जब केविन ने लाइब्रेरी को बना दिया 'धुएँ' का अखाड़ा: एक मज़ेदार किस्सा
शांत लाइब्रेरी में किताबों की खुशबू, सन्नाटा, और पढ़ाई की गंभीरता – यही तो पहचान होती है किसी भी लाइब्रेरी की। मगर सोचिए, अगर वहाँ कोई युवक 'वेपिंग' करने लगे, यानी आधुनिक सिगरेट का धुआँ उड़ाने लगे, तो क्या होगा? आज की कहानी ऐसे ही एक 'केविन' के बारे में है, जिसने लाइब्रेरी को गलती से 'हुक्का बार' समझ लिया!
केविन की 'धुएँदारी' और लाइब्रेरी का कानून
हर शहर में अपने-अपने नियम होते हैं। जिस शहर में ये घटना घटी, वहाँ वेपिंग यानी इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पीना, सार्वजनिक जगहों पर पूरी तरह बैन है। भारी जुर्माना लगता है। अब हमारे केविन साहब, जिन्हें शायद नियम-कानून से उतना ही वास्ता है जितना मछली को पहाड़ से, लाइब्रेरी के फ्रंट डेस्क के सामने बेधड़क वेपिंग करने लगे।
कर्मचारी ने जब उन्हें टोका, तो केविन का जवाब बड़ा मज़ेदार था – “मैं स्मोकिंग नहीं कर रहा, वेपिंग कर रहा हूँ!” जैसे हमारा देशी तर्क – "मम्मी, मैंने चाय नहीं पी, कॉफ़ी पी थी!" पर जब उन्हें बताया गया कि यहाँ कानून वेपिंग और स्मोकिंग, दोनों को एक ही समझता है, तो साहब का अगला तर्क – “यहाँ हर जगह साइन तो नहीं लगे कि वेपिंग मना है!”
अब ऐसे तर्क पर कौन न हँसे! कर्मचारी ने धैर्य रखते हुए बताया, “सर, बाहर दरवाजे पर बोर्ड लगा है।” केविन बाहर गए, लौटे और बोले, “उस बोर्ड पर लिखा है, दरवाजे से 15 फीट दूर स्मोकिंग मना है। मैं तो 15 फीट से ज्यादा दूर था।” लगता है गणित में अच्छे होंगे, मगर नियम समझने में 'फेल'!
लाइब्रेरी कर्मचारी की संयम परीक्षा
देश में अक्सर देखा गया है कि सरकारी या सार्वजनिक जगहों पर नियम तोड़ने वालों की कमी नहीं। लेकिन लाइब्रेरी जैसी जगह पर, जहाँ पढ़ाई के माहौल को सबसे ऊपर रखा जाता है, वहाँ इस तरह की हरकत… मानो मंदिर में DJ बजा दिया हो!
कम्युनिटी की चर्चाओं में एक सदस्य ने चुटकी ली – “अब तो लाइब्रेरियन को भी वो मशहूर 'श्श्श...' वाली आवाज़ निकालनी पड़ेगी और फिर बहार निकालना पड़ेगा।” (यानी, "शांत रहो, ये लाइब्रेरी है!" – जो हर भारतीय लाइब्रेरी का सबसे बड़ा हथियार रहता है।) लेकिन असली मज़ा तब आया जब खुद पोस्ट लिखने वाले ने बताया कि उन्हें 'श्श्श...' करने की भी इजाजत नहीं है, खासकर बुजुर्गों को, क्योंकि सुरक्षा नियम इतने कड़े हैं।
एक और कमेंट में लिखा गया, "अब तो सिक्योरिटी गार्ड को लाइब्रेरियन बना दो, श्श्श... करना उनका हक है!" सोचिए, अगर हमारे देश की लाइब्रेरीज में सिक्योरिटी गार्ड 'श्श्श...' करते दिख जाएँ, तो क्या नज़ारा होगा!
तर्क का जवाब तर्क से – मगर कानून सबसे ऊपर
एक कम्युनिटी सदस्य ने कहा, “केविन तकनीकी रूप से सही तो थे।” जवाब आया, “सही होने का मतलब ये नहीं कि आप नियम तोड़ सकते हैं!” ये बात तो हमारे यहाँ बहुत सुनी जाती है – "कानून अंधा है, मगर बेवकूफ़ नहीं।"
केविन का तर्क कि 'बोर्ड पर 15 फीट लिखा है', किसी बच्चे के उस तर्क जैसा था, जैसे 'मम्मी, आपने कहा था 8 बजे तक घर आना है, मैं तो 7:59 पर आया!' मगर कानून का मकसद सच्ची समझ को पकड़ना है, न कि तर्कबाज़ी को।
लाइब्रेरी – किताबों का मंदिर, न कि चिल करने की जगह
एक और कमेंट में मज़ाकिया लहजे में कहा गया, "अच्छी बात है केविन! बाहर जाके जितना वेपिंग करना है करो, कम से कम पढ़ाई से तो बच जाओगे!" (यानी बाहर रहो, पढ़ाई से दूर ही सही!)
वहीं एक सदस्य ने लाइब्रेरी के बदलते रूप पर रोशनी डाली – “हमारे समुदाय में लाइब्रेरी अब बेघर लोगों की पनाहगाह, गर्मी-ठंडी में राहत, और सामाजिक सेवाओं का केंद्र बन गई है।” यानी लाइब्रेरी अब सिर्फ किताबों की नहीं, समाज की भी सेवा कर रही है। ऐसे में वहाँ शांति और नियमों का पालन ज़रूरी है।
निष्कर्ष: नियम सबके लिए बराबर
इस पूरी घटना से यही सीख मिलती है – चाहे आप केविन हों, स्टीव हों या हमारे मोहल्ले के रमेश काका, सार्वजनिक जगहों के नियम सबके लिए बराबर होते हैं। लाइब्रेरी हो या पार्क, वहाँ की शांति, सुरक्षा और नियमों का पालन करना सबका दायित्व है। और हाँ, अगर आपको लगे कि 'साइन' नहीं दिखा, तो इसका मतलब ये नहीं कि आप मनमानी कर सकते हैं!
तो अगली बार जब आप लाइब्रेरी जाएँ, किताबों की खुशबू लें, पढ़ाई करें और 'धुआँ' उड़ाने की बजाय ज्ञान की रोशनी फैलाएँ!
क्या आपके साथ भी कभी ऐसी कोई मज़ेदार या अजीब घटना हुई है? नीचे कमेंट में ज़रूर बताइए, और अगर पोस्ट पसंद आई हो तो अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें!
मूल रेडिट पोस्ट: Kevin got kicked out of the library