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जब ग्राहक ने माँगी ‘सुपरहॉट’ कॉफी, और बारिस्ता ने दिया जलता हुआ जवाब!

यूनियन स्क्वायर, NYC में स्टारबक्स में एक बरिस्ता भाप उठाते लैट्­te परोस रहा है।
इस सिनेमाई दृश्य में, यूनियन स्क्वायर के स्टारबक्स में एक बरिस्ता एक मांगलिक ग्राहक के लिए लैट्­te तैयार कर रहा है, जो न्यूयॉर्क शहर की हलचल में अपेक्षाओं और वास्तविकता के टकराव को उजागर करता है।

कॉफी शॉप्स में रोज़ाना नए-नए किस्से बनते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ ग्राहक अपनी अजीब डिमांड्स से स्टाफ की परीक्षा ही ले लेते हैं। सोचिए, अगर कोई ग्राहक अपनी कॉफी ‘इतनी गरम’ मांगे कि उसकी ज़ुबान ही जल जाए, तो क्या होगा? आज की कहानी है ऐसे ही एक ‘सुपरहॉट’ कॉफी के शौकीन और एक होशियार बारिस्ता की, जिसने अपने अंदाज़ से सबको हँसने पर मजबूर कर दिया।

ग्राहक की 'गर्मागर्म' फरमाइश और बारिस्ता की समझदारी

ये किस्सा है न्यूयॉर्क सिटी के यूनियन स्क्वायर स्थित एक स्टारबक्स का, जहाँ एक बारिस्ता (लेखक खुद) काम करता था। एक दिन एक साहब बड़े नाक-भौं सिकोड़ते हुए आए — जैसे किसी राजा महाराजा को आम आदमी से बात करनी पड़ रही हो — और बोले, "मुझे एक लाटे चाहिए, बहुत गरम! 180 डिग्री तक गरम!"

अब हमारे यहाँ भी चाय की दुकान पर लोग कहते हैं, "भैया, चाय खूब गरम देना, उबाल के!" लेकिन यहाँ तो मामला 180 डिग्री फारेनहाइट का था, जो कि दूध के लिए काफी ज्यादा है। बारिस्ता ने थर्मामीटर लगाकर दूध को सही तापमान तक गरम किया, और कॉफी ग्राहक को सौंप दी। लेकिन जनाब का चेहरा फिर भी बिगड़ा हुआ! बोले, "ये तो गरम नहीं है, मैंने 180 डिग्री कहा था!"

बदले की 'स्वादिष्ट' रेसिपी: जलती हुई कॉफी की सौगात

अब लेखक समझ चुका था कि जनाब को सिर्फ गर्मी चाहिए, स्वाद की फिक्र नहीं। उसने फिर से दूध गर्म करना शुरू किया, लेकिन इस बार 220 डिग्री तक पहुँचा दिया — मतलब, लगभग उबलता हुआ दूध! कॉफी बनाकर ग्राहक को दी और मुस्कुराकर देखा। जैसे ही साहब ने पहला घूंट लिया, उनके चेहरे के हावभाव देखने लायक थे — लगता था जैसे ज़ुबान ही जल गई हो! लेकिन मज़े की बात ये रही कि अब उन्होंने दोबारा शिकायत करने की हिम्मत नहीं की।

इस किस्से को पढ़कर एक पाठक ने लिखा, "ऐसे ‘गरम नहीं है’ वाले लोग बहुत सिरदर्द होते हैं! एक बार मैं भी खाना सर्व कर रहा था, और महज़ दो मीटर ले जाते-ले जाते ग्राहक ने दो बार खाना वापस भेज दिया कि ठंडा हो गया!" यही हाल हमारे यहाँ शादी-ब्याह की दावतों में भी देखने को मिलता है — लोग हर चीज़ में नुक्स निकाल ही लेते हैं।

कॉफी, दूध और तापमान की जुगलबंदी

अब बात आती है, क्या दूध वाकई इतना गरम किया जा सकता है? तकनीकी ज्ञान रखने वालों की मानें, तो पानी का उबाल 212 डिग्री फारेनहाइट होता है, दूध थोड़ा और ऊपर जाता है — लेकिन इतना गरम दूध स्वाद और सेहत दोनों के लिए अच्छा नहीं होता। एक अनुभवी बारिस्ता ने कमेंट किया, "13 साल इस काम में रहा हूँ, कुछ ग्राहक दूध को 218 डिग्री तक मांगते हैं!" लगता है, ये गर्मी के दीवाने पूरी दुनिया में हैं।

अक्सर उम्रदराज़ लोग कहते हैं, "चाय ठंडी है!" एक पाठक ने मज़ाक में लिखा, "मेरे पिताजी तो केतली से निकली चाय भी माइक्रोवेव में गरम करते थे!" हमारे यहाँ भी दादी-नानी अक्सर कहती हैं, "मुझे तो खाना गरम-गरम चाहिए, भाप उड़ती दिखे!" शायद जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, गर्मी की परख कम हो जाती है, या फिर आदत बन जाती है।

ग्राहकों की फरमाइशें और सर्विस इंडस्ट्री की मुश्किलें

रेडिट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए — "किसी ने बर्गर में एक्स्ट्रा अचार मांगा, बार-बार लौटाया, आखिरकार मैंने पूरा मुट्ठीभर अचार डाल दिया, ग्राहक सन्न रह गया।" एक और ने लिखा, "एक महिला ने सूप बार-बार गरम करवाया, फिर बोली — तुमने उंगली डालकर देखा या नहीं?" सोचिए, कोई ग्राहक अगर पकोड़े में उंगली डालकर तापमान मापने को कह दे, तो क्या होगा!

हमारे यहाँ भी, चाहे होटल हो या मिठाई की दुकान, हर कोई ऐसे ‘नखरेबाज़’ ग्राहकों से दो-चार होता ही है। लेकिन सर्विस इंडस्ट्री वालों का पेशेंस भी काबिले तारीफ है — कभी मुस्कुराकर, कभी हल्के बदले के अंदाज़ में, वो भी अपना ‘पेटी रिवेंज’ ले लेते हैं।

निष्कर्ष: स्वाद, गर्मी और ग्राहक का नखरा

तो दोस्तों, इस कहानी से ये सीख मिलती है कि कभी-कभी ग्राहक का ‘हमेशा सही’ होना भी उनकी ज़ुबान को जला सकता है! अगली बार जब आप चाय या कॉफी ऑर्डर करें, तो सोच-समझकर बताइए — कहीं ऐसा न हो कि गरम की जगह जलती हुई कॉफी मिल जाए!

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा वाकया हुआ है — किसी ग्राहक या दुकानदार ने आपको मज़ेदार जवाब दिया हो? कमेंट में जरूर बताइए, और अगर कहानी पसंद आई हो तो दोस्तों के साथ शेयर करना मत भूलिए। आखिर, गरम कॉफी की तासीर तो सबको पता है, लेकिन उसकी ‘जलन’ का मज़ा कुछ और ही है!


मूल रेडिट पोस्ट: Hot Enough For Ya?