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जब ग्राहक को हर बार गलती चाहिए थी: प्रिंटिंग शॉप का जुगाड़ू जवाब

1990 के दशक के हस्तलिखित डिज़ाइन वाले एक पुराने प्रिंट शॉप का एनीमे-शैली में चित्रण।
इस जीवंत एनीमे-प्रेरित चित्रण के साथ 1990 के दशक में वापस चलें, जहां रचनात्मकता और परंपरा का मिलन हुआ। हाथ से लिखे डिज़ाइन की यादों और प्रिंटिंग के विकास का अनुभव करें जिसने इस उद्योग को आकार दिया।

क्या आपके ऑफिस में भी ऐसा कोई है, जिसे हर रिपोर्ट, हर डिज़ाइन या हर प्रेज़ेंटेशन में कोई न कोई कमी ज़रूर निकालनी होती है? अगर हां, तो जनाब, आज की ये कहानी पढ़िए, जो बिल्कुल आपके दिल की बात कहेगी।

ये किस्सा है 90 के दशक के शिकागो की एक प्रिंटिंग शॉप का, जहां एक ग्राहक हर बार प्रूफ चेक करते वक्त कोई न कोई गलती पकड़ा ही लेता था। कभी कहता – "ये लाइन टेढ़ी है", तो कभी – "ये शब्द ज़्यादा गहरा छप गया है"। दुकानवाले भी परेशान, डिज़ाइनर भी परेशान! लेकिन फिर जो जुगाड़ निकला, वो पढ़कर आप भी कहेंगे – वाह भाई वाह!

ग्राहक की आदत: गलती खोजो, वरना चैन नहीं

हमारे यहां एक कहावत है, "कुछ लोगों को हर चीज़ में मीन-मेख निकालने की आदत होती है"। Reddit पर u/BrightRick ने बताया कि उनके पास एक ऐसा ही ग्राहक था, जिसे जब तक गलती न मिले, उसे चैन नहीं आता था। हर बार नया प्रूफ, हर बार नई शिकायत!

अब आप सोच रहे होंगे – भाई, आखिर कब तक? डिज़ाइनर ने भी हार मानने के बजाय दिमाग चलाया। अब हर बार दो प्रूफ बनते – एकदम सटीक और दूसरा, जिसमें जानबूझकर एक मोटी-सी गलती डाल दी जाती। ग्राहक आता, गलती पकड़ता, "ये ठीक करो", और दुकानवाले आराम से सही प्रूफ निकालकर दिखा देते। ग्राहक खुश, दुकानवाले खुश, काम भी जल्दी – सबका समाधान!

‘डक’ स्ट्रैटेजी: गलती दिखाओ, संतुष्टि दिलाओ

अगर आप सोच रहे हैं कि ऐसा जुगाड़ सिर्फ हिंदुस्तान में चलता है, तो ज़रा Reddit कम्युनिटी की चर्चाएं पढ़िए! एक यूज़र ने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में इसे ‘डक’ स्ट्रैटेजी कहते हैं – यानी जानबूझकर ऐसा कोई फीचर या छोटी सी गड़बड़ी डाल दो, जिसे बॉस या मैनेजर आसानी से पकड़ ले। इससे वो भी खुश कि "मैंने सुधार करवाया" और बाकी टीम भी राहत में कि असली काम में कोई तगड़ी छेड़छाड़ नहीं हुई।

एक और मज़ेदार कमेंट में एक बैंक का किस्सा आया – सुरक्षा ऑडिट करने वाले अफसर जब तक गलती न ढूंढ लें, तब तक चैन से नहीं बैठते। तो भाई, कर्मचारी लोग खुद ही कीबोर्ड के नीचे पासवर्ड लिख देते, बस उसे पकड़वाकर झटपट ऑडिट क्लियर! सोचिए, अपनी-अपनी जगह सबने जुगाड़ सिख रखा है।

भारतीय दफ्तरों में ‘गलती’ की भूख

अब ज़रा अपने देश की तरफ देखिए। हर दफ्तर में वो ‘शर्माजी’ या ‘मिश्रा जी’ मिल ही जाते हैं, जिनका काम ही है, "अरे बेटा, इसमें कुछ तो मिसिंग है, देखो ज़रा ध्यान से।" कई बार तो लोग खुद ही एक आध टाइपो रख देते हैं ताकि साहब को सुधारने का मौका मिल जाए – वरना वे असली काम में न जाने क्या-क्या बदलवा देंगे!

एक और कमेंट में किसी ने बताया कि उनके मैनेजर को हर दस्तावेज़ में कुछ एडिट करना ही है। तो सब लोग पहली लाइन में जानबूझकर कॉमा या स्पेलिंग की गलती छोड़ देते। साहब खुश, टीम खुश, काम फटाफट खत्म!

मनोविज्ञान और ‘अहम’ का खेल

एक Reddit यूज़र ने बड़ा गहरा विश्लेषण दिया – अक्सर ऐसे लोग जो हर चीज़ में सुधार की ज़रूरत महसूस करते हैं, दरअसल अपनी अहमियत जताना चाहते हैं। उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने कोई गलती न पकड़ी, तो उनकी वैल्यू कम हो जाएगी। इसीलिए, चाहे फाइल परफेक्ट हो या नहीं, कुछ न कुछ पकड़ ही लेते हैं।

कई बार तो ऑफिस के कुछ लोग जान-बूझकर गलती छोड़ देते, ताकि बॉस की ‘ego’ संतुष्ट हो जाए और असली काम बिना छेड़छाड़ के पास हो जाए। एक यूज़र ने तो इसे "पानी में नमक डालना" कहा – यानी ग्राहक या अफसर जब तक अपनी पसंद का नमक न डाले, तब तक पानी उन्हें फीका ही लगेगा!

जनता का जुगाड़: समझदारी या चालाकी?

आप सोच रहे होंगे, क्या ये सही है? क्या ये थोड़ी सी चालाकी नहीं है? लेकिन दफ्तर की राजनीति में कई बार ऐसी छोटी-छोटी ट्रिक्स ही दिन बचा लेती हैं। Reddit पर एक कमेंट में किसी ने कहा, "हमारे यहां भी ग्राहक के लिए तीन-तीन नकली गलतियां डाल देते हैं, दोनों को खेल की समझ है, और दोनों खुश!"

भारतीय संदर्भ में कहें तो – ये भी एक किस्म का ‘नौकरशाही’ जुगाड़ है। जैसे सरकारी दफ्तर में फाइल में एक पन्ना जानबूझकर उल्टा डाल दो ताकि अफसर साहब को कुछ कहने का मौका मिल जाए!

निष्कर्ष: क्या आपके ऑफिस में भी चलता है ये खेल?

तो भैया, अगली बार जब आपका बॉस या ग्राहक बिना बात के गलती निकालने लगे, तो परेशान मत होइए। हो सकता है, एक छोटी-सी ‘डक’ या ‘गलती’ डालकर आप भी समय और सिरदर्द दोनों से बच सकते हैं!

क्या आपके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है? क्या आपने कभी जानबूझकर गलती छोड़ी है? कमेंट में ज़रूर बताइए – आपके मज़ेदार किस्से बाकी पाठकों को भी खूब हँसाएंगे!


मूल रेडिट पोस्ट: Customer always found a mistake - so we complied