विषय पर बढ़ें

जब 'टाइगर टीम' बनी शेर की जगह बिल्ली: तकनीकी समस्या या ऑफिस ड्रामा?

एनिमे शैली में एक टाइगर टीम इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन समाधानों पर सहयोग करते हुए।
यह जीवंत एनिमे शैली की चित्रण टीमवर्क की भावना को दर्शाता है, जबकि टाइगर टीम जटिल इलेक्ट्रॉनिक डिज़ाइन चुनौतियों का सामना कर रही है। चलिए, हम उनके प्रोग्रामेबल लॉजिक उद्योग में सफर को खोजते हैं!

ऑफिस की मीटिंग्स में आपने कई तरह के ड्रामे देखे होंगे—कभी चाय के लिए लड़ाई, कभी प्रेजेंटेशन के लिए घबराहट। पर जब टेक्नोलॉजी की दुनिया में ‘टाइगर टीम’ यानी एक्सपर्ट्स की स्पेशल टीम बुलाई जाती है, तो उम्मीद रहती है कि अब तो कोई बड़ी जंग छिड़ेगी। लेकिन सोचिए, जब पूरा तमाशा सिर्फ एक छोटी सी गलती पर खत्म हो जाए? आज की कहानी कुछ ऐसी ही है, जिसमें तकनीकी महारथियों की फौज को बुलाया गया, पर अंत में निकला—‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’!

'टाइगर टीम'—नाम बड़ा, काम छोटा

इस किस्से के हीरो हैं हमारे एक अनुभवी इंजीनियर, जो तीसरे स्तर के सपोर्ट एक्सपर्ट थे। मतलब, जब बाकी दो लेवल के लोग हार मान जाते, तभी इनकी बारी आती थी। 20 साल से ज्यादा का अनुभव—कंपनी के लिए ये ‘ब्रह्मास्त्र’ जैसे थे। कंपनी ने अपनी बड़ी-बड़ी टेलीकॉम और डिफेंस क्लाइंट्स के लिए ‘टाइगर टीम’ बनाई। अब टाइगर टीम का नाम सुनकर तो लगता है जैसे कोई मिशन इम्पॉसिबल होने वाला है! अलग-अलग विभागों के लोग, रोज़ मीटिंग्स, सब एक ही टारगेट—समस्या का हल निकालना।

पर असली मजा तो तब आया जब इन जनाब को एक महत्वपूर्ण मीटिंग के लिए अचानक बुला लिया गया। न कोई डिटेल, न कोई केस हिस्ट्री—बस, “आपको टाइगर टीम मीटिंग में आना है।” अब सोचिए, इंडिया के किसी ऑफिस में अगर बिना तैयारी के बॉस के सामने जाना पड़े, तो पसीना आना तो तय है!

'शेर की दहाड़' या 'बिल्ली की म्याऊँ'?

मीटिंग में पहुंचे, तो सामने दस-पंद्रह लोग! मैनेजर, सेल्स वाले, टेक्निकल मार्केटिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, और दूर-दराज के क्लाइंट्स। सबके चेहरे पर वही ‘बड़ी समस्या’ वाला एक्सप्रेशन। और हमारे इंजीनियर—सिर्फ अपने लैपटॉप के सहारे, बिना किसी तैयारी के, बिल्कुल जैसे कोई क्रिकेटर बिना प्रैक्टिस के वर्ल्ड कप खेलने उतरे।

उन्होंने सबसे पहला सवाल किया—“समस्या क्या है?” पर सामने वाले क्लाइंट से भी जवाब नहीं बन पा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे बोर्ड एग्जाम में मैथ्स का सवाल पूछा गया हो और बच्चा बोले—‘सर, सिलेबस में नहीं था!’ धीरे-धीरे, इंजीनियर साहब ने खुद ही क्लाइंट को समझाया कि किन-किन बातों की जानकारी चाहिए। पता चला कि बस एक क्लॉक बफर गलत जगह लग गया था, जिसे एक सिंपल यूज़र कंस्ट्रेंट से ठीक किया जा सकता था। यानी जो काम टियर-1 सपोर्ट वाले चाय पीते-पीते कर सकते थे, उसके लिए पूरी टाइगर टीम का तमाशा खड़ा हो गया।

ऑफिस राजनीति और 'फीलगुड' रिपोर्टिंग

अब यहाँ कहानी में एक मजेदार ट्विस्ट आता है। Reddit पर एक कमेंट करने वाले सदस्य ने बिलकुल सही पकड़ा—“कई बार बॉस या मैनेजर को असली समस्या से ज़्यादा अपनी रिपोर्ट या सीवी में ‘अचीवमेंट’ जोड़ना ज़रूरी लगता है।” जैसे किसी ने NBA का टिकट ऑफर किया, ऑफिस के बॉस ने नियमों का हवाला देकर मना कर दिया। अंत में बॉस ने अपने रिज्यूमे में लिख लिया—"कम्युनिटी कोड सक्सेसफुली लागू किया"। कुछ वैसा ही यहाँ भी हुआ—'टाइगर टीम' के सब मेंबर अब अपनी स्टेटस रिपोर्ट में लिख सकते हैं, “हमने बड़ी समस्या का समाधान किया!” भले ही असलियत में काम उतना बड़ा न हो।

किसी और सदस्य ने मज़ाक में लिखा, “हमारे यहाँ भी एक बार टाइगर टीम बुलाने की बात हुई। सब लोग ऐसे चुप हो गए जैसे किसी ने क्लास में होमवर्क पूछ लिया हो!” ऐसा अक्सर बड़े संगठनों में होता है—नाम बड़े, दर्शन छोटे।

भारतीय संदर्भ में—'हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और'

हमारे यहाँ भी ऐसे तमाशे खूब होते हैं। जैसे किसी सरकारी ऑफिस में कोई मामूली फाइल पास करवानी हो, तो पूरी मीटिंग बुलाई जाती है, चाय-पानी चलता है, और अंत में फाइल पर वही मुहर लगती है जो चपरासी पांच मिनट में कर सकता था। या जैसे कोई शादी में 10 लोग मिलकर सिर्फ दूल्हे की जूता-चोरी प्लान कर रहे हों, लेकिन आख़िर में बच्चा ही जूता ले उड़ता है!

टेक्नोलॉजी की दुनिया में भी ये ‘टाइगर टीम’ अक्सर दिखावे से ज़्यादा कुछ नहीं, असली काम तो उसी के जिम्मे आता है जिसे असल में अनुभव हो। और कई बार, हल बिलकुल सामने होता है, बस उसे देखने की नजर चाहिए।

निष्कर्ष: असली टाइगर वही, जो शांति से काम करे

तो दोस्तों, अगली बार जब ऑफिस में कोई ‘टाइगर टीम’ या ‘स्पेशल टास्क फोर्स’ बनाए, तो घबराइए मत। हो सकता है समस्या ‘तीन पत्ती’ जितनी आसान हो, बस माहौल ‘शतरंज’ जैसा बना दिया गया हो। असली नायक वही है जो बिना हल्ला मचाए, चुपचाप समस्या सुलझा दे—चाहे वह तीसरे स्तर का इंजीनियर हो, या हमारे मोहल्ले का बिजली वाला ‘मिस्त्री जी’!

क्या आपके ऑफिस में भी ऐसे ड्रामे हुए हैं? या आपको भी किसी मामूली समस्या को ‘बड़ी सफलता’ बनाकर दिखाने का मौका मिला? कमेंट में जरूर बताएं, और अपने दोस्तों के साथ ये किस्सा शेयर करें—शायद अगली ‘टाइगर टीम’ में उनकी भी ड्यूटी लग जाए!


मूल रेडिट पोस्ट: Tiger team to the rescue!