जब ग्राहक को लगा उसने मोल-भाव में जीत ली, पर असल में घाटा कर बैठी!
हमारे देश में दुकानों पर मोल-भाव करना तो जैसे हमारी रग-रग में बसा है। “भैया, आख़िरी दाम बताओ!” या “इतना तो पीछे वाली दुकान में दे रहा था!” – ये बातें सुनकर दुकानदार भी मुस्कुरा देते हैं। लेकिन कभी-कभी ग्राहक अपनी ही होशियारी में ऐसा चक्कर चला देते हैं कि खुद ही फँस जाते हैं और दुकानदार मुस्कुराते रह जाते हैं।
आज की कहानी कुछ ऐसी ही है – जहाँ एक महिला ग्राहक को लगा कि उसने Black Friday सेल में बड़ा तगड़ा सौदा कर लिया, लेकिन असल में उसने अपना ही घाटा करवा लिया। Reddit की एक लोकप्रिय पोस्ट से ली गई ये घटना जितनी मज़ेदार है, उतनी ही सोचने पर मजबूर भी कर देती है।
ग्राहक की होशियारी या उल्टी गिनती?
Reddit यूज़र u/The-Cat-Lady5 ने बताया कि Black Friday के दिन एक महिला ने दो जोड़ी जूते खरीदे, कुल बिल बना 60 डॉलर। यानी एक जोड़ी 30 डॉलर में पड़ी। कुछ दिन बाद वह महिला उनमें से एक जोड़ी लौटाने आ गई। अब यहाँ असली तमाशा शुरू हुआ।
महिला ने शिकायत की – “मैंने ये जूते 60 डॉलर में लिए, जबकि अब तो सेल में 50 डॉलर में मिल रहे हैं! मुझे ठगा गया है!” दुकान वाले ने समझाया, “मैडम, आपने दो जोड़ी खरीदी थी, दोनों के प्रोडक्ट नंबर यहीं हैं।” लेकिन महिला को तो अपनी होशियारी पर पूरा भरोसा था – उसे लगा एक ही जोड़ी के 60 डॉलर वसूले गए हैं।
दुकानदार ने मैनेजर को भी बुला लिया, पर महिला का गुस्सा कम नहीं हुआ। आखिरकार, उसने जोड़ी वापस की – दुकानदार ने भी नियमों के मुताबिक 30 डॉलर वापस किए (एक जोड़ी के ही पैसे)। अब महिला ने वही जूते फिर से खरीदने की ज़िद पकड़ी, इस बार 50 डॉलर देकर! यानी, जो जूते वो 30 में ले चुकी थी, अब 50 में ले गयी और फिर भी खुशी से इतराती रही – “देखो, मैंने दुकानदार को मात दे दी!”
समझदारी और बेवकूफी – दोनों के किस्से
कई बार हम लोग नंबरों, छूट और ऑफ़र्स की गुत्थियों में ऐसे उलझ जाते हैं कि सस्ता समझकर महँगा खरीद लेते हैं। Reddit पर लोगों ने अपनी-अपनी कहानियाँ बाँटीं, जो हमारे अपने अनुभवों से मिलती-जुलती हैं।
एक यूज़र ने लिखा – “मेरे यहाँ 7 चीज़ें 10 पाउंड में ऑफर थी, एक महिला ने 6 महँगी चीज़ें लीं, बोला – 7वीं क्यों लें, आप मुझे बेवकूफ बना रहे हैं! उसने 6 चीज़ों के लिए 19.50 पाउंड दे दिए, पर 10 पाउंड में 7 मिल रही थीं।” सोचिए, कभी-कभी हम ‘अपसेल’ के डर से फायदे का सौदा भी छोड़ देते हैं – वही ‘ना माया मिली, ना राम’ वाली हालत!
एक और कमेंट में किसी ने लिखा – “डोरडैश पर ऑर्डर 38 डॉलर का था, 40 पर फ्री डिलीवरी मिलती थी, मैंने कहा – 2 डॉलर की मिठाई डाल लो, डिलीवरी बच जाएगी। पर महिला बोली – ‘ये लोग बेवकूफ बना रहे हैं, मैं नहीं फँसूँगी!’ और 6 डॉलर डिलीवरी में ही दे डाले!” सच में, कभी-कभी हानि से बचने के चक्कर में और बड़ी हानि हो जाती है।
अंकों और लॉजिक की गुत्थी – ये तो हमारे यहाँ भी आम बात!
गणित का डर तो हमारे देश में भी खूब चलता है। एक कमेंट में किसी ने लिखा – “एक महिला ने 20% शराब के 4 शॉट खरीदे, बोली – चारों पी लूं तो 80% शराब पी लूँगी!” दुकानदार ने समझाया – मैडम, ये ऐसे नहीं होता… पर उन्हें समझ ही नहीं आया।
हमारे यहाँ भी ऐसी बातें खूब होती हैं। जैसे – “भैया, पाव किलो और आधा किलो में क्या फर्क है?”, “चौथाई घंटा 15 मिनट होता है या 25?”, या “फ्रिज में रखा गुब्बारा क्यों नहीं उड़ता?” – ये सब बातें अक्सर सुनने को मिल जाती हैं!
एक यूज़र ने लिखा – “मैंने एक बार दो बाएँ पैर के जूते खरीद लिए, वापस करने गया तो दुकानदार बोला – अब मैं इनका क्या करूँगा? मैंने कहा – कहीं किसी के पास दो दाएँ पैर के जूते होंगे, पर वो मानने को तैयार ही नहीं थे!” यानी, कभी-कभी दुकानदार भी उतने ही ज़िद्दी हो सकते हैं।
“समझा तो सकता हूँ, समझा नहीं सकता” – जनता का जवाब
पोस्ट पर एक कमेंट बहुत फेमस हुआ – “मैं तुम्हें समझा सकता हूँ, पर तुम्हारे लिए समझ नहीं सकता।” और यही बात अक्सर दुकानों, दफ्तरों और घर-परिवार में भी लागू होती है। कई लोगों ने कहा – “कुछ लोग कभी भी गलती मानने को तैयार नहीं होते, चाहे आप कितनी भी तसल्ली से, सबूत के साथ समझा दो।”
किसी ने बड़े मज़ेदार ढंग से कहा – “दुनिया में समझदारी का औसत सोचो, फिर समझो कि आधे लोग तो उससे भी कम समझदार हैं!” हमारे यहाँ भी यही हाल है – गाँव-शहर, ऑफिस-बाजार, हर जगह ऐसे किस्से मिल जाते हैं।
निष्कर्ष: हँसी, सीख और थोड़ी खुद की जाँच
तो दोस्तों, अगली बार जब आप किसी दुकान में ऑफ़र, छूट या मोल-भाव में उलझें, तो एक बार जरूर जाँच लें कि वाकई में फायदा किसका हो रहा है – आपका या दुकानदार का! और अगर कभी लगे कि सामने वाला बेवकूफ बन रहा है, तो एक बार खुद भी हिसाब-किताब जरूर कर लें – कहीं आप ही तो अपने पैसों की बली नहीं चढ़ा रहे!
आखिर में, जैसा एक यूज़र ने लिखा – “अक्ल बड़ी या भैंस?” – जवाब आपके पास है! अपनी मज़ेदार या हैरान कर देने वाली दुकान की कहानियाँ नीचे कमेंट में जरूर शेयर करें। आपके अनुभव भी शायद किसी की आँखें खोल दें… या हँसी का बहाना बन जाएँ!
आपको कभी ऐसा ‘मोल-भाव’ अनुभव हुआ है? बताइए – और अगली बार दुकानदार को मात देने से पहले, दो बार सोचिए!
मूल रेडिट पोस्ट: Customer thought she got a bargain. She did not.