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जब टिकट बनाना बना आईटी सपोर्ट का सबसे बड़ा सिरदर्द

तकनीकी सहायता एजेंट का 3D कार्टून चित्र, ग्राहक की फोन पर मदद करते हुए।
इस रंगीन 3D कार्टून दृश्य में, हमारा मित्रवत IT हेल्प डेस्क एजेंट चुनौतीपूर्ण कॉल का सामना कर रहा है, ग्राहक की तकनीकी समस्याओं में मदद के लिए तत्पर।

अगर आपने कभी अपने ऑफिस में आईटी डिपार्टमेंट से मदद ली है, तो आपको पता होगा कि "टिकट बनवाना" किसी त्योहार पर लाइन में लगने जैसा है। आप सोचते हैं बस एक छोटा सा सवाल है, लेकिन आईटी वाले बिना टिकट के आगे बढ़ते ही नहीं! आज हम एक ऐसी ही आईटी सपोर्ट की कहानी लेकर आए हैं, जिसमें एक ग्राहक अपनी कंप्यूटर की छोटी-छोटी उलझनों के साथ आईटी हेल्पडेस्क का सिर खा रही थी।

टिकट का चक्कर और ग्राहक की झंझट

कहानी कुछ यूँ शुरू होती है: आईटी हेल्पडेस्क पर फोन आता है। सामने से एक महिला ग्राहक—जिन्हें हर चीज़ पर पूरी पकड़ चाहिए—पूछती हैं, "भैया, मेरी डेस्कटॉप फोल्डर की आइकन डुप्लिकेट क्यों हो रही हैं?" आईटी वाले भैया ने बड़े धैर्य से जवाब दिया, "मैडम, ये तो शॉर्टकट है, आपका असली डेस्कटॉप वही है, बस यहां भी वही फाइल्स दिख रही हैं।"

पर मैडम कहाँ मानने वाली थीं! उन्हें तो चाहिए था कि डेस्कटॉप क्विक एक्सेस फोल्डर में सिर्फ वही फाइल्स रहें जो डेस्कटॉप पर नहीं हैं। अब भैया के पास इसका कोई जुगाड़ नहीं था, सो उन्होंने अगले स्तर—टियर 2—को मामला सौंप दिया!

टिकट-दर-टिकट: मदद या सिरदर्द?

अब आईटी वाले भैया सोच ही रहे थे, तभी मैडम ने दूसरा सवाल दाग दिया: "मुझे बताएं, OneDrive में कितना डाटा बचा है?"
भैया ने समझाया, "मैडम, कंपनी अकाउंट में 25TB की लिमिट है, आपके लिए तो लगभग अनलिमिटेड है, चिंता ना करें।"
पर मैडम का सवाल था, "बाकी कितना बचा है?"
अब भैया सोच रहे थे, 'ये तो वही बात हुई जैसे कोई पूछे, बैंक में कितना कागज़ बचा है, नोट छपने के लिए!'
आखिरकार, उन्हें फिर से एक नया टिकट बनाना पड़ा और मैडम को OneDrive टीम के हवाले करना पड़ा।

फिर आया तीसरा सवाल, "वाई ड्राइव में ये आइकन का मतलब क्या है?"
तीसरा टिकट बन गया।
अब मैडम को मेल मिलने लगी—"आपके लिए नया टिकट बना दिया गया है..."
मैडम परेशान, "हर बात पर टिकट क्यों बना रहे हैं? मैं तो बस पूछ रही थी।"
आईटी भैया बोले, "मैडम, ये हमारी कंपनी की नीति है, हर समस्या के लिए अलग टिकट बनानी होगी। रिकॉर्ड रखना जरूरी है।"

ग्राहक की उम्मीदें और आईटी सपोर्ट का दर्द

इस कहानी में Reddit कम्युनिटी के कई मेंबर्स ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। एक यूज़र ने कमेंट किया, "कुछ लोग तो हर छोटी बात पर कस्टमाईज़ेशन चाहते हैं, चाहे वो ऑपरेटिंग सिस्टम का फिक्स्ड फंक्शन हो या कंपनी की सख्त पालिसी!"
एक और मज़ेदार कमेंट था, "जैसे कोई कहे—मैंने आपके यहाँ से आईना खरीदा था, अब उसमें मेरी किताबें डुप्लिकेट हो गई हैं, प्लीज़ हटाइए!"
इसी तरह, कई लोग बोले कि बदलाव आते ही यूज़र्स का दिमाग घूम जाता है—जैसे Teams या Outlook में थोड़ा सा बदलाव हुआ नहीं कि ऑफिस का माहौल किसी भारतीय शादी की बारात जैसा हो जाता है—हर कोई परेशान, कोई डीजे बदलने को कह रहा, तो कोई मिठाई की शिकायत कर रहा!

एक और अनुभवी आईटी एडमिन बोले, "कई बार यूज़र्स इतना अजीब अनुरोध करते हैं कि लगता है जैसे उन्हें कंप्यूटर से ज़्यादा खुद की राय पर भरोसा है। एक यूज़र ने बोला, 'मेरी राय में तो ये ऐसे होना चाहिए', मैंने कहा, 'शायद Microsoft इंजीनियरों की राय अलग है।'"
किसी ने तो ये भी कह दिया—"दो ब्रेनसेल्स, तीसरे की जगह के लिए लड़ रहे हैं!"

टिकट बनाना—जरूरी, लेकिन क्यों?

कई बार हम सोचते हैं कि आईटी वाले इतनी फॉर्मेलिटी क्यों निभाते हैं। असल में, ऑफिस संस्कृति (चाहे वो भारत हो या विदेश) में रिकॉर्ड रखना बहुत जरूरी होता है। अगर हर समस्या का ट्रैक न रखा जाए, तो बाद में कोई पूछताछ या ऑडिट आए तो सब गड़बड़ हो जाएगा।
जैसे हमारे देश में सरकारी दफ्तरों में हर काम की फाइल बनती है, वैसे ही आईटी वालों के लिए हर शिकायत का टिकट बनाना अनिवार्य है।
एक Reddit यूज़र ने सलाह दी, "कॉल के बाद टिकट बनाओ, ताकि यूज़र को कम नोटिफिकेशन आए।"
दूसरे बोले, "यूज़र तो अपना ऑफिस कंप्यूटर भी अपनी निजी जायदाद समझते हैं—स्टिकर चिपका दिए, बच्चों की फोटो लगा दी। समझाना पड़ता है कि भाई साहब, ये कंपनी की संपत्ति है!"

निष्कर्ष: आईटी सपोर्ट—सब्र का इम्तिहान!

तो दोस्तों, अगली बार जब भी आप आईटी हेल्पडेस्क को फोन करें, ज़रा सोचिए—आपका छोटा सा सवाल, उनके लिए टिकटों का पहाड़ बन सकता है!
और आईटी वालों के लिए—आपका धैर्य भारत के रेलवे टीटीई से कम नहीं है, हर टिकट चेक करनी ही पड़ेगी!

आपकी कंपनी या ऑफिस में कभी ऐसी कोई मज़ेदार या अजीब आईटी सपोर्ट घटना हुई है? अपने अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें! क्या आप भी टिकट बनवाने की इस रस्म से परेशान हैं या आपको इसमें मज़ा आता है?
आइए, हंसी-ठिठोली में बाँटें अपने आईटी सपोर्ट के किस्से!


मूल रेडिट पोस्ट: Tickets Please