जब झूठी 'स्पेशल ट्रीटमेंट' की भूख ने एक ट्रेनर को रेस्टोरेंट से बाहर का रास्ता दिखाया
रेस्टोरेंट्स में जो लोग काम करते हैं, वो जानते हैं कि ग्राहक भगवान मानते हैं – लेकिन कभी-कभी कुछ 'भगवान' ऐसे आ जाते हैं जिनसे भगवान भी बचना चाहे! आज की कहानी है एक ऐसे रेस्टोरेंट की, जहाँ एक नए वेटर को 'स्पेशल ट्रीटमेंट' मांगने वाली नकली ट्रेनर ने जीना मुश्किल कर दिया, लेकिन टीमवर्क और जुगाड़ से सबने मिलकर ऐसा सबक सिखाया कि सुनकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ जाएगी।
शुरुआत – हर नौसिखिए का डर
2015 की बात है। एक युवती नर्सिंग की पढ़ाई के साथ-साथ एक रेस्टोरेंट में वेट्रेस का काम करती थी। रेस्टोरेंट का नाम नहीं था, न ही कोई विज्ञापन – सबकुछ 'मुँह जबानी चर्चा' से चलता था। यहाँ टीम वर्क और इज्ज़त सबसे ऊपर थी। उस रात एक नया वेटर, जो उम्र में सबसे बड़ा था, पहली बार अपनी 'पूरा सेक्शन' संभाल रहा था। वैसे तो वो थोड़ा डरपोक और घबराया हुआ था, लेकिन मेहनती और ईमानदार।
जैसे ही उस वेटर की शिफ्ट शुरू हुई, एक 6 लोगों की टेबल पर 20-22 साल के युवाओं का एक गिरोह आ गया। उनमें से एक 'लीडर' (जो असल में दूसरे ब्रांच की ट्रेनर थी) ने अजीब-अजीब डिमांड्स शुरू कर दीं – "ये चाहिए, वो चाहिए, हमारे यहाँ तो ऐसे बनाते हैं, तुम सबसे खराब वेटर हो!" बेचारा वेटर परेशान, उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थीं।
रेस्टोरेंट में 'अपनों' की असली पहचान
अब यहाँ असली भारतीय जुगाड़ शुरू हुआ! कहानी की नायिका, जो खुद भी वेट्रेस थी, ने देखा कि नया वेटर टूटने को है। उसने बाकी टेबल्स खुद संभाल लीं, उसे हिम्मत बंधाई और समझाया – "घबराना मत, हम सब तुम्हारे साथ हैं।" ऐसा माहौल अक्सर भारतीय ऑफिस या दुकानों में भी दिखता है, जब कोई नया स्टाफ पहली बार फंसता है और सीनियर उसकी ढाल बनते हैं।
लेकिन 'लीडर मेडम' का तामझाम चलता रहा – "मुझे एम्प्लॉयी डिस्काउंट भी चाहिए, कई बर्थडे हैं, केक भी चाहिए, गाना भी चाहिए!" अब पानी सिर से ऊपर जा चुका था।
असली 'प्रो रिवेंज' का जलवा
यहाँ से कहानी गजब मोड़ लेती है। नायिका ने सब कर्मचारियों को बुलाया – वेटर, किचन स्टाफ, डिशवॉशर, सबको! प्लान बना – बर्थडे के बहाने, सबके सब मिलकर इतना जोर-जोर से हैप्पी बर्थडे गाएँगे कि कान के पर्दे फट जाएँ! जैसे ही केक सर्व हुए, पूरा स्टाफ लाइन में आकर गाना गाने लगा – इतना तेज़ और लंबा कि 'लीडर मेडम' के चेहरे की हँसी उड़ गई, हाथों से कान ढक लिए! एक कमेंट में किसी ने लिखा – "ऐसे लोगों के लिए खास जगह है नर्क में, जो खुद FOH (फ्रंट ऑफ हाउस) होके दूसरों को तंग करें।"
इसी दौरान, रेस्टोरेंट के मैनेजर ने उस 'लीडर' के अपने ब्रांच के मैनेजर को फोन कर दिया और उसकी सारी हरकतें बता दीं। एम्प्लॉयी डिस्काउंट तो दूर, उसे डिस्काउंट मिला ही नहीं – उल्टा वहीं फोन पर डाँट और नौकरी से हाथ धोना पड़ा!
कम्युनिटी की राय – हर कोई बना टीम का फैन
रेडिट कम्युनिटी ने इस किस्से को खूब सराहा। एक यूज़र ने लिखा, "सच्ची 'प्रो रिवेंज' तो वही, जिसमें केक भी मिले और नौकरी भी चली जाए!" एक और ने कहा – "ऐसे ग्राहक ही वजह हैं कि बड़े ग्रुप्स पर सर्विस चार्ज अलग से लगता है।" किसी ने तो यह भी जोड़ा, "अगर कोई खुद FOH रह चुका है तो उसे स्टाफ की परेशानी समझनी चाहिए – लेकिन यहाँ तो उल्टा मज़ा ले रही थी!"
सबसे प्यारी बात एक अनुभवी नर्स ने लिखी – "तुम जैसी लोग ही असली नर्सिंग या सर्विस प्रोफेशन की शान हैं, जो दूसरों के लिए खड़े होते हैं।"
सीख – इज्ज़त दो, इज्ज़त पाओ
कहानी से यही निकलता है – चाहे आप ग्राहक हों या कर्मचारी, इंसानियत और इज्ज़त सबसे ऊपर है। जो दूसरों को छोटा समझकर मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें कभी न कभी सबक ज़रूर मिलता है। और जब टीम एक साथ खड़ी हो जाए, तो कोई भी बदतमीज़ी टिक नहीं सकती।
तो अगली बार जब आप किसी रेस्टोरेंट जाएँ, ध्यान रखें – शायद वहाँ भी कोई ऐसा 'टीमवर्क' बैठा हो, जो जरूरत पड़ने पर आपको भी 'स्पेशल ट्रीटमेंट' दे सकता है...पर किस किस्म का, ये आपके व्यवहार पर निर्भर करेगा!
अंत में...
दोस्तों, क्या आपको भी कभी ऐसी कोई घटना ऑफिस या रेस्टोरेंट में देखने को मिली है, जब किसी ने टीमवर्क से किसी को सही सबक सिखाया हो? अपनी राय और किस्से कमेंट में ज़रूर बताइए! ऐसे और मज़ेदार रेस्टोरेंट या वर्कप्लेस किस्सों के लिए जुड़े रहिए – और याद रखिए, इज्ज़त बाँटिए, इज्ज़त पाइए!
मूल रेडिट पोस्ट: You want special treatment? I would love to!