शो'। नतीजा – रोज़ाना बहस!

चालाकी का पंच: जब भाई बना ‘इंटेलिजेंट रिमोट’

अब रोज़-रोज़ की लड़ाई से तंग आकर, भाई साहब ने एक दिन शनिवार की सुबह बड़ी चालाकी दिखाई। बहन को टीवी के सामने बिठाया और खुद रिमोट लेकर बैठ गए। लेकिन कार्टून या गानों वाले शो की जगह उन्होंने लगा दिया – चींटियों पर डॉक्युमेंट्री! जी हाँ, वो भी बिलकुल गंभीर अंदाज़ में, जैसे Discovery Channel पर जानवरों की दुनिया दिखाते हैं।

भाई ने हर सीन को ऐसे एक्सप्लेन किया जैसे वो सबसे रोमांचक चीज़ हो – "देखो बहन, ये चींटियाँ कैसे अपनी रानी के लिए खाना जमा करती हैं..."। लेकिन छोटी बहन का धैर्य बस 6 मिनट चला, और फिर वो खेलने भाग गई। पापा ने झाँक कर देखा, बहन जा रही है, तो पूछ लिया – "टीवी क्यों चल रहा है?" भाई ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया – "बहन नहीं देखना चाहती।"

अब ये चाल इतनी जबरदस्त थी कि उसके बाद पूरे समर वेकेशन में 'बहन को साथ बैठाना ज़रूरी' वाला नियम ही घर से गायब हो गया। भाई के लिए फिर से कार्टून का मैदान खुल गया!

कम्युनिटी की प्रतिक्रिया: मज़ेदार और दिलचस्प टिप्पणियाँ

Reddit कम्युनिटी में इस किस्से पर लोगों ने खूब मज़े लिए। एक यूज़र ने लिखा – "पापा ने तो ऐसा जताया जैसे बहन के बिना तुम्हें टीवी देखने का कोई हक ही नहीं था!" कई लोगों ने मज़ाक में सुझाव दिया कि अगर डरावनी डॉक्युमेंट्री चला देते तो शायद बहन कभी दोबारा टीवी के पास ही न फटके। लेकिन खुद भाई (OP) ने माना – "अगर डरावना कुछ लगाता, तो बहन चीखती और पापा पकड़ लेते कि मैं चालाकी कर रहा हूँ।"

एक और यूज़र ने कहा, "ये चींटियों वाली डॉक्युमेंट्री असल में बच्चों के लिए बड़ी 'सीरियस' हो सकती है – कभी-कभी तो ये भी डरावनी होती हैं!" इसकी पुष्टि करते हुए एक सदस्य ने अपने अनुभव साझा किए – "मैंने 10 साल की उम्र में एक ऐसी ही डॉक्युमेंट्री देखी थी, अच्छा नहीं लगा।"

एक बुजुर्ग यूज़र ने अपने बचपन की यादें ताज़ा कर दीं – "हमारे जमाने में तो चैनल बदलने के लिए खुद टीवी तक जाना पड़ता था, रिमोट जैसी कोई चीज़ नहीं थी। और घर में सिर्फ 5-6 चैनल आते थे!" किसी ने तो यहाँ तक लिख दिया, "मैं ही रिमोट था, और मेरा भाई एंटीना!"

भारतीय परिवारों में भी यही हाल रहता है – कभी बहन को रिमोट मिलता है, तो भाई को एंटीना सीधा करना पड़ता है; कभी चाय लाने की जिम्मेदारी, तो कभी चैनल बदलने की। ये छोटी-छोटी बातें ही तो बचपन की यादों में मिठास घोल देती हैं।

सीख क्या मिली? और आपकी कहानी क्या है?

इस कहानी में साफ है – कभी-कभी बच्चों की मासूम चालाकी बड़ों के बनाए नियमों को भी बदल सकती है। भाई ने न बहन को दुखी किया, न घरवालों को नाराज़ किया, बस स्मार्टली समस्या का हल निकाल लिया।

इससे यह भी झलकता है कि हर घर की बहन-भाई वाली लड़ाइयाँ एक जैसी ही होती हैं – चाहे अमेरिका हो या भारत। और ऐसी कहानियों में छुपा होता है बचपन का अनमोल खजाना।

अब आप बताइए – आपके घर में टीवी या मोबाइल को लेकर ऐसी कोई जंग हुई है? क्या आपने भी कभी अपने भाई-बहन को चकमा दिया है? या कभी खुद शिकार बने हैं? कमेंट में ज़रूर साझा करें, क्योंकि आपकी कहानी भी किसी की हँसी का कारण बन सकती है!

आख़िर में, एक बात तो पक्की है – बचपन की मस्ती, भाई-बहन की तकरार, और टीवी की लड़ाई, ये सब यादें ही तो ज़िंदगी को रंगीन बनाती हैं।


मूल रेडिट पोस्ट: If you’re going to watch TV, you have to include your little sister.