जब चाबी बनी बदला: ऑफिस इंजीनियर को ऐसी सज़ा मिली कि फोन ही बंद करना पड़ा
कभी–कभी ऑफिस की राजनीति में ऐसे लोग मिल जाते हैं, जिनकी हरकतें देख कर लगता है — "किसी दिन तो इसको सबक मिलेगा!" आज मैं आपको एक ऐसी ही अनोखी और मज़ेदार कहानी सुनाने जा रहा हूँ, जिसमें एक चालाक और घमंडी बिल्डिंग इंजीनियर को उसके ही हथियार से ऐसा बदला मिला कि बेचारा न रात को चैन से सो पाया, न दिन को सुकून से काम कर पाया।
चाबी वाला बाबू और उसकी करतूतें
मान लीजिए, आपके ऑफिस में एक ऐसा शख्स है, जो सालों से अपनी मनमानी कर रहा है। बिल्डिंग इंजीनियर — जिसे सब शॉर्टकट बाबू कहते थे — हर ताले की चाबी उसी के पास, हर खर्चे की मंज़ूरी उसी के हाथ। ऑफिस की छोटी–छोटी केबिनों से लेकर खाली जगहों तक, हर तरफ उसी का सिक्का चलता था। ज़रा सोचिए, वह ऑफिस की खाली जगहों को किराए पर देकर अपनी जेब भी गरम कर रहा था!
लेकिन जैसा फिल्मों में होता है, एक दिन मैनेजमेंट ने नया मैनेजर रख लिया — और उसकी पहली ही जिम्मेदारी थी, इसी शॉर्टकट बाबू को लगाम लगाना। फिर क्या था, सारे खर्चे की मंज़ूरी मैनेजर के हाथ, बाबू से उसकी केबिन भी छीन ली गई। और तो और, खाली जगहों का गोरखधंधा भी बंद।
बदले की शुरुआत: हर ताले की चाबी उसी के पास!
अब जब बाबू की दुकान ठप हो गई, भला वो चुप कैसे बैठता? ऑफिस छोड़ने के बाद उसने छुप-छुपकर ऑफिस में आना–जाना शुरू कर दिया। कभी टेबल की जगह बदल देना, कभी नया वेंडर आते ही उसे ताड़ना, और कभी फोन करके अजीब–अजीब हरकतें करना — मानो "कहीं से तो बदला निकालूंगा" वाला फितूर सिर चढ़ गया था।
असल मसला था — उसके पास अब भी सैकड़ों चाबियां थीं! कोई दरवाजा, कोई अलमारी, कोई बॉक्स — सबकी चाबी बाबू के पास। ऑफिस मानो कोई एस्केप रूम बन गया, जहां एक कमरे की चाबी दूसरे कमरे में, तीसरे कमरे का ताला चौथे के बॉक्स में! नए मैनेजर ने आखिर हार कर पूरे ऑफिस के ताले ही बदलवा डाले। खर्चा भले ज्यादा हुआ, मगर सुकून भी मिला।
असली बदला: चाबियों की बरसात!
अब आती है असली मज़ेदार बात। नए मैनेजर ने सोचा — बदले का स्वाद तो तभी आएगा, जब बाबू को अपनी ही चाल में फंसा दूं! तो उसने दोस्त की प्रिंटिंग शॉप से 250 चाबी टैग छपवाए, जिन पर लिखा था: "यदि चाबी मिले तो इनाम के लिए इस नंबर पर कॉल करें।" और नंबर था — उसी शॉर्टकट बाबू का!
अब शुरू हुआ असली खेल। अगले एक साल तक, मैनेजर हर जगह — रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, खानपान स्टॉल, अस्पताल, एयरपोर्ट, यहाँ तक कि क्रूज़ पर भी — ये चाबियां छोड़ता गया। सोचिए, किसी ने बाथरूम में चाबी पाई, किसी ने पेट्रोल पंप पर, किसी ने एयरपोर्ट के काउंटर पर — सबको लगा, "इनाम मिलेगा!" और बेचारा बाबू परेशान — रोज़ कोई न कोई अजनबी फोन करके पूछता, "भाई साहब, आपकी चाबी मिली है, इनाम कब मिलेगा?"
रेडिट कम्युनिटी के मज़ेदार रिएक्शन
इस किस्से पर Reddit की PettyRevenge कम्युनिटी में खूब चर्चा हुई। किसी ने कहा, "ये तो असली जीनियस वाला बदला है, जिसमें कानून की भी कोई टेंशन नहीं!" एक और कमेंट था — "इस मैनेजर को तो Petty Revenge Conference का मुख्य अतिथि बना देना चाहिए!" किसी ने चुटकी ली, "अब बाबू की चाबी–चाबी में ही जिंदगी निकल जाएगी।" एक यूजर ने बोला, "इतना लंबा–चौड़ा बदला! मजा आ गया!"
सबसे मज़ेदार कमेंट तो खुद ऑथर का था — "बाबू का फोन नंबर उसके बिज़नेस से जुड़ा था। अब अगर नंबर बदलता है तो बिज़नेस डूबे, नहीं बदलता तो रोज़ परेशान हो!" वाह, इसे कहते हैं — सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे!
सीख: बदला भी कला है, बस ज़रा अक्ल चाहिए
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है? ऑफिस की राजनीति में कई बार सीधा युद्ध करने से बेहतर है — दिमाग लगाओ, तरीका अपनाओ! जैसे घर में बच्चों को चुप कराने के लिए दादी–नानी कोई चालाकी करती हैं, वैसे ही दफ्तर में भी कभी–कभी थोड़ा सा "पेटी बदला" बहुत काम आ जाता है।
तो दोस्तों, अगली बार अगर कोई ऑफिस का शॉर्टकट बाबू आपको परेशान करे, तो सीधे भिड़ने की बजाय थोड़ा दिमाग लगाइए। हो सकता है, आपकी एक चाल उससे कहीं ज्यादा असरदार निकले!
आपकी राय क्या है?
क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है, जब किसी ने आपको परेशान किया हो और आपने कोई मजेदार बदला लिया हो? या ऐसी कोई कहानी सुनी हो? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताइए — कौन जाने, अगला ब्लॉग आपकी ही कहानी पर हो!
मूल रेडिट पोस्ट: A key for all occasions