जब टीम लीड बना 'बिल', और असली हीरो की पोल खुल गई!
ऑफिस की दुनिया में अक्सर ऐसा होता है कि काम करने वाले की मेहनत दिखती नहीं, और जो दिखता है वो असल में कितना काम करता है, ये किसी को पता नहीं चलता। खास तौर पर जब बात आती है 'कितने टास्क पूरे किए', तब तो गिनती का खेल और भी दिलचस्प हो जाता है। आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें असली टैलेंट को टीम लीड की जलन और गिनती के खेल ने उलझा दिया, पर अंत में जीत उसी की हुई जिसे आना था।
असली काम करने वाला और गिनती का खेल
हमारे हीरो (मान लीजिए इनका नाम अमित है) एक बड़ी एंटरटेनमेंट सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करते हैं। उनकी टीम छोटी है, लेकिन नाम बड़ा है। अमित को टीम लीड बनने का कई बार ऑफर मिला, पर हमारे भाई को मीटिंग और लोगों को आदेश देना पसंद नहीं, इसलिए हर बार मना कर देते हैं। अमित का फोकस सिर्फ अपने काम पर रहता है – सिर झुकाकर, बिना किसी ड्रामे के, शांति से काम करना।
अमित की खासियत ये है कि उन्हें सबसे टेढ़े, बड़े और दिमागी टास्क दिए जाते हैं, जिनमें बाकी टीम के लोग हाथ डालने से भी डरते हैं। बाकी टीम के लोग – जिनमें टीम लीड भी शामिल है – छोटे-छोटे, जल्दी खत्म होने वाले टास्क अपनी मर्जी से चुन लेते हैं। टास्क असाइन करने का सॉफ्टवेयर भी थोड़ा 'जुगाड़ू' है – हर टास्क की मिनिमम टाइमलाइन एक दिन की दिखाता है, जबकि कई काम तो आधे घंटे में भी हो जाते हैं। यानी, टास्क काउंट की गिनती कई बार धोखा देती है।
नया टीम लीड – बिल का जलवा और असली पोल
कुछ समय पहले टीम लीड ने इस्तीफा दे दिया। कंपनी ने फिर अमित को ऑफर दिया, मगर उन्होंने फिर मना कर दिया। अब टीम लीड बना 'बिल' – जो तकनीकी मामलों में कच्चा है, लेकिन अपनी पॉवर दिखाने का बड़ा शौक है। बिल को लगता है कि उसे अमित पर कंट्रोल नहीं है, जबकि हकीकत ये है कि अमित के टास्क सीधे प्रोजेक्ट मैनेजर असाइन करते हैं।
अमित छुट्टी से लौटते हैं तो बिल उन्हें 1-on-1 मीटिंग में बुलाता है। वहाँ बिल ने एक एक्सेल शीट तैयार की है जिसमें हर टीम मेंबर के पूरे किए टास्क की गिनती है। बिल खुद 150 टास्क गिना रहा है, अमित के नाम सिर्फ 20। बिल कहता है, "ये नंबर बढ़ाओ नहीं तो PIP (परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान) पर डाल दूँगा!"
अमित ने समझाने की कोशिश की कि उनके टास्क बड़े और जटिल होते हैं, पर बिल को तो बस गिनती चाहिए थी। अमित ने पूछा – "भाई, मेरे टास्क में हाथ लगाओगे?" बिल ने तुरंत मना कर दिया। लेकिन गिनती का खेल तो खेलना ही था।
'मालिशियस कम्प्लायंस' – जब अमित ने दिखाया असली दम
अब आया असली ट्विस्ट! अमित ने बिल के बनाए हुए एक्सेल में से छोटे-छोटे टास्क चुनना शुरू कर दिया – बिलकुल वैसे जैसे बिल खुद करता था। पहले ही दिन अमित ने 95 टास्क निपटा दिए! दूसरे दिन 65 और। दो दिन में ही उन्होंने बिल के 6 हफ्तों के बराबर काम कर दिया, वो भी कहीं ज्यादा तेजी से।
ऑफिस की गलियों में कहावत है – "मालिक बोले जितना काम, उतना करो, पर मालिक को दिखे भी तो सही!" अमित ने ये बात सच कर दिखाई। मजेदार बात ये रही कि बिल के खुद के टास्क वही 5 मिनट वाले छोटे-छोटे काम थे, जिनमें कोई दिमाग नहीं लगाना पड़ता था। बाकी टीम मेंबर भी 70-120 टास्क तक ही पहुँचे थे। अमित ने तो दो दिन में ही पूरा मैदान साफ कर दिया।
कम्युनिटी के कमेंट्स – 'पीटर प्रिंसिपल' और ऑफिस के 'बिल'
रेडिट कम्युनिटी में एक कमेंट था – "बिल अपनी नालायकी की सीमा तक पहुँच चुका है!" (इसे अंग्रेज़ी में 'Peter Principle' कहते हैं, यानी जो अपनी काबिलियत की आखिरी हद तक पहुँच जाए, उसके बाद बस कुर्सी पर बैठा रह जाए)। एक और मजेदार कमेंट था – "अब तो अमित को बिल को धन्यवाद कार्ड भेजना चाहिए, प्रमोशन दिलाने के लिए!"
एक और पाठक ने लिखा – "ऑफिस में गिनती की बजाय असली काम का असर देखना चाहिए, वरना तो सब 'बिल' बन जाएंगे!" कोई बोला – "मेरे ऑफिस में भी ऐसा ही 'आलन' था, जो बस गिनती देखकर लोगों को सताता था, असलियत में कुछ समझता नहीं था।"
कई लोगों ने ये भी कहा कि ऐसे 'मेट्रिक्स' यानी गिनती वाली संस्कृति में अक्सर असली टैलेंट दब जाता है, लेकिन जब सही मौका आता है, तो सबके सामने पोल खुल जाती है।
जब मेहनत का असली फल मिला
कहानी का क्लाइमेक्स और भी मजेदार था। दो दिन में ही अमित की परफॉर्मेंस देखकर, बिल के बॉस ने खुद अमित को प्रमोशन दे दिया – अब वो 'सीनियर' बन गए, सैलरी बढ़ गई, और बिल की जगह सीधे बॉस को रिपोर्ट करने लगे। बिल बेचारा वहीं का वहीं रह गया, शायद अब उसे भी समझ आ गया होगा कि गिनती से ज्यादा जरूरी है असली काम की अहमियत।
निष्कर्ष – गिनती से नहीं, गुणवत्ता से बनती है पहचान!
तो साथियों, इस कहानी से एक बात साफ है – ऑफिस में सिर्फ गिनती नहीं, असली काम और उसकी गुणवत्ता मायने रखती है। 'बिल' जैसे लोग हर दफ्तर में मिल जाते हैं, जो दिखावे के चक्कर में खुद ही फँस जाते हैं। हमारे अमित जैसे लोग, जो सिर झुकाकर मेहनत करते हैं, आखिर में जीत उनकी ही होती है।
आपके ऑफिस में भी कभी ऐसा कोई 'बिल' आया है? या खुद कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है? नीचे कमेंट में जरूर बताइए – आपकी कहानी भी किसी को सीख दे सकती है, और शायद हँसी भी!
मूल रेडिट पोस्ट: You want me to complete more tasks? Not a problem, boss.