जब ग्राहक की अजीब फरमाइश ने डिलीवरी बॉय को उलझन में डाल दिया!
क्या आपने कभी ऐसा सुना है कि किसी ने अपनी ही अजीब शर्तों की वजह से खुद को ही परेशान कर लिया? आज हम आपको सुनाएंगे एक ऐसी दिलचस्प कहानी, जिसमें ग्राहक ने डिलीवरी के लिए ऐसी उलझनभरी शर्तें रखीं कि आखिरकार उसका ही नुकसान हो गया! चलिए, जानते हैं कैसे एक अमेज़न डिलीवरी बॉय ने "जैसा कहा, वैसा किया" वाले अंदाज़ में ग्राहक को उसी की डिमांड के मुताबिक जवाब दिया।
उलझनभरे निर्देश और डिलीवरी बॉय की दुविधा
ये किस्सा है एक अमेज़न फ्लेक्स डिलीवरी बॉय का, जिसका नाम हम यहाँ रवि मान लेते हैं (कहानी के लिहाज़ से)। एक सुबह, रवि को एक बिज़नेस पर पैकेज डिलीवर करना था। आम तौर पर बिज़नेस डिलीवरी में रिसीवर से सिग्नेचर लेना ज़रूरी होता है, लेकिन इस बार निर्देश में साफ लिखा था – "No recipient required" यानी रिसीवर की कोई ज़रूरत नहीं। अब रवि खुश हुआ कि चलो, साइन लेने का झंझट नहीं!
लेकिन असली ट्विस्ट तो आगे था। उसी पैकेज के बिज़नेस नोट्स में बड़े साफ तरीके से लिखा था – "पैकेज को बिना देखरेख के न छोड़ें" (यानि unattended न छोड़ें)। अब भैया, सुबह के 7 बजे रवि वहाँ पहुंचा, लेकिन ऑफिस 11 बजे खुलना था। न रिसीवर, न कोई गार्ड, न कोई चपरासी – अब करें तो क्या करें?
'जैसा बोला, वैसा किया' – नियमों के जाल में फंसी डिलीवरी
रवि ने सोचा – "अगर पैकेज छोड़ जाता हूँ तो नियम टूटेगा, और अगर रिसीवर चाहिए ही नहीं, तो किसके हवाले करूँ?" अब नियमों का पालन करना भी ज़रूरी था, वरना बाद में डांट अलग से पड़ती। रवि ने पैकेज वापस अमेज़न स्टेशन में जमा करवा दिया।
रवि की इस चाल में थोड़ा सा बदला (malicious compliance) भी था – उसने सोचा, "ग्राहक ने ऐसी उलझनभरी डिमांड रखी, अब उन्हें आज पैकेज नहीं मिलेगा, तो खुद समझ में आ जाएगा कि हर जगह नियम बनाना आसान नहीं।"
यहाँ एक अंग्रेज़ी मुहावरा बड़ा फिट बैठता है – "जैसी करनी, वैसी भरनी!" लेकिन हमारे यहाँ की कहावत है – "अपनी ही लाठी से अपने ही पाँव पर मारना!"
कम्युनिटी की चटपटी प्रतिक्रियाएँ
इस मज़ेदार किस्से पर Reddit कम्युनिटी की भी खूब चर्चा हुई। एक यूज़र ने लिखा कि शायद बिज़नेस ने सामान्य रूप से 'पैकेज unattended न छोड़ें' का नियम बना दिया था, लेकिन जब किसी ने ऑर्डर किया तो गलती से 'No recipient required' चुन लिया। यानी, बाएं हाथ से ताला और दाएं से चाबी फेंक दी!
एक और सदस्य ने बड़ी समझदारी की बात कही – "पैकेज गायब हो जाने का डर तो वाजिब है, लेकिन फिर 'No recipient required' क्यों लिखा?" यानी, दोनों तरफ से ताली बजाने की कोशिश में सन्नाटा ही मिला।
कुछ लोगों ने बताया कि अमेज़न बिज़नेस अकाउंट में हर बार डिलीवरी की प्राथमिकताएँ पूछी जाती हैं, लेकिन अमेज़न हर बार उन पर अमल नहीं करता। हमारे यहाँ भी सरकारी दफ्तरों में फॉर्म तो भरवा लेते हैं, लेकिन फाइल कहाँ जाती है, किसी को पता नहीं होता!
एक मज़ेदार कमेंट में लिखा – "डिलीवरी बॉय का क्या कसूर? अगर ऑफिस बंद है, तो भला सिग्नेचर लेने के लिए भी कौन रुकेगा?" एकदम सही बात – डिलीवरी वाले तो रोज़ दर्जनों जगह जाते हैं, हर किसी के नियम-धर्म कौन याद रखे!
सीख – नियम बनाओ, पर ज़रा सोच-समझकर!
इस पूरे किस्से से एक बात तो साफ है – नियम बनाना जितना आसान लगता है, अमल में उतना ही मुश्किल हो सकता है। कई बार हम अपने ही बनाए नियमों में उलझ जाते हैं, और सामने वाला बस "जैसा कहा, वैसा किया" वाले अंदाज़ में चलता है।
हमारे देश में भी अक्सर ऐसा होता है – कोई ऑफिस में लिख देता है 'कृपया बिना दस्तक दिए अंदर न आएँ', और फिर खुद ही मीटिंग में देर हो जाए तो सबको फोन करके बुलाता है!
इसलिए, चाहे आप बिज़नेस चला रहे हों या कोई डिलीवरी का ऑर्डर दे रहे हों – अपनी शर्तें और निर्देश साफ़, सरल और व्यावहारिक रखें, वरना कहानी का अंत भी रवि की तरह ही 'मालिक से बदला' वाले अंदाज़ में हो सकता है!
अंत में आपसे सवाल
क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी को उलझनभरे निर्देश दिए हों और उसका अजीब नतीजा निकला हो? या फिर ऑफिस में किसी नियम के चलते सबको परेशानी झेलनी पड़ी हो? अपने मज़ेदार अनुभव नीचे कमेंट में ज़रूर साझा करें!
और हाँ, अगली बार ऑनलाइन ऑर्डर करते वक्त ज़रा सोच-समझकर 'डिलीवरी इंस्ट्रक्शन' भरें, वरना आपका पैकेज भी रवि के अमेज़न स्टेशन में घूमता रह जाएगा!
मूल रेडिट पोस्ट: Delivery: The Customer Got Exactly What They Asked!