जब टेक्नोलॉजी के जादूगर ने बिना कुछ किए सब ठीक कर दिया!
कभी-कभी ज़िंदगी में ऐसे मौके आते हैं जब लगता है कि कोई अदृश्य शक्ति हमारे साथ है। जैसे कि किसी ने ऊपर से 'सब ठीक हो जा' का बटन दबा दिया हो। ऐसी ही एक कहानी है टेक्नोलॉजी के जादूगर और उनके 'गौरव मंडल' की, जो किसी शनि-मंगल के असर से कम नहीं!
टेक सपोर्ट का अपना देसी सुपरहीरो
हमारे नायक हैं एक लोकल डेली (छोटी रेस्टोरेंट) के टेक्निकल सपोर्ट गुरु, जिनका नाम ASCII122 है। भाई साहब ने अपने दोस्त की दुकान का पूरा POS सिस्टम (जहाँ से ऑर्डर और पेमेंट होते हैं) और नेटवर्क सेटअप किया है। बदले में हर महीने एक छोटी-सी फीस मिलती है और दुकान के हर कर्मचारी को उनका नंबर भी मिल गया है, ताकि किसी भी तकनीकी झंझट में वो 'सुपरमैन' की तरह बुलाए जा सकें।
रविवार की सुबह, जब बाकी लोग आलू के पराठे और चाय का मजा ले रहे थे, तभी एक घबराया हुआ मैसेज आया— "इंटरनेट नहीं चल रहा, ऑर्डर नहीं ले पा रहे, कार्ड पेमेंट बंद है, सब गड़बड़ है!" अब भाई साहब उस वक्त कोई मस्त ऑफिस में नहीं, बल्कि पानी शुद्धिकरण संयंत्र (water treatment plant) में काम कर रहे थे। उनके पास बस आधा घंटा था, लेकिन दोस्ती निभानी थी, तो अपनी पुरानी टॉयोटा पिकअप उठाई और चल पड़े डेली की ओर।
जादूगर की एंट्री और तकनीकी चमत्कार
डेली के दरवाज़े पर बड़ा सा 'केवल नकद' (CASH ONLY) का बोर्ड, अंदर कर्मचारी ऐसे परेशान जैसे बोर्ड एग्जाम में पेपर मिस हो गया हो। नायक ने न लैपटॉप निकाला, न कोई बड़ा औजार—बस अपने फोन से वाईफाई कनेक्ट किया, इंटरनेट स्पीड चेक की—बिल्कुल 400 mbps की रफ्तार! सबकुछ एकदम सही। फिर POS पर जाकर 'रिफ्रेश' दबाया—ऑर्डर लेने की मशीन चालू। एक पैकेट चिप्स खरीदा, कार्ड स्वाइप किया—पेमेंट भी हो गया। सब हरा-भरा!
डेली के स्टाफ की आँखों में चमक आ गई, जैसे कोई तांत्रिक आकर भूत भगा गया। मजे की बात—हमारे जादूगर ने कुछ किया ही नहीं! शायद ISP का नेट कुछ देर के लिए गया था और जैसे ही गुरु दरवाजे से घुसे, सिस्टम को भी डर लग गया—"अब तो ठीक होना ही पड़ेगा!"
तकनीकी जादू या बस किस्मत?
Reddit पर इस कहानी ने खूब वाहवाही बटोरी। एक यूज़र ने लिखा, "हमारे शहर में एक कंप्यूटर दुकानदार थे, जिन्हें लोग 'पाई हनिबल' कहते थे। कंप्यूटर को बस वो छू लेते, और वो ठीक हो जाता।" कुछ लोगों ने इसे 'भूत भगाने' जैसा भी बताया—मशीनें जैसे डर के मारे सुधर जाती हैं!
एक कमेंट में तो यह भी कहा गया कि "मशीनें जानती हैं कि मैं हथौड़ा कहाँ रखता हूँ, इसलिए डर के मारे ठीक हो जाती हैं!" किसी ने तो ये तक मान लिया कि टेक्निकल गुरु के आने से 'तकनीकी बुरी आत्माएँ' भाग जाती हैं और सिस्टम एकदम दुरुस्त हो जाता है।
ASCII122 खुद कहते हैं, "मज़ा तब आता है जब मशीनें मेरे सामने ठीक हो जाती हैं, लेकिन मेरे जाते ही फिर बिगड़ जाती हैं। उस वक्त तो लगता है, जैसे मैं जादूगर हूँ और सिस्टम मेरे डर से ही चलते हैं।"
मुफ्त के सैंडविच और 'फेमस हीरो' की दावत
अब सबसे जरूरी सवाल—मुफ्त में क्या मिला? भाई साहब को डेली से एक 'फेमस हीरो' सैंडविच मिला, जिसमें चौथाई पाउंड हैम, टर्की, दो-दो तरह के चीज़, प्याज, अचार, जलेपीनो, स्प्राउट्स, मेयोनीज़, सरसों—यानि पूरा 'शाही भोज'! इस पर सबका कहना था, "ऐसी किस्मत हो तो हर रविवार शुभ हो जाए!"
क्या है इस 'जादू' का राज़?
कई बार हम अपने ऑफिस या दुकान में देखते हैं कि जैसे ही IT वाला या 'मशीन का डॉक्टर' आता है, सब अपने-आप ठीक हो जाता है। क्या यह वाकई कोई तकनीकी जादू है? या फिर बस किस्मत? एक कमेंट में किसी ने लिखा, "कभी-कभी तो बस कॉल कर दो, मशीनें डर के मारे ठीक हो जाती हैं।"
हमारे देश में भी 'पंडित जी' के आते ही बिजली आ जाना, या प्लंबर के पहुंचते ही पानी की टंकी खुद-ब-खुद भर जाना, आम बात है। शायद तकनीक भी इंसानों की तरह ही 'रिश्ते' समझती है—जिससे डर लगे, उसके सामने बिगड़ना नहीं!
अंत में—क्या आपके साथ भी हुआ है ऐसा जादू?
तो अगली बार जब आपकी दुकान या ऑफिस में कंप्यूटर/नेटवर्क खुद-ब-खुद ठीक हो जाए, तो समझ जाइए—आपके पास भी कोई 'टेक्नोलॉजी का जादूगर' है, या फिर आपकी किस्मत बहुत शानदार है! और हाँ, अगर कभी मुफ्त का सैंडविच या समोसा मिल जाए, तो उसे भी किस्मत का जादू ही मानिए।
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि किसी एक्सपर्ट के सामने आते ही सब ठीक हो गया हो? या फिर उल्टा—उनके जाते ही फिर से सब गड़बड़? नीचे कमेंट में अपनी मजेदार कहानियाँ ज़रूर शेयर करें!
मूल रेडिट पोस्ट: Another Magic Geek Aura story from yesterday at the local deli